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ज्ञानसागर का दीक्षा समारोह ज्ञानतीर्थ पर 31 मार्च को : महामस्तकाभिषेक, विधान सहित होंगे अनेक कार्यक्रम


दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह 31 मार्च को ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। दिगम्बराचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह 31 मार्च को ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। ज्ञानतीर्थ क्षेत्र जैन मंदिर पर विराजमान ब्रह्मचारिणी बहिन मंजुला दीदी के अनुसार उत्तर भारत के प्रथम दिगम्बराचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) परम्परा में मसोपवासी चर्या शिरोमणी आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य गुरुदेव, ज्ञानतीर्थ प्रणेता, सराकोद्धारक समाधिस्थ षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का 36वां दीक्षा दिवस समारोह परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री अंतसमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में 30 एवं 31 मार्च को ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर मनाया जा रहा है।

छत्तीसी विधान के साथ होंगे कई कार्यक्रम

कार्यक्रम के प्रथम दिन गुरुवार, 30 मार्च को प्रातः 8 बजे से श्री जिनेन्द्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात आचार्य छत्तीसी विधान होगा। जिसमें गुरुभक्त सधर्मी बन्धु, माता-बहिनें इंद्र-इंद्राणी स्वरूप जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित करेंगे। दूसरे दिन शुक्रवार को प्रातः 8 बजे बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन, महा अर्चना, अष्टद्रव्य से पूजन एवं महाआरती होगी। इस अवसर पर भजन, भक्ति नृत्य एवं बालिकाओं द्वारा सांस्क्रतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेंगे।

महावीर जन्मकल्याणक पर ली थी दीक्षा

ज्ञातव्य हो कि मुरैना में वैशाख सुदी द्वितीया 01 मई 1957 को जन्मे उमेश जैन ने आज से 36 वर्ष पूर्व भगवान महावीर जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर चैत्र सुदी त्रियोदशी 31 मार्च 1988 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर (दतिया) में आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज से जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की थी। मुनि श्री ज्ञानसागर जी महाराज निरन्तर जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करते हुये संयम की साधना करते रहे। आपकी प्रतिभा को देखकर गुरुदेव ने आपको उपाध्याय पद से विभूषित किया। श्री अतिशय क्षेत्र बड़ागांव (बागपत) में ज्येष्ठ वदी तृतीया 27 मई, 2013 को आचार्य पद से विभूषित कर आपको छाणी परम्परा का षष्ट पट्टाचार्य बनाया गया। आपकी समाधि भगवान महावीर निर्वाण दिवस पर कार्तिक कृष्ण अमावस्या 15 नबम्बर 2020 को श्री अतिशय क्षेत्र वांरा (कोटा) राजस्थान में हुई।

दीक्षा दिवस के अवसर पर सभी आगन्तुक महानुभावों के आवास एवं भोजनादि की व्यवस्था ज्ञानतीर्थ पर की गई है । ज्ञानतीर्थ आने जाने हेतु मुरेना से वाहन व्यवस्था उपलब्ध रहेगी ।

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