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मेनका गांधी के विवादित बयान पर जैन समाज का कानूनी एक्शन : सार्वजनिक माफी और बयान वापस लेने की मांग, 7 दिन का नोटिस


पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के दिगंबर जैन संतों को लेकर दिए गए विवादित बयान के विरोध में जैन समाज ने अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में सात दिन के भीतर सार्वजनिक माफी एवं बयान वापस लेने की मांग की गई है। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।


इंदौर। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा दिगंबर जैन संतों के संबंध में दिए गए विवादित बयान को लेकर जैन समाज ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। समाज के प्रतिनिधियों ने उनके बयान को असत्य, निराधार, भ्रामक तथा जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए अधिवक्ता के माध्यम से रजिस्टर्ड कानूनी नोटिस प्रेषित किया है।

समाज पदाधिकारियों ने जताई कड़ी आपत्ति

जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन, मयंक जैन, राजेश जैन दद्दू, टी.के. वेद, हंसमुख गांधी, आनंद नवीन गोधा तथा महिला परिषद की संभागीय अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि दिगंबर जैन संतों के संबंध में लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और इससे करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है।

नोटिस में किए गए प्रमुख कानूनी उल्लेख

कानूनी नोटिस में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A के अंतर्गत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धारा 499 एवं 500 के अंतर्गत मानहानि तथा सोशल मीडिया पर कथित प्रसार की स्थिति में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं का उल्लेख किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जैन समाज ने रखा अपना पक्ष

मयंक जैन ने बताया कि नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्मः” है। दिगंबर मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छी प्राकृतिक रूप से गिरे हुए मोरपंखों से बनाई जाती है तथा किसी भी जीव की हिंसा जैन धर्म में पूर्णतः निषिद्ध मानी गई है। समाज ने कहा कि मोरों की हत्या संबंधी आरोप पूरी तरह निराधार हैं और इससे जैन धर्म एवं संत परंपरा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

सात दिन में मांगा जवाब

नोटिस में मेनका गांधी से सात दिवस के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने तथा अपना बयान वापस लेने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समयसीमा के भीतर संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ तो आपराधिक एवं सिविल मानहानि संबंधी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

समाज ने एकजुटता का दिया संदेश

विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ तथा अन्य समाज प्रतिनिधियों ने कहा कि दिगंबर जैन संतों पर हिंसा का आरोप जैन समाज की धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार है। समाज ने तथ्यों के आधार पर संवाद बनाए रखने और धार्मिक विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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