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भगवान मल्लिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 6 दिसंबर को: तिथि के अनुसार पौष कृष्ण द्वितीया को आता है


जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 6 दिसंबर को है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और अर्घ्य आदि विधि के अनुसार ज्ञान कल्याणक मनाया जाता है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति…


इंदौर। जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 6 दिसंबर को है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और अर्घ्य आदि विधि के अनुसार ज्ञान कल्याणक मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में जैन श्रावक-श्राविकाएं आराधना और भक्ति में लीन रहते हैं। भगवान मल्लिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक जैन धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र घटना है, क्योंकि, यह उस क्षण का प्रतीक है जब उन्होंने सर्वाेच्च, पूर्ण ज्ञान (केवलज्ञान) प्राप्त किया और एक तीर्थंकर बन गए। जिससे संसार के प्राणियों के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हुआ। उनके ज्ञान कल्याणक का महत्व इस तरह से समझा जा सकता है।

सर्वज्ञता की प्राप्ति

यह वह दिन है जब भगवान मल्लिनाथ ने गहन तपस्या के बाद घातिया कर्मों का नाश किया और अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत शक्ति और अनंत आनंद प्राप्त किया, यानी वे ‘सर्वज्ञ’ (सब कुछ जानने वाले) बन गए।

तीर्थंकर पद की पूर्णता

ज्ञान कल्याणक के बिना कोई भी आत्मा तीर्थंकर नहीं कहलाती। इस घटना के बाद ही वे दिव्य ध्वनि (उपदेश) देने के योग्य हुए, जिसके माध्यम से उन्होंने लाखों भव्य जीवों को धर्म का मार्ग दिखाया।

मोक्ष मार्ग का उपदेश देकर किया कल्याण 

ज्ञान प्राप्त करने के बाद, भगवान मल्लिनाथ ने समवसरण (दिव्य सभा) में धर्माेपदेश दिया। उनका उपदेश सभी जीवों के दुःखों को दूर करने और उन्हें जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने के लिए था, जो इस कल्याणक का सबसे बड़ा लाभ है।

आध्यात्मिक समानता का प्रतीक। श्वेतांबर परंपरा में, भगवान मल्लिनाथ को एकमात्र महिला तीर्थंकर माना जाता है। उनका ज्ञान कल्याणक इस बात का प्रतीक है कि आध्यात्मिक ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति में लिंग या सामाजिक स्थिति कोई बाधा नहीं है, आत्मा की पवित्रता ही मायने रखती है।

अनुयायियों के लिए प्रेरणास्पद है ज्ञान कल्याणक 

यह दिवस जैन समुदाय को सर्वाेच्च आध्यात्मिक लक्ष्य (मोक्ष) प्राप्त करने के लिए तपस्या, त्याग और आत्म-अनुशासन की प्रेरणा देता है। भक्त इस दिन विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं ताकि वे भी अपने जीवन में ज्ञान के महत्व को समझ सकें। ज्ञान कल्याणक अज्ञान के अंधकार पर ज्ञान के प्रकाश की विजय का उत्सव है, जो सभी जीवों के लिए आध्यात्मिक मुक्ति की संभावना को उजागर करता है।

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