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आदर्श भगवान वह जो निंदकों से द्वेष और प्रशंसकों से राग नहीं करता; भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज


धर्मनगरी सहारनपुर के बीर नगर जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने अपने उपदेशों में कहा कि आदर्श भगवान वही हैं जो प्रशंसा से राग और निंदा से द्वेष नहीं करते। दसलक्षण महापर्व और पर्युषण पर्व के अवसर पर सहारनपुर वासियों को आत्मा के दश गुणों का दिव्य संदेश मिलेगा। पढ़िए सोनल जैन की ख़ास रिपोर्ट…


धर्मनगरी सहारनपुर में बीर नगर के जैन बाग जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे दिगम्बर जैनाचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महा मुनिराज ससंघ (30 पीछी) के सानिध्य में धर्म श्रद्धालु दिन-प्रतिदिन बढ़-चढ़कर अपना सौभाग्य जगा रहे हैं। सहारनपुर वासियों को आचार्य भगवन् के द्वारा सुख-शान्तिमय जीवन जीने के दिव्य सूत्र प्राप्त हो रहे हैं। समाज के श्रेष्ठी वर्ग का कहना है कि हमारा जन्मों-जन्मो का सातिशय पुण्य एकत्रित होकर आचार्य गुरुवर के विशाल संघ के रूप में हमें प्राप्त हुआ है। आचार्य प्रवर और संघ की आराधना करके हम सभी अपने जन्म और जीवन को सफल कर रहे हैं।

ऐसे आत्मा की खोज करनी होगी 

प्रातःकाल 08:00 बजे आयोजित “श्री भक्तामर महिमा शिक्षण शिविर” में उपस्थित जन समूह के बीच दिव्य देशना प्रदान करते हुए आचार्य श्री ने कहा – बंधुओ, हमें अपने आत्मा का हित करने के लिए ऐसे आत्मा की खोज करनी होगी जिसने मोह, राग, द्वेष आदि समस्त विकारों को नष्ट करके आत्मा की परम अवस्था को प्राप्त कर लिया हो। जो अपने प्रशंसकों-पूजकों से प्रसन्न नहीं होता और अपने निंदकों से द्वेष-क्रोध नहीं रखता, बल्कि दोनों को समान भाव से आत्मा के ज्ञान-दर्शन गुण से मात्र जानता और देखता है।”

आचार्य श्री ने बताया कि ऐसे गुणों से विभूषित आत्मा ही वीतराग, सर्वज्ञ और हितोपदेश गुणों से युक्त होकर भगवान कहलाती है। वही हमारे आदर्श होने चाहिए क्योंकि उनके मार्ग पर चलकर हम भी वही प्राप्त कर सकते हैं जो उन्होंने प्राप्त किया है।

जो वस्तु जैसी है उसे वैसी ही स्वीकारना

जैन धर्म की विशेषता बताते हुए आचार्य श्री ने कहा – जो वस्तु जैसी है उसे वैसी ही स्वीकारना, यही जैन धर्म है। लोक में जीव नामक वस्तु (द्रव्य) है। सभी जीव स्वतंत्र हैं और अपने कर्मों के अनुसार ही सुख-दुःख का अनुभव करते हैं। सत्कर्म और धर्म के आश्रय से एक दिन आत्मा कर्म से मुक्त होकर परम सुख को प्राप्त कर सकती है।” उन्होंने आगे कहा कि 28 अगस्त से 06 सितम्बर तक सहारनपुर में पर्युषण महापर्व और उपासक धर्म संस्कार शिविर का आयोजन होगा, जिसमें आत्मशुद्धि और धर्ममय जीवन के लिए विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा।

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