समाचार

झुमरी तिलैया में श्रद्धा-भक्ति से मनाया गया आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का समाधि स्मृति महोत्सव : मुनि श्री धर्म सागर जी और भाव सागर जी के सानिध्य में गुरु भक्ति, पूजन और प्रवचनों से भक्तिमय बना वातावरण


झुमरी तिलैया के बड़े जैन मंदिर में आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महामुनिराज का समाधि स्मृति महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में गुरु पूजन, दीप प्रज्वलन और मुनि संघ के प्रेरणादायी प्रवचन हुए। पढ़िए झुमरी तिलैया की यह रिपोर्ट….


झुमरी तिलैया के बड़े जैन मंदिर में शुक्रवार को जैन संत आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महामुनिराज का समाधि स्मृति महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम पूज्य मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ।

दीप प्रज्वलन और गुरु पूजन

कार्यक्रम की शुरुआत चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र अर्पण के साथ हुई। इसके बाद सुबोध आशा जैन गंगवाल के निर्देशन में संगीतमय गुरु पूजन आयोजित की गई, जिसमें समाजजनों ने भावपूर्ण सहभागिता निभाई।

मुनि श्री ने दिया प्रेरक संदेश

अपने मंगल प्रवचनों में मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कहा कि जो केवल अपने लिए जीते हैं, उनका जीवन सीमित रह जाता है, लेकिन जो दूसरों के कल्याण के साथ आत्मकल्याण करते हैं, उन्हें समाज हमेशा याद रखता है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म केवल जीने की नहीं, बल्कि श्रेष्ठ मृत्यु यानी समाधि की कला भी सिखाता है।

सल्लेखना का महत्व बताया

मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज ने कहा कि संतजन कषाय और शरीर की सल्लेखना करते हुए मृत्यु को भी महोत्सव बना देते हैं। आत्मकल्याण के लिए सल्लेखना साधना का विशेष महत्व है, जिसमें त्याग, तप और आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाया जाता है।

गुरु परंपरा का गौरव

प्रवचनों में यह भी बताया गया कि आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज ने अपने शिष्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज को ऐसा ज्ञान और संस्कार दिए, जिनका नाम और योगदान आज पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

“गुरु परंपरा की साधना और संस्कार ही समाज को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।”

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page