इंदौर के कल्पतरु जिनालय में मुनि विमल सागर और मुनि अनंत सागर के सानिध्य में 108 जिनबिंबों का भव्य मस्तकाभिषेक एवं शांति धारा सम्पन्न हुई। हजारों श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत आयोजन का लाभ लिया। पढ़िए रिपोर्टर ओम पाटोदी की यह खबर…..
इंदौर में पहली बार ऐसा अद्भुत और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब तीनों काल के चौबीस तीर्थंकरों के 108 जिनबिंबों का अभिषेक एक ही दिन और एक ही स्थान पर सम्पन्न हुआ। जिसने भी यह दृश्य देखा, वह अपने आप को सौभाग्यशाली मानता नजर आया।
हजारों कलशों से अभिषेक
श्री आदि वीर जिनालय, कल्पतरु क्षेत्र में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में 5184 कलशों का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें हजारों कलशों से अभिषेक किया गया। साथ ही सभी जिनबिंबों का मस्तकाभिषेक और शांति धारा एक साथ सम्पन्न होना इस आयोजन को और भी विशेष बना गया।
संतों के सानिध्य में दिव्यता
यह आयोजन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि विमल सागर जी महाराज और मुनि अनंत सागर जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
पहली बार बना अनुपम संयोग
आयोजन समिति के अनुसार, मंदिर स्थापना के बाद यह पहला अवसर था जब इतने विशाल स्तर पर सभी प्रतिमाओं का एक साथ अभिषेक और शांति धारा हुई, जो अपने आप में अनूठा और अद्वितीय रहा।
जीवन में धर्म का महत्व
अपने उद्बोधन में मुनि श्री विमल सागर जी ने कहा कि व्यक्ति जन्म से मृत्यु तक भागदौड़ में लगा रहता है, लेकिन यदि जीवन को सार्थक बनाना है तो उसमें धर्म, संस्कार और संस्कृति को अपनाना जरूरी है। उन्होंने देव पूजा, गुरु उपासना, दान, दया, संयम और स्वाध्याय को जीवन का आधार बताया।
श्रद्धालुओं में उत्साह
इस भव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल से सराबोर हो गया।













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