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जैन संतों की सुरक्षा का मुद्दा उठा प्राथमिकता के साथ : अल्पसंख्यक आयोग से मिलकर जैन समाज ने सौंपा ज्ञापन


 जैन संत मंत्र महर्षि (डॉ.) क्षुल्लक श्री योग भूषण जी महाराज के मार्गदर्शन में जैन समाज के एक विशेष प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा से शिष्टाचार भेंट कर उनको अल्पसंख्यक जैन समाज की वर्तमान समस्याओं से अवगत करवाया। इस हेतु प्रतिनिधि मंडल ने निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


नई दिल्ली। जैन संत मंत्र महर्षि (डॉ.) क्षुल्लक श्री योग भूषण जी महाराज के मार्गदर्शन में जैन समाज के एक विशेष प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा से शिष्टाचार भेंट कर उनको अल्पसंख्यक जैन समाज की वर्तमान समस्याओं से अवगत करवाया। इस हेतु प्रतिनिधि मंडल ने निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया।

पद विहार करते समय जैन संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग‌ करते हुए कहा गया है कि जैन मुनियों को समाज में स्वतंत्र रूप से विचरण करने के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है ताकि वे बिना किसी भय के अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें। जैन समाज के प्राचीन तीर्थ स्थलों और मंदिरों के संरक्षण हेतु अनर्गल कब्ज़े और अतिक्रमण को हटाने की माँग की गई है। समाज का कहना है कि इन धार्मिक स्थलों का संरक्षण और सम्मान सुनिश्चित किया जाए। अति अल्पसंख्यक समुदाय को केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली विशेष सुविधाओं का लाभ जैन‌ समाज तक पहुँचाने की प्रक्रिया पर अमल किया जाए। समाज ने इस बात पर जोर दिया कि इन सुविधाओं का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन हो ताकि जैन समाज को उनका पूरा लाभ मिल सके। अंत में जैन पर्सनल लॉ बोर्ड के गठन पर विचार करने की मांग की गई है। समाज का कहना है कि इससे जैन समाज की विशेष कानूनी आवश्यकताओं को संबोधित करने में सहायता मिलेगी।

हर संभव होगा प्रयास

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने प्रतिनिधि मंडल की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग जैन समाज की समस्याओं को सुलझाने और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। क्षुल्लक श्री योग भूषण जी महाराज ने कहा कि यह बैठक जैन समाज की आवश्यकताओं और चिंताओं को सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जैन‌ समाज की वर्तमान समस्याओं के निदान हेतु सरकार का इस ओर ध्यान आकृष्ट करना अत्यंत आवश्यक है। समाज ने उम्मीद जताई है कि उनकी माँगों पर जल्द ही सकारात्मक कार्यवाही की जाएगी।

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