मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने कहा कि यदि सभी धर्म समान हैं और सभी के अधिकार समान हैं तो देश में सभी धर्मों के लिए व्यवस्थाएं भी समान होनी चाहिए। मुनि श्री ने पत्रकारों को संबोधित किया। विदिशा से पढ़िए, यह खबर…
विदिशा। आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य आचार्य श्री समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने कहा कि यदि सभी धर्म समान हैं और सभी के अधिकार समान हैं तो देश में सभी धर्मों के लिए व्यवस्थाएं भी समान होनी चाहिए। राष्ट्र एक है तो कानून भी सभी के लिए एक समान होना चाहिए। मुनि श्री सम्भव सागर जी महाराज पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीमसागर जी महाराज एवं मुनि श्री संस्कारसागरजी महाराज भी उपस्थित थे। मुनि श्री ने बताया कि आचार्य गुरुदेव ने वर्ष 2014 के चातुर्मास में विदिशा नगर से “इंडिया नहीं भारत कहो” का नारा दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत प्राचीन काल में विश्व का अग्रणी देश रहा है और विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत थी। इसलिए इसे सोने की चिड़िया कहा जाता था। यदि हम पुनः ‘इंडिया’ से ‘भारत’ की ओर लौटेंगे तो देश पुनः समृद्धि और विकास के मार्ग पर अग्रसर होगा।
मुनि श्री ने कहा कि दो वर्ष पूर्व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की समाधि डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी पर्वत पर हुई थी तथा उनके प्रथम पट्ट शिष्य मुनि श्री समयसागर जी महाराज को आचार्य पद प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि आज ही के दिन 46 वर्ष पूर्व द्रोणागिरी सिद्धक्षेत्र पर आचार्य गुरुदेव के करकमलों से मुनि श्री समयसागर जी महाराज की प्रथम मुनि दीक्षा हुई थी।
पंचकल्याणक महोत्सव विश्व शांति का संदेश देने वाला
इस अवसर पर मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने समस्त पत्रकारों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आज का दिन श्रमण संस्कृति को आगे बढ़ाने का विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में अशांति के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे समय में विदिशा में पंचकल्याणक महा महोत्सव विश्व शांति का संदेश देने वाला है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति के मन में शांति नहीं होगी तब तक दुनिया में शांति स्थापित नहीं हो सकती। कुछ देशों के राष्ट्राध्यक्षों का अहंकार विश्वयुद्ध जैसी स्थिति को जन्म दे रहा है, लेकिन भारत जैसे देश इस स्थिति को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि भारत सदैव शांति का दूत रहा है। यह भगवान महावीर और गौतम बुद्ध की भूमि है, जहाँ से अहिंसा और शांति का संदेश पूरी दुनिया में पहुँचा है।
धर्म की राजनीति करना उचित नहीं
राजनीति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुनि श्री ने कहा कि राजनीति में धर्म का समावेश होना चाहिए, लेकिन धर्म की राजनीति करना उचित नहीं है। भारत में परंपरागत रूप से सभी धर्मों को समान सम्मान मिला है, किंतु आज की चुनावी व्यवस्थाओं में जाति और धर्म के आधार पर विवाद उत्पन्न किए जा रहे हैं। उन्होंने मुफ्त राशन जैसी व्यवस्थाओं पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं दीर्घकालीन समाधान नहीं हैं।
समान नागरिक संहिता के विषय में उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज सदैव इस विचार का समर्थन करते रहे हैं। जब भी देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति अथवा अन्य उच्च पदस्थ व्यक्तियों से उनकी भेंट हुई, उन्होंने इस विषय में सकारात्मक सुझाव दिए।
पत्रकारों का परिचय करवाया
मुनि श्री ने यह भी बताया कि आचार्य गुरुदेव द्वारा नई शिक्षा नीति के संबंध में दिए गए। हिंदी भाषा को बढ़ावा देना और रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर सरकार कार्य कर रही है। संचालन करते हुए प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने उपस्थित सभी पत्रकारों का परिचय गुरुदेव से कराया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। श्री सकल दिगंबर जैन समाज समिति, श्री पंचकल्याणक समारोह समिति एवं शीतल विहार न्यास के पदाधिकारियों ने सभी पत्रकार बंधुओं का स्वागत किया।
पत्रकारों को काव्य कृति भेंट की
गुरुदेव ने आचार्य श्री की स्वलिखित काव्य कृति “डूबो मत लगाओ डुबकी” की प्रति आशीर्वाद स्वरूप भेंट की। अविनाश जैन ने बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारियाँ चरम सीमा पर हैं। प्रमुख पात्रों ने आयोजन को सफल बनाने के लिए घोषित दानराशि जमा कराने की शुरुआत कर दी है तथा विभिन्न समितियों का गठन भी किया गया है।













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