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बांकुड़ा जिले के शिक्षण शिविरों का समापन: पुरुलिया में ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ


भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में बांकुड़ा जिला में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन मंगलवार को हुआ। जिसमें प्रथम द्वितीय द्वितीय स्थान प्राप्त शिवराथियों के लिए पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। 14 मई से पुरुलिया जिले के ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ हुआ। पुरुलिया से मनीष विधार्थी पढ़िए, यह खबर…


पुरुलिया। आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस पर पश्चिम बंगाल के सराक क्षेत्र में आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्ष मति माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से ब्र. मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में बांकुड़ा जिला में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन मंगलवार को हुआ। जिसमें प्रथम द्वितीय द्वितीय स्थान प्राप्त शिवराथियों के लिए पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। जिन्होंने मेहंदी सिलाई पेंटिंग में अपना स्थान प्राप्त किया है, उनका भी सम्मान किया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी एवं समापन के अवसर पर मिष्ठान वितरण किया गया। 14 मई से पुरुलिया जिले के ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ सुंदर बांध, भागाबांध, पांच पहाड़ी, लायकडागा, धनिया डांगा बेडो स्थानों पर बाहर से पधारे हुए विद्वान पं. जयकुमार जी दुर्ग, पं. रीतेंद्र जैन, पं. राजकुमार शास्त्री, पं. नितिन शास्त्री, विदुषी स्नेहा जैन सपना जैन, साधिका जैन काव्या जैन जिनांग जैन द्वारा किया गया। प्रथम दिन आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज का पूजन दीप प्रज्वलन, कलश स्थापना के साथ शिक्षण शिविरों का शुभारंभ किया गया। सभी शिविरार्थिओं के लिए किट वितरित की गई। सभी वरिष्ठ जन को अंग वस्त्र एवं सफेद टोपी से सम्मानित किया गया। मंदिर पदाधिकारी ने विद्वानों का सम्मान किया।

णमोकार मंत्र को हम महामंत्र क्यों कहते हैं 

शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी सागर ने बताया कि पश्चात सांस्कृतिक के विराम लगाने के लिए इन शिक्षण शिविरों का आयोजन होना आवश्यक है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में सफेद टोपी लगाने की प्रथा नहीं है लेकिन, जिन मंदिर में सिर ढकने के लिए महिलाएं अपने पल्लू का और पुरुष सफेद टोपी का उपयोग करते हैं इस कारण जब भी आप मंदिर की आते हैं तो टोपी लगाकर जिन दर्शन करने चाहिए सभी धर्मों में सिर ढकने की प्रथा है। पं. जयकुमार जी दुर्ग ने धनियाडागा में बच्चों को णमोकार मंत्र के महत्व को बताया णमोकार मंत्र को हम महामंत्र क्यों कहते हैं हमारे जीवन को किस प्रकार से महामंत्र कल्याण कर सकता है इसके विषय में अपने वक्तव्य दिए। स्थानीय स्तर पर गोरांग जैन, रामदुलार जैन शिक्षण शिविरों को सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।

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