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श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान को लेकर पत्र - 13 :  गुरुदेव ने जन साधारण को भी दिया भक्ति का मौका- आदित्य प्रियंका जैन


अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन नव ग्रह ग्रेटर बाबा परिसर में 30 दिसंबर 2023 से 7 जनवरी तक श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान का आयोजन किया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए दिए जाने वाले प्रतिष्ठित श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार समारोह का आयोजन भी इसी कार्यक्रम में किया गया। आयोजन के बाद समाज के विभिन्न श्रेष्ठी जनों ने विधान की भव्यता को लेकर मुनि श्री को लिखा है। इसकी तेरहवीं कड़ी में पढ़िए आदित्य प्रियंका जैन के विचार…


पूज्य गुरुदेव
गुरुदेव पूज्यसागर जी बहुत ही सरल सहज एवं वात्सल्य स्वभाव के धनी हैं। लोग एक बार संपर्क में आने के बाद स्वतः ही उनसे जुड़ जाते हैं। ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ। गुरुवर के स्मृति नगर चातुर्मास के दौरान पहली बार मेरे घर में चौका लगा और गुरुवर के चरण मेरे घर में पड़े। यह मेरे किसी पुण्य कर्म का ही उदय था कि गुरुवर का सानिध्य मुझे मिला और उनके आशीर्वाद से ही मैंने धर्म की राह पर चलना शुरू किया। नित्य जिन अभिषेक और गुरुवर के साथ रोज स्वाध्याय करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं और मेरा परिवार धर्म की राह पर अग्रसर हुए। गुरुवर का विशेष स्नेह मेरी बेटी को प्राप्त हुआ, जिससे उसकी इतनी कम उम्र में ही धर्म और गुरु के प्रति श्रद्धा के साथ-साथ उनके दर्शन और उनके लिए आहार दान की रुचि बढ़ी। उसे नित्य गुरुवर से कुछ नया सीखने को मिला। मैं और मेरा परिवार सदा ही गुरुवर के ऋणी रहेंगे कि हम जैसे पथ भ्रष्टों को न केवल धर्म की राह दिखाई अपितु उसे पर चलना भी सिखाया।

विधान की महिमा

गुरुवर के दृढ़ संकल्प एवं भावना से इस कल्प की परिकल्पना का जो वृहद रूप भक्तों ने देखा, वह हम सभी की कल्पना से परे था। इस कल्प की कल्पना शुरुआत में बहुत सीमित थी लेकिन गुरुदेव के मार्गदर्शन एवं नरेंद्र दादा, भरत जैन एवं सभी समाज श्रेष्ठियों के योगदान से इस विधान ने जो भव्य रूप लिया, वह अकल्पनीय रहा। समवशरण का नजारा देखते ही बनता था। गुरुवार का इस विधान के प्रति मुख्य उद्देश्य था भक्ति और सर्वस्व के कल्याण की भावना। इसलिए तो इतने बड़े आयोजन में अर्थ को महत्व न देते हुए जनसाधारण को भी भरपूर भक्ति करने का सौभाग्य मिला। गुरुवर की प्रेरणा एवं संबल से हमें धर्म क्षेत्र में इतने अल्प समय में सप्त परम पद में एक चक्रवर्ती बनकर जिनेंद्र भगवान की भक्ति -अर्चना करने का सौभाग्य मिला। गुरुवर का आशीष ऐसे ही हमें मिलता रहे और हम सभी धर्म क्षेत्र में आगे बढ़ते रहें।

नमोस्तु गुरुवर
आदित्य -प्रियंका जैन

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