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आचार्य श्री विमर्शसागर जी का रहा सानिध्य : आध्यात्मिक कवि सम्मेलन और जिनेंद्र आराधना के साथ शुरू किया नववर्ष


नववर्ष की मंगल बेला में भावलिंगी संत आदर्श महाकवि आचार्य श्री विमर्शसागर जी मुनिराज ने जिनभक्ति का पावन संदेश आध्यात्मिक कवि सम्मेलन के मध्य छोपीटोला में दिया। श्री जिनेन्द्र आराधना एवं शांतिधारा करते हुए भक्तों ने नववर्ष की शुरुआत कीl पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में श्री जिनेन्द्र आराधना एवं गुरु भक्ति पूर्वक भक्तों ने नववर्ष का प्रारंभ किया।
नववर्ष मुबारक हो, नव हर्ष मुबारक हो। जीवन में पग-पग पर, उत्कर्ष मुबारक हो।।
जिनवर की भक्ति से, नववर्ष मनायेंगे। रूठे हुए अनादि से, निज प्रभु को मनाएंगे।।

नववर्ष की मंगल बेला में भावलिंगी संत आदर्श महाकवि आचार्य श्री विमर्शसागर जी मुनिराज ने जिनभक्ति का पावन संदेश आध्यात्मिक कवि सम्मेलन के मध्य छोपीटोला में दिया। मध्याहन काल की मंगल बेला में देश के मूर्धन्य सुप्रसिद्ध कविगणों के मध्य आदर्श महाकवि भावलिंगी संत आचार्य श्री ने आध्यात्मिक व धार्मिक काव्य पाठ करते हुए श्रद्धालु भक्त गणों के बीच पावन धर्म गंगा का प्रवाह कर दिया।

विशाल जन समुदाय, आदर्श महाकवि के सुमधुर कंठ से आध्यात्मिक कविताएं सुनकर समूचे महानगर में मुक्तकंठ से भूरि-भूरि प्रशंसा करते नजर आए। देशभर से आगंतुक कविगणों में देश विख्यात कमलेश जैन “बसंत”.”, पंकज जैन “अंगार”, अमित जैन “मौलिक” संजय पाण्डेय “भारत” एवं रुचि चतर्वेदी आदि ने आदर्श महाकवि के समक्ष मध्याहन बेला में एवं रात्रिकाल की बेला में गुरु चरणों में एवं जिनागम पंथ के लिए समर्पित अनेकों सुंदर काव्य पाठ विशाल जन समुदाय के मध्य छीपीटरोला के विराग भवन में प्रस्तुत किए। अद्‌भुत एवं अभूतपूर्व अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को पुनः श्रवण करने की मंगल भावना आगरा समाज के भक्तों ने गुरु चरणों में निवेदित की।

शांतिधारा के साथ की जिनेंद्र भगवान की पूजा

श्री जिनेन्द्र आराधना एवं शांतिधारा करते हुए भक्तों ने नववर्ष की शुरुआत कीl सुप्रभातम्, सुप्रभातम् हो मेरा। प्रभु दर्श से सुप्रभातम् हो मेरा। गुरु दर्श से सुप्रभातम् हो मेरा। सुप्रभातम्, सुप्रभातम् हो मेरा। ऐसी सुमधुर ध्वनियों के साथ आगरा में “गुरु विमर्श भक्तों ” का मंगल नव वर्ष का सुप्रभात प्रारंभ हुआ। पूस मास की कड़कड़ाती ठंड में भी आगरा की गलियों में भक्तों की टोली एक मात्र निर्मल सदन छीपीटोला की ओर बढ़ती नजर आ रही थी।

श्री जिन मंदिर पहुंचकर पुजारी भक्त गणों ने श्री शान्तिनाय भगवान के मस्तक पर अपने जीवन एवं विश्वशान्ति की मंगल कामना से आचार्य श्री के श्रीमुख से अतिशयकारी श्री शान्तिभक्ति को सुनते हुए मंगल शान्तिधारा एवं श्री जिनेन्द्र देव की महापूजा सम्पन्न की। आगरा महानगर के गुरु भक्त परिवारों ने गुरुदेव के पावन चरणों में पहुंचकर आचार्यश्री के चरणों को जल से प्रक्षालित कर पावन – पवित्र चरणोदक को अपने मस्तक पर धारण किया।

परिवार सहित आत्मसाधना

स्वर्णिम इतिहास को रचते हुए सात वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश की देवेन्द्रनगर धर्मनगरी में आचार्य श्री ने एक ही परिवार के चार सदस्य, जिनमें वर्तमान में मुनि विशुभ्र सागर जी के माता-पिता एवं दादाजी ने भी आचार्य श्री के पावन न्यरणों में श्री भगवती जिनदीक्षा धारण की थी। तीन पीढ़ियों की एक साथ जिनदीक्षा का यह अपूर्व अवसर अद्‌भुत व अभूतपूर्व है। आचार्य संघ में ऐसे ही अनेकों परिवार हैं, जो सम्पूर्ण परिवार के साथ गुरु चरणों में समर्पित रहकर आत्म साधना कर रहे हैं।

किया मंगल विहार

नव वर्ष की मंगल बेला में आगरा नगर की गौरवशाली आर्यिका श्री 105 विधान्त श्री माताजी का पिच्छिका परिवर्तन का सौभाग्य भी गुरु भक्तों प्राप्त हुआ। माताजी की पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का सौभाग्य उनके ही गृहस्थ जीवन के पिता अनिल कुमार जैन को प्राप्त हुआ। इसी बीच गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी ने भी गुरु चरणों में श्रद्धा सुमन समर्पित कर विदाई ली एवं मंगल विहार किया। इस मौके पर विश्वजीत जैन, प्रवीन जैन नेताजी, दीपक जैन, सत्येंद्र जैन, दयाचंद जैन, ऋषभ जैन, मुकेश जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज के लोग उपस्थित थे l

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