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कुरावली में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव : श्री सुधासागर महाराज ने किया धर्म सभा को संबोधित 


उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित कुरावली में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन चल रहा है। महोत्सव के चौथे दिन 21 जनवरी को तपकलयाणक महोत्सव मनाया गया। इसके बाद श्री सुधासागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित किया, उन्होंने कहा की नौकरी में व्यक्ति अपने बेटे को वसीयत में कुछ नही दे पाता इसलिए हर नौकरी करने वाले को बेटा कोसता है,बददु आएँ देता है और जो पिता अपने बेटे को गद्दी देकर जाता है, उस पिता को अपनी पीढ़ी दर पीढ़ी का वरदान मिलता है। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट 


मैनपुरी । निर्यापक मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज एवं क्षुल्लकश्री गंभीरसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित कुरावली में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन चल रहा है। महोत्सव के चौथे दिन 21 जनवरी को तपकलयाणक महोत्सव मनाया गया। जिसकी शुभारंभ नित्यमह पूजन अर्चना के साथ हुआ। इसके बाद प्रतिष्ठाचार्यश्री के दिशा निर्देशन में विधिवत राज्याभिषेक किया गया। इसके बाद धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मै कभी किसी को नौकरी का आशीर्वाद नही दे पाता, हाथ उठा देता हूँ लेकिन आनंद नही आता। गुरु किस काम का जो मात्र अपने भक्त को नौकर अकेला बना पाया, गुरु तो वह है, जो आज भले नौकर बनाये, कल वह मालिक बना देगा, इसका नाम गुरु है।

जैनी को नौकरी करना ही नही चाहिए

पराधीनता बुरी नही है, लेकिन पराधीनता जीवन भर के लिए हो जाये ये अभिशाप कहलाती है। जैनी को नौकरी करना ही नही चाहिए क्योंकि जैनधर्म तुम्हे नौकर नही बनाता, जैनधर्म कहता है भक्त बनकर के तुम जन्म लो, भगवान बनकर शरीर छोड़ो यही जैनधर्म का निर्वाण कहलाता है। इसी प्रकार प्रांरभ में तुम नौकर बनों लेकिन मरने के पहले पहले मालिक बनकर मरो, यही जैनधर्म का फल है। नौकर बनने में तृप्ति मत करो, चाहे कितनी बड़ी नौकरी हो क्योंकि नौकरी में व्यक्ति अपने बेटे को वसीयत में कुछ नही दे पाता इसलिए हर नौकरी करने वाले को बेटा कोसता है, बददुआएँ देता है।

ऋषभदेव ने कहा कि बाप को बेटे का अभिशाप नही मिलना चाहिए और जो सेठ होता है वह बेटे को सबकुछ दे देता है जो उसके पास होता है। खेती करने वाला बाप है तो बेटे को क्या मिलेगा खेत, व्यापार करने वाला है तो व्यापार, बेटा कहेगा पिताजी के पास जो था, सब तो दे दिया, अभिशाप नही दे सकता वो। नौकरी वाला बाप भली कलेक्टर है लेकिन बेटे को कुछ नही दे पाएगा तो कोसेगा वह। भली छोटा सी दुकान है, छोटा सा व्यापार है लेकिन तुम उसके मालिक हो। नौकरी वाला बाप मरेगा उसके बेटे के लिए पगड़ी की रस्म बेकार। पगड़ी की रस्म का अर्थ होता था जिस गादी पर आज तक मैं बैठता था वो गादी आज से मेरा बेटा संभालेगा। जो पिता अपने बेटे को गद्दी देकर जाता है, उस पिता को अपनी पीढ़ी दर पीढ़ी का वरदान मिलता है। आईएएस ऑफिसर बनना चाहिए मैं भी प्रोत्साहन देता हूँ लेकिन साइड में कोई धंधा जरूर चालू रखना तुम्हारी जिंदगी के लिए नही, बेटे के लिए। तुम्हारी जिंदगी में कोई कष्ट नही है लेकिन बेटे की आँख में आँसू है तो तुम्हारी आँख भी गीली हुए बिना नही रहेगी। गृहस्थी बहुत कठिन है, पूरे परिवार को नींद आये तब तुम सुख की नींद ले पाओगे, एक दुखी तो परिवार दुखी, परिवार सुखी तो एक सुखी।

भगवान की राजगद्दी से आज शिक्षा लो क्या दे रहे हो बेटे के लिए, सर्वोत्कृष्ट यही है जो तुम हो, बेटा तुम्हारी टू कॉपी होना चाहिए, उसका सोच, उसका संस्कार, उसका ज्ञान, उसका आचार टू कॉपी होना चाहिए और हर बेटे को सोचना है कि क्या मैं पिता की टू कॉपी बन सकता हूँ। पिता बनने से पहले सोचो तुम उच्चकुल में जन्मे हो तो बेटे को भी उच्चकुल में जन्म देना है, तुम एक अच्छे घर मे जन्मे तो बेटा भी अच्छे घर मे जन्मे, तुम्हारे पिता अच्छे थे तो तुम्हे भी अच्छे पिता बनना यह है कुल परम्परा।

सात पीढ़ियों का रखो हिसाब

सात पीढ़ी में जितने दादा परदादा हुए है उन सबका बायोडेटा आपके पास होना चाहिए और जो सात पीढ़ियों के हिसाब नही रख सकता, वो कुल कलंकी कहलाता है उसे आगे संसार बढ़ाने का, सन्तान पैदा करने का अधिकार नही है और करता है तो पापी है। पिता बनने का किसे अधिकार है- जो कमी तुम अपने छोटों में नही देखना चाहते हो, वह तुम्हे जिंदगी में नही करना है बस इससे ज्यादा और कुछ नही, जाओ तुम्हे वसीयत का अधिकार है, पीढ़ी दर पीढ़ी का तुम्हें कभी अभिशाप नही लगेगा। सच्ची माँ कौन, किसकी स्त्री पर्याय धन्य है- सैकड़ो सन्ताने हो जाये, लेकिन नही मैं उसकी माँ बनूँ जो सारे तीन लोक का नाथ बने, यह ललक इतनी तीव्र हो जाती है कि एक दिन वो सही में तीर्थंकर की माँ बन जाती है। सही दम्पत्ति वह है जिसको बेटे आने का दिन भी पता है घण्टा भी पता है, सेकेंड भी पता है, मेरे बेटा इतने बजकर इतने सेंकेड पर आएगा क्योंकि मैंने छह महीने पहले से तैयारी करके रखी है। इसी के साथ महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है| जिसमें कलाकारों द्वारा प्रेरणदायी नाट्यों की प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।

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