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आचार्य वर्धमान सागर की शिष्या आर्यिका श्री तपनमति जी ने धारण की यम संल्लेखना : सभी प्रकार के आहार का किया त्याग


आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 20 दिसंबर 2024 को यम संलेखना धारण की। इस अवसर पर उन्होंने श्रीजी, आचार्य श्री संघ और सभी साधुओं से क्षमा याचना करते हुए, सभी प्रकार के आहार का त्याग कर लिया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की विशेष रिपोर्ट…


पारसोला। आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 20 दिसंबर 2024 को यम संलेखना धारण की। इस अवसर पर उन्होंने श्रीजी, आचार्य श्री संघ और सभी साधुओं से क्षमा याचना करते हुए, सभी प्रकार के आहार का त्याग कर लिया। आर्यिका श्री तपनमति जी ने यह महत्वपूर्ण संकल्प 20 दिसंबर को लिया, और इससे पहले 8 दिसंबर 2024 को संस्तरारोहण किया था। संस्तरारोहण का अर्थ है, उस स्थान पर बैठना और उठना जहाँ क्षपक साधु बैठते और विश्राम करते हैं। इस प्रक्रिया को संस्तर आरोहण कहा जाता है। पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित पारसोला में विराजमान हैं, जहां निरंतर धर्म की गंगा प्रवाहित हो रही है।

आर्यिका श्री तपनमति जी के तप और त्याग की अनुमोदना

ब्रह्मचारी गज्जू भैया और राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि आर्यिका श्री तपनमति जी का जन्म 1 पुष्य शुक्ला दशमी, विक्रम संवत 1991 को श्रीमती मथुरा देवी और श्री लक्ष्मण जी के घर हुआ था, जो कूण जिला, उदयपुर के निवासी हैं। उनका विवाह श्री भगवानलाल लालावत से हुआ था। उन्होंने 11 अगस्त 2024 को पारसोला में पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। इस अवसर पर उल्लेखनीय बात यह है कि उनकी पुत्री, बाल ब्रह्मचारिणी भारती दीदी ने भी 29 अप्रैल 2015 को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से आर्यिका दीक्षा प्राप्त की थी। वर्तमान में वह आचार्य श्री के संघ में आर्यिका श्री समर्पित मति के रूप में विद्यमान हैं।

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