समाचार

सिद्ध क्षेत्र अहार जी में आयोजन : सिद्धचक्र विधान में 128 अर्घ्य समर्पित कर सिद्धों की आराधना


श्री 1008 सिद्ध क्षेत्र अहार जी में सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन मुनिश्री श्रुतेश सागर जी एवं मुनिश्री सुश्रुतेश सागर महाराज के पावन सानिध्य में किया जा रहा है। यह आयोजन विधानाचार्य ब्रह्मचारी संजय भैया, पंडित दीपक जी हजारीबाग तथा पंडित कमल कुमार शास्त्री लार के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रहा है। पढ़िए मुकेश जैन लार


टीकमगढ़। श्री 1008 सिद्ध क्षेत्र अहार जी में सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन मुनिश्री श्रुतेश सागर जी एवं मुनिश्री सुश्रुतेश सागर महाराज के पावन सानिध्य में किया जा रहा है। यह आयोजन विधानाचार्य ब्रह्मचारी संजय भैया, पंडित दीपक जी हजारीबाग तथा पंडित कमल कुमार शास्त्री लार के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रहा है।

128 अर्घ्य समर्पण के साथ आराधना

रविवार को सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत 128 अर्घ्य समर्पित कर सिद्ध भगवान की विशेष आराधना की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ अनुष्ठान में सहभागिता की।

अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा

रविवार के अनुष्ठान में श्रीजी का अभिषेक किया गया तथा रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के साथ जगत कल्याण हेतु वृहद शांतिधारा संपन्न हुई। बीजाक्षरों का उच्चारण स्वयं पूज्य मुनिश्री द्वारा कराया गया। इसके पश्चात नित्य पूजन एवं सम्मुचय की पूजन के बाद विधिवत विधान संपन्न किया गया।

मुनिश्री का प्रेरक प्रवचन

इस अवसर पर पूज्य मुनिश्री ने प्रवचन में महासती मैना सुंदरी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि उन्होंने सिद्धचक्र महामंडल की आराधना कर अपने कोढ़ी पति को कुष्ठ रोग से मुक्त कराया था। इसका कारण यही था कि उन्होंने मुनिश्री के वचनों पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए अंतरंग भक्ति भाव से सिद्धचक्र महामंडल की आराधना की थी। मुनिश्री ने कहा कि यदि हम भी सिद्धों की अंतरंग भक्ति से आराधना करेंगे तो परम पद की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

108 प्रकार के पापों से मुक्ति का संदेश

श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद देते हुए मुनिश्री ने कहा कि जीव अपने दैनिक जीवन में मन, वचन और काया से कार्य करना, कराना तथा करने वालों की अनुमोदना करना, क्रोध, मान, माया और लोभ के कारण विचार करना, साधन जुटाना एवं कार्य प्रारंभ करना—इस प्रकार कुल 108 प्रकार के पापों का आश्रव करता रहता है। सिद्ध परमेष्ठी इन 108 प्रकार के पापों से रहित होते हैं। हम भी इन पापों का क्षय कर 20 विशेष गुणों को प्राप्त कर सकें, इसी भाव के साथ इस सिद्धचक्र महामंडल विधान में 128 अर्घ्यों के माध्यम से सिद्ध भगवान की आराधना की गई।

महाआरती एवं सांस्कृतिक आयोजन

महाआरती का सौभाग्य आकाश सिंघई को प्राप्त हुआ। रात्रि में महावीर जी आई पलक जैन एवं स्थानीय संगीतकार प्रवीण जैन द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों की स्वर लहरियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इसके पश्चात तंबोला प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में पुण्यार्जक परिवार की ओर से अशोक जैन, शिक्षक द्वारा सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page