अतिशय तीर्थ क्षेत्र श्री यशोदय तीर्थ में सिद्धचक्र महामंडल विधान पूरे धार्मिक विधि विधान के साथ शुभारंभ हुआ। इस विधान के प्रारंभ होने के पूर्व नगर में कलश यात्रा निकाली गई। पढ़िए राजीव सिंघाई की विशेष रिपोर्ट…
महरौनी (ललितपुर)। अतिशय तीर्थ क्षेत्र श्री यशोदय तीर्थ में सिद्धचक्र महामंडल विधान पूरे धार्मिक विधि विधान के साथ शुभारंभ हुआ। इस विधान के प्रारंभ होने के पूर्व नगर में कलश यात्रा निकाली गई तथा मंदिर परिसर में ध्वजारोहण भी पुण्य अर्जक द्वारा किया गया। इस श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का आयोजन श्री सुधासागर यशोदय महिला समिति द्वारा किया जा रहा है।

कलश यात्रा में शामिल हुए भक्त
पंडित अंकित जैन शास्त्री सागर के सानिध्य में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में श्री सुधासागर यशोदय महिला समिति के काफी संख्या में पदाधिकारी और सदस्यों ने भाग लिया। सभी श्रावक भक्ति में झूमते हुए खुशियां मनाते हुए कलश यात्रा में शामिल हुए। पंडित अंकित जैन शास्त्री ने बताया कि इस सिद्धचक्र महामंडल विधान से दिव्य शक्तियां होती हैं। प्रकट यह विधान सभी विधान का राजा है, इसमें सभी विधान शामिल हैं। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जो हमारी जीवन के सभी पाप, ताप और संताप को नष्ट कर देता है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य-कृत्य, चक्र का अर्थ समूह और मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृत्ताकार यंत्र से है। जिसमें कई प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है। मंत्र शास्त्र के अनुसार इसमें अनेक प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रकट हो जाती हैं। सिद्ध चक्र मंडल विधान सभी सिद्ध समूह की आराधना मंडल की साक्षी में की जाती है, जो हमारे सभी मनोरथों को पूरा करता है। पुराणों के अनुसार मैना सुंदरी ने इसी सिद्धचक्र महामंडल विधान के आयोजन से अपने कोढ़ी पति श्रीपाल को कामदेव जैसा सुंदर बना दिया था। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री यशोदय सुधासागर महिला समिति की सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का योगदान रहा ।













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