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तीन दिन आत्मचिंतन और संस्कारों में डूबा शिविर : बुंदेलखंडी ढाणी, इंदौर में ज्ञान और संस्कार आश्रम शिविर का सफल आयोजन


इंदौर के बुंदेलखंडी ढाणी में 15 से 17 अगस्त तक अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में तीन दिवसीय ज्ञान और संस्कार आश्रम शिविर संपन्न हुआ। समापन पर भक्तामर विधान, शांतिधारा और शिवार्थियों का सम्मान किया गया। सम्पादक रेखा संजय जैन की विशेष रिपोर्ट


इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज के सानिध्य और पूज्य वर्षायोग धर्म प्रभावना समिति, परिवहन नगर दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में 15 से 17 अगस्त तक तीन दिवसीय ज्ञान और संस्कार आश्रम शिविर का आयोजन बुंदेलखंडी ढाणी, इंदौर (धार रोड) पर हुआ।

शिविर का समापन रविवार 17 अगस्त को अभिषेक, शांतिधारा , भक्तामर विधान और सम्मान समारोह के साथ हुआ।

“तीन दिन अपने आप से जुड़े” का हुआ साकार

इस शिविर का मुख्य आकर्षण था गुरुकुल पद्धति अनुसार दैनिक जीवन यापन।

शिवार्थियों ने प्रकृति की गोद में तीन दिन आत्मचिंतन और साधना करते हुए बिताए और “तीन दिन अपने आप से जुड़े” स्लोगन को चरितार्थ किया।

समापन समारोह और सम्मान

समापन अवसर पर 50 से अधिक शिवार्थियों का सम्मान संदीप सुनीता जैन मोयरा सरिया और समाज अध्यक्ष नवनीत जैन द्वारा किया गया।

शिविर स्थल प्रदान करने वाले पदमचंद मोदी परिवार का अभिनंदन पूज्य वर्षायोग धर्म प्रभावना समिति और श्रीफल जैन न्यूज की ओर से महावीर ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल, समिति कार्याध्यक्ष श्रेष्ठी जैन और संपादक रेखा संजय जैन ने अभिनंदन पत्र भेंटकर किया।

शिविर में विशेष सहयोग देने वाले नरेंद्र वेद, पवन पाटोदी,अमित कासलीवाल (महावीर ट्रस्ट), प्रमोद सुरेखा चंदेरिया , कमल अलका जैन परिवार और संयोजक मुकेश जैन,प्रेमसिंह जैन,नीलेश जैन ,हितेश जैन,नितेश धनोते,सहित अनेक सहयोगियों और आहार चर्या में दीपाली जैन,भावना दबाड़े ,सुलभा जैन,अरुणा जैन,मंजु दीदी,रेणु जैन का भी स्वागत हुआ। श्रमण चर्या परिवार के सदस्यों का सम्मान भी किया गया।

विधान और धार्मिक लाभार्थी

भक्तामर विधान में मुख्य परिवार के रूप में श्रमण चर्या परिवार के संजय–रेखा जैन, कमलेश–टीना जैन, संजय–सपना पापड़ीवाल, पिंकी कासलीवाल, हितेश कासलीवाल तथा पवन–संगीता पाटोदी को लाभ प्राप्त हुआ।

मुख्य कलश का लाभ मेघा–आशीष जैन को मिला, जबकि चार कलश का लाभ अलका–कमल जैन, अर्चना–अनिल जैन, सृष्टि पिता मुकेश जैन और रेणु–गुलाब जैन को प्राप्त हुआ।

भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य अनिल–अर्चना जैन को मिला।

मुनि श्री का संदेश – “मरण भी महोत्सव है और संस्कार के बिना ज्ञान विनाश का कारण 

मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा— “धर्म हमें जन्म के साथ मरण की कला भी सिखाता है।

जैसे जीने के लिए उत्साह चाहिए, वैसे ही मरने के लिए भी चाहिए।

जब तक शरीर काम करता है तब तक जीवन का आनंद लो, और जब यह काम करना बंद कर दे तो समाधिमरण की भावना के साथ मरण की तैयारी करो।

यही धर्म का महत्व है। बच्चों, ध्यान रखना—मरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कभी भी विपरीत परिस्थिति, असफलता या तनाव में आत्महत्या का विचार मत लाना।

हमेशा यह भावना रखना कि मरण भी उत्सव और खुशी का अवसर बने।” ।

मुनि श्री ने कहा कि बिना संस्कार के ज्ञान कभी–कभी विनाश का कारण भी बन सकता है। जब ज्ञान संस्कारों से जुड़ता है, तभी वह परिवार और समाज को जोड़ने के साथ आत्मिक चिंतन की शक्ति भी प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि आज हम तीर्थंकरों की आराधना करते हैं तो केवल उनके ज्ञान के कारण नहीं, बल्कि उनके संस्कारों के कारण करते हैं। इस संसार में तुम्हारी पहचान भी केवल तुम्हारे संस्कारों से ही होगी।

मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा—“जब हम श्मशान जाते हैं, तब भी वहां व्यक्ति के आचरण और संस्कारों की ही चर्चा होती है, उसके ज्ञान की नहीं।”

शिविर में शिवार्थियों की भागीदारी

शिविर में रेखा संजय जैन, पिंकी कासलीवाल, हर्ष जैन, शानल जैन, श्रेष्ठी जैन,दीपाली जैन,वर्णित जैन,निधि जैन ,अभिषेक जैन, श्रद्धा जैन, सूची जैन, सिद्धि जैन, रोहित जैन, मीनल जैन,अर्चित जैन, दीपेश जैन, सृष्टि जैन, सपना पापड़ीवाला, संजय पापड़ीवाल, कमलेश जैन, टीना जैन, अन्नू जैन, टीशा जैन, दर्शन जैन ,आशी जैन, आद्रिका जैन,सर्वे जैन,इशिका कासलीवाल,अनिल जैन,अर्चना जैन,सुलभा जैन,हितेश जैन,नीलेश जैन,रेणु जैन, ध्रुवी जैन,नितेश धनोते,भावना दबाड़े,अरुणा जैन,आदित्य जैन,सहित अनेक शिवार्थी शामिल हुए।

इस आयोजन में सिद्धवरकूट तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री विजय जी काला तथा गोलारा समाज के अध्यक्ष एवं डीएसपी डी.के. जैन,श्रीफल जैन न्यूज की एंकर नीता राजेश जैन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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