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भगवान चंद्रप्रभु ने प्राप्त किया मोक्ष भाव विभोर हुए श्रद्धालु: मुनिश्री पूज्यसागर जी के सानिध्य में हुए समस्त कल्याणक में चंदाप्रभु के जयकारों से गूंजा वैभव नगर   

इंदौर। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के पावन दीक्षा दिवस, जगदगुरु कर्मयोगी स्वातिश्री चारूकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के अवतरण दिवस के पुण्य अवसर पर संयोजित लघु पंचकल्याणक महोत्सव में मां अहिल्या की पावन नगरी इंदौर के वैभव नगर में सोमवार को भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था श्री पद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर परिसर स्थित संत वसतिका भवन में आयोजित लघु पंचकल्याणक महोत्सव का।

अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस त्रिदिवसीय महोत्सव के अंतिम दिन पूरा परिसर भगवान चंद्रप्रभु के जयकारों से गूंजता रहा। भक्त और श्रद्धालु भगवान के ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक के पुण्य अवसरों पर भाव-विभोर होकर भक्ति में लीन रहे। यह आयोजन श्रीफल जैन न्यूज, वैभवनगर दिगंबर जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

ज्ञान और मोक्ष कल्याणक का संगम

रेखा संजय जैन ने बताया कि महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन भगवान चंद्रप्रभु के ज्ञान और मोक्ष कल्याणक की क्रियाएं अत्यंत भक्तिभाव के साथ संपन्न की गईं। सुबह की मांगलिक वेला में जब भगवान चंद्रप्रभु को अशोक वृक्ष के नीचे ‘केवल्य ज्ञान की प्राप्ति का दृश्य जीवंत हुआ तो भक्त भाव-विभोर हो उठे। शंख आदि मंगल वाद्य और संगीत की मंगल ध्वनियों के बीच समूचा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विधान की सभी सूक्ष्म क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य बालब्रह्मचारी सुनील भैयाजी और प्रतिष्ठाचार्य भरत जैन शास्त्री के निर्देशन में संपन्न हुईं। इंद्र और इंद्राणियों ने अष्ट द्रव्यों से भगवान की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन को धन्य बनाया। इंद्रों ने रत्नों की वर्षा कर इस अवसर को और अधिक यादगार बनाया।

समवशरण की रचना और मुनिश्री की अमृतवाणी

केवल्य ज्ञान की प्राप्ति के पश्चात देवों और इंद्रों द्वारा भव्य समवशरण की रचना की गई। इस अलौकिक सभा में भगवान चंद्रप्रभु की मंगल ध्वनि खिरी। इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने इंद्रों और देवों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए देव-शास्त्र-गुरु के मर्म को विस्तार से समझाया और उनकी जिज्ञासा का समाधान तार्किक रूप से किया। मुनिश्री ने अपने संबोधन में कहा कि देव वही है जो राग-द्वेष से रहित हो और जिसे केवलज्ञान की प्राप्ति हो चुकी हो।

अरिहंत वे भगवान हैं, जिन्होंने आठ कर्मों का नाश कर दिया है। शास्त्रों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि, सच्चे शास्त्र वे हैं जिनमें अरिहंत और सिद्ध भगवान की वाणी का संदेश समाहित होता है। 46 गुणों से युक्त जिनेंद्र देव की वाणी ही हमारे लिए पूजनीय और वंदनीय है, जो हमें संसार की मोह-माया से मुक्ति का मार्ग दिखाती है। मुनिश्री ने अन्य जिज्ञाषुओं की शंका का समाधान करते हुए भक्ति मार्ग को सर्वश्रेष्ठ बताया।

मोक्षगमन का जीवंत दृश्य

महोत्सव के समापन सत्र में भगवान चंद्रप्रभु के विहार और फिर कूट पर विराजित होकर मोक्ष प्राप्ति (निर्वाण) का दृश्य साकार किया गया। यहां मोक्ष कल्याणक से संबंधित सभी क्रियाओं को संपन्न करवाया गया। भक्तों ने निर्वाण लाडू चढ़ाकर भगवान से अपने कर्मों के क्षय की प्रार्थना की। इस दृश्य को देखकर उपस्थित जनसमूह की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं।

धर्ममय हुआ वैभव नगर का वातावरण

मां अहिल्या की नगरी, वैभवनगर के वैभवशाली दिगंबर जैन समाजजनों का सौभाग्य और अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज की मुखरित ध्वनि के बाद सोमवार को भगवान चंदाप्रभु जी के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया।

तीन दिनों तक चले इस लघु पंचकल्याणक महोत्सव ने वैभव नगर के दिगंबर जैन समाज ही नहीं, बल्कि पूरे इंदौर के श्रद्धालुओं को धर्म की गंगा में सराबोर कर दिया। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि मुनिश्री के सानिध्य में इस तरह के आयोजनों से युवा पीढ़ी को जैन दर्शन और अपनी संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। अंत में, सभी श्रावकों ने मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त कर इस भव्य आयोजन का मंगल समापन किया।

कायर्क्रम का मुख्य आकर्षण

भगवान चंद्रप्रभु के कैवल्य ज्ञान पर देवों द्वारा समवशरण की रचना, मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज द्वारा देव-शास्त्र-गुरु की व्याख्या और भक्तों द्वारा निर्वाण लाडू समर्पण और मोक्ष कल्याणक की खुशियां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। मोक्षकल्याण के अर्घ्य अर्पित करने के बाद भगवान को पालकी विराजमान कर बैंडबाजों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें इंद्र रत्नों की वर्षा करते हुए चल रहे थे। महिला पुरुष भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए चल रहे थे।इसके बाद भगवान का अभिषेक और शांतिधारा इंद्रों ने की। कार्यक्रम में बाल ब्रम्हचारी सुनील भैया का मंदिर समिति की ओर से अध्यक्ष श्रीपाल जैन, महामंत्री दीपक मादावत ,विनोद जैन महिला मंडल अध्यक्ष अर्चना मादावत,सचिव सपना मादावत सहित वैभवनगर के दिगंबर जैन समाज और श्रीफल जैन न्यूज़ की ओर से रेखा संजय जैन ने सम्मान किया। पूरे तीन दिन तक कार्यक्रम को सुमधुर संगीत और स्वरलहरियों से भक्तिमय बनाने वाले संगम जैन का सहयोग भी सराहनीय रहा। कार्यक्रम में विशेष सहयोगी रहे पवन पाटोदी।

लघु पंच कल्याणक महोत्सव में यह रहे विशेष पुण्यार्जक परिवार 

लघु पंचकल्याणक महोत्सव में माता-पिता राजकुंवर प्रकाशचंद्र मादावत जैन, सौधर्म इंद्र अर्पिता संदीप मादावत, धनपति कुबेर शिल्पा पियूष गांधी, महायज्ञनायक प्रीति संजय जैन, यज्ञ नायक आभा अनिल जैन, मूर्ति प्रदाता अर्चना अनिल ,अनिमेष,निलय मादावत,ईशान इंद्र प्रतीक्षा सीए गौरव जैन, सनतकुमार इंद्र सुनीता अशोक पालविया, माहेंद्र इंद्र स्वाति रितेश जैन, ब्रह्म इंद्र डॉ. विनीता हेमंत जैन, लांतव इंद्र शिल्पा नितेश जैन, भागलपुर, महाशुक्र इंद्र विजयलक्ष्मी जरतकुमार जैन, सहस्रार इंद्र रीता दिलीप वैद्य, मिलन हाईट्स, आणत इंद्र प्रीति विनोद जैन, प्राणत इंद्र सीमा संजय, सम्यक जैन, आरण इंद्र सूरजमल सुशीला पाटनी, अच्युत इंद्र सपना दीपक मादावत, रजत द्रव्य कर्ता शिवानी सचिन शौर्य जैन, द्रव्यदाता पुर्ण्याजक रूबी मुकेश जैन, डिम्पल मनोज रामावत, राकेश जैन के सहयोग को भी सराहना मिली और इन्होंने धर्म प्रभावना में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया।

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