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कुंदकुंद स्वामी ने बार-बार दिया उपादान शक्ति पर जोर: मुनिश्री के आशीर्वाद लेने और अमृतमयी प्रवचन सुनने उमड़ रहे श्रद्धालु 


मुनिश्री सुधासागर जी महाराज अशोकनगर के सुभाषगंज में इन दिनों विराज रहे हैं। यहां पर उन्होंने धर्मसभा को संबोधित किया। मुनिश्री के आशीर्वाद लेने और उनके अमृतमयी प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन धर्मसभा में शामिल हो रहे हैं। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…


अशोकनगर। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज अशोकनगर के सुभाषगंज में इन दिनों विराज रहे हैं। यहां पर उन्होंने धर्मसभा को संबोधित किया। मुनिश्री के आशीर्वाद लेने और उनके अमृतमयी प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन धर्मसभा में शामिल हो रहे हैं। मुनिश्री ने प्रवचन के दौरान कहा कि सबसे बड़ा पापी वह है, जिसने गाय काटने के लिए नहीं खरीदी थी, दूध के लिए खरीदी थी और दूध पिया भी और जब देना बंद कर दिया तो कत्लखाने में बेच दिया। मुनि श्री सुधासागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि उपादान शक्ति प्रकट होने के बाद वह मालिक, निर्भय और स्वतंत्र बनाती है। उपादान वाला किसी रास्ते पर नहीं चलता, वह जहां से चला जाता है, वही रास्ता बन जाता है। पूज्य कुंदकुंद स्वामी ने बार-बार उपादान शक्ति पर जोर दिया। स्वयं की यदि सब्जी की दुकान है तो वह सब्जी की दुकान का मालिक है और करोड़ों की संपत्ति की फैक्ट्री है, उसके बावजूद भी वहां पर वह नौकर है, दास ही रहेगा उसे हमेशा भय सताता रहेगा कि सेठ मुझे कभी भी निकाल सकता है। वह काम कर नहीं रहा है, उसे काम करना पड़ रहा है, इसलिए ऋषभदेव ने आजीविका के साधन में नौकरी नहीं लिखी, शुद्र बना दिया, लुहार बना दिया, यहाँ तक कि जूते बनाने वाला बना दिया। शूद्र वर्ण कोई निंदनीय शब्द नहीं है। उसमें कोई अनादर वाली बात नहीं है, एक व्यवस्था है।

वो आजीविका नहीं कमाना, जिसमंे भय हो

जूते पर पोलिश करके, झाड़ू लगाकर के आजीविका करना कोई हानिकारक या निंदनीय नहीं क्योंकि, वो तुम्हारी आजीविका है। जिस चीज में तुम्हें किसी का डर न लगे, वह धंधा करने की अनुमति मिली। अंत में जाकर कहा भीख मांग लेना। श्री शांति सागर जी महाराज ने कहा कि एक तरफ नौकरी है और दूसरी तरफ भीख मांगना तो भीख मांगना श्रेष्ठ है क्योंकि, भीख मांगने में भय नहीं है, वह स्वतंत्र है। ऋषभदेव के समय में में भी दास दासी थे लेकिन, उनका उपदेश नहीं दिया जाएगा। बहुत सारे कार्य होते है लेकिन उनको मार्ग नहीं बनाया जाएगा, ये मजबूरी है। अपनी जिंदगी में वो आजीविका नहीं कमाना, जिसमंे भय हो। पाप कितना भी हो जाए, उसका डर नहीं है लेकिन पाप को कानून से छूट नहीं मिलना चाहिए। पाप खुलेआम नहीं होना चाहिए, पाप अपवाद मार्ग है, यदि समाज में पास कर दिया तो वह पाप कभी खत्म नहीं होगा।

हे! भगवन मुझे जिंदगी में तेरी भी जरूरत न पडे़

जो मोक्ष जाना चाहते हैं। एक ही साधना, एक ही तपस्या, विचार करें कि मेरे अंदर जिंदगी में जीने के लिए मुझे कभी भी किसी भी रूप में किसी कार्य के लिए पराधीन न होना पड़े। यहाँ तक कि मुमुक्षु भगवान से भी कहता है कि भगवन बस वरदान देना तो एक ही देना कि मुझे जिंदगी में तेरी भी जरूरत न पड़े। निज शक्ति जागरण, निमित्त शक्ति जागरण, देवता शक्ति जागरण, गुरु शक्ति जागरण, भगवान शक्ति जागरण, माता-पिता शक्ति जागरण, पड़ोसी शक्ति जागरण ये सारी शक्तियों को हर व्यक्ति चाह रहा है। भगवान शक्ति जागरण-भगवान की शक्ति मुझे जाग जाए और मेरे सारे काम भगवान से हो जाए। मां-बाप शक्ति जागरण-मां-बाप की सारी वसीयत मुझे मिले, पड़ोसी शक्ति जागरण-पड़ोसी की वस्तु हमारे हवाले हो जाए। पेड़ शक्ति जागरण-इस पेड़ से मुझे अच्छे फल मिले। तुम समझ रहे हो ये कि बहुत अच्छी चीज है, यही तुम्हारी जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी है, तुम अनाथ, असहाय, दरिद्र होते जाओगे क्योंकि, तुम्हारे 24 घंटे का सुख पर के आधीन है, तुम कभी शक्तिमान नहीं हो पाओगे।

…तो जाओ परमात्मा बनने का लक्षण शुरू हो गया

जे-जो वस्तुएं तुम्हारे जीवन में आवश्यक है, वे सब नहीं मिलने पर क्या तुम अपनी शांति बरकरार कर सकते हो। अब तुम्हारी शांति प्रकट होगी, अब तुम बनोगे मालामाल, अब बनोगे तुम त्रिलोकीनाथ। एक पेस्ट नहीं मिला तो अपने परिणाम शांत रखो, हमारी पत्नी, हमारे बच्चे, हमारी माँ है, हमारा परिवार है। जिन्होंने हमें जिंदगी दी है, एक पेस्ट न मिलने पर इतने क्रोधित हो जाएं हम उन पर। यदि तुमने ये और कह दिया कोई बात नहीं तो जाओ परमात्मा बनने का लक्षण शुरू हो गया, उसी समय तुम्हे ऐसे कर्म का बन्ध होगा कि तुम जिंदगी भर मंजन नहीं करोगे तो भी तुम्हारे मुंह मे पायरिया नहीं होगा। जैन दर्शन को तुम्हें समझना है तो मात्र अपना मत सोचो, सामने वाले की भी मजबूरी पर विचार करो।

एक दिन तुम्हारे घर मंे कामधेनु गाय आएगी

कसाई बूचड़खाने में पशुओं को, भैस, गाये, बकरे जो भी काट रहा है, उसको इतना बड़ा दोष नहीं है क्योंकि उसका सारा खाता उजागर है, वो काटने के लिए ही लाया है। सबसे बड़ा पापी वह है जिसने गाय काटने के लिए नहीं खरीदी थी, दूध के लिए खरीदी थी और दूध पिया भी और जब देना बंद कर दिया तो कत्लखाने में बेच दिया ये है संसार का सबसे बड़ा कसाई, जिसकी सद्गति नहीं हो सकती। वो गाय कटते समय आंसू बहाती है कि देखो मैंने क्या नहीं किया इसके साथ, 5 साल तक इसको दूध दिया। आज बुढ़ापे में साल दो साल की मेरी जिंदगी थी, इतने में ही इसने मुझे कसाई के हाथों बेच दिया, उस समय वह बद्दुआ देती है-जा एक एक बूंद दूध पीने को तरसेगा, तो भी तुझे दूध पीने को नहीं मिलेगा, इसलिए गाय को उसी प्रकार भोजन दो, उसी प्रकार प्यार करो, वो गाय तुम्हें ऐसी दुआ देगी कि एक दिन तुम्हारे घर मंे कामधेनु गाय आएगी।

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