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अकाट्य श्रद्धा से परमात्मा बनना संभव: क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी ने धर्मसभा में बताया श्रद्धा का महत्व 


क्षुल्लक द्वय श्री महोदय सागर जी, क्षुल्लक श्री पुण्योदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का जलाभिषेक पंचामृत अभिषेक, महा शांतिधारा छहढाला कक्षा शिक्षण, इष्टोपदेश ग्रंथ पर प्रवचन, सायंकल श्रीजी देव शास्त्र गुरु की आरती, भक्ति, जिनदर्शन क्यों? कैसे! पर विवेचना, प्रश्नमंच, पुरस्कार वितरण के कार्यक्रम प्रतिदिन हो रहे हैं। धरियावद से पढ़िए, श्रीफल साथी अशोककुमार जेतावत की यह खबर….


धरियावद। श्रद्धा वह है, जो कभी देखा न हो, सुना न हो, फिर भी विश्वास किया जाता है। श्रद्धा की भाषा, परिभाषा, बोल कुछ नहीं होते हैं, वह तो हमारे हृदय से प्रगट होती है। श्रद्धा देखी नहीं है, सुनी होती है पर वर्तमान में हमारी तो श्रद्धा तो कांच के प्याले की तरह होती है। थोड़ा सा धक्का लगे तो टूट जाती है। यह प्रबोधन क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ने रविवार को श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिया। क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी ने कहा कि आप मंदिर में वेदी पर द्रव्य चढ़ाते हैं, पर अपने मन के श्रद्धा की वेदी पर द्रव्य न चढ़ाने से वह अनमोल नहीं बन पाता है, वह निष्फल ही रहता है। अतः अकाट्य श्रद्धा का होना जरूरी है, तभी वह द्रव्य चढ़ाना सार्थक हो पता है। प्रभु के दरबार में पहले विश्वास करो फिर इस्तेमाल करो वाला फॉर्मूला (सिद्धांत) चलता है, न कि पहले इस्तेमाल करो फिर विश्वास करो वाला।

दुनिया के सारे काम में दिखावा करें तो चलेगा 

क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी ने कहा कि जिसने अपने जीवन में श्रद्धा रूपी स्टैंड डाल दिया तो चाहे उसका जीवन रहे ना रहे, पर धर्म सदा जीवित रहेगा। श्रद्धा और श्रद्धेय के बीच में कोई तत्व नहीं रहता है। श्रद्धा किसी के वास्ते नहीं रहती है, वह अपना रास्ता स्वयं बना लेती है। उसे किसी माइल स्टोन की आवश्यकता नहीं रहती है। आजकल मंदिरों भीड़ बढ़ रही है, पर श्रद्धा घट रही है। मंदिर में प्रतिमाएं बढ़ रही है, पर भक्त कम हो रहे हैं। हमारे अंतरंग में निश्चल, दृढ़ निर्मल होकर अकाट्य श्रद्धा करने से परमात्मा तक बन सकते हैं। हमें भक्तिपूर्वक, भावपूर्वक जिनेंद्र भगवान के जिन मंदिर में आना चाहिए। दिखावे के लिए नहीं आना चाहिए। दुनिया के सारे काम में दिखावा करें तो चलेगा पर जिनेंद्र भगवान के दरबार में आकर दिखावा करने वालों को फूटी कौड़ी भी मिलने वाली नहीं है। अतः हमारे अंतरंग में श्रद्धा का अकाट्य श्रीफल चढ़ाना चाहिए।

धार्मिक प्रश्नोत्तरी क्विज प्रतियोगिता जारी 

क्षुल्लक द्वय श्री महोदय सागर जी, क्षुल्लक श्री पुण्योदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का जलाभिषेक पंचामृत अभिषेक, महा शांतिधारा छहढाला कक्षा शिक्षण, इष्टोपदेश ग्रंथ पर प्रवचन, सायंकल श्रीजी देव शास्त्र गुरु की आरती, भक्ति, जिनदर्शन क्यों? कैसे! पर विवेचना, प्रश्नमंच, पुरस्कार वितरण के कार्यक्रम प्रतिदिन हो रहे हैं। साथ ही प्रत्येक रविवार को रात्रि 8 बजे से एंड्रॉयड मोबाइल पर कंप्यूटराइज्ड धार्मिक प्रश्नोत्तरी क्विज प्रतियोगिता भी हो रही है।

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