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मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज का भियादांत जी में भव्य मंगल प्रवेश : बड़े बाबा का हुआ अभिषेक और शांतिधारा की


आचार्य श्री विद्यासागर जी के परम शिष्य एवं शिक्षा प्रदाता आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज का श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र भियादांत जी में शनिवार को भव्य मंगल प्रवेश हुआ। चंदेरी से पढ़िए, यह खबर…


चंदेरी। आचार्य श्री विद्यासागर जी के परम शिष्य एवं शिक्षा प्रदाता आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज का श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र भियादांत जी में शनिवार को भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा गुरुदेव की मंगल अगवानी बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ की गई। गुरुदेव के मंगल प्रवेश के साथ ही भियादांत जी के बड़े बाबा का पवित्र अभिषेक एवं शांतिधारा गुरुदेव के मुखारविंद से हुई। इस पावन अवसर पर मुंगावली, चंदेरी एवं जिले के विभिन्न नगरों से पधारे श्रावक-श्राविकाओं ने अभिषेक और शांतिधारा में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। आचार्य श्री विद्यासागर जी की सुंदर सुसज्जित अष्टद्रव्य संगीत मय पूजन आचार्य श्री से दीक्षित दीदियों द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण हो गया।

अपने मंगल आशीर्वचन में मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने कहा कि यह अत्यंत मनोहारी और दुर्लभ प्रतिमा इस शांत एवं निरंजन स्थान पर विराजमान है। इसकी केश विन्यास शैली अत्यंत अद्भुत है और इसकी तुलना लंदन के संग्रहालय में स्थित भगवान की प्रतिमा से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को अपने जीवन के संताप दूर करने हों तो माह की अमावस्या के दिन श्रद्धापूर्वक श्रीफल चढ़ाकर निवेदन करें, उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और दुख-संताप दूर हो जाते हैं।

समाज में सुख-समृद्धि और संपन्नता का विस्तार होगा

मुनि श्री ने चंदेरी जैन समाज को संदेश देते हुए कहा कि भियादांत जी को अपना इष्ट देव मानें। जब समाज इन्हें अपना इष्ट देव मानकर श्रद्धा रखेगा, तब समाज में सुख-समृद्धि और संपन्नता का विस्तार होगा। उन्होंने भियादांत शब्द का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा—

भ से भय दूर होता है,

य से यातनाएँ समाप्त होती हैं,

द से दरिद्रता दूर होती है,

त से संताप और ताप मिट जाते हैं। मुनि श्री ने प्रवचन में यह भी कहा कि दान वहीं देना चाहिए जहाँ उसकी वास्तविक आवश्यकता हो। जिस स्थान पर धर्म और क्षेत्र के विकास की आवश्यकता हो, वहाँ दिया गया दान विशेष पुण्य प्रदान करता है। ऐसा दान समाज, धर्म और क्षेत्र के विकास में सहायक बनता है।

हशीघ्र मंदिर निर्माण का संकल्प दिलाया

इस अवसर पर क्षेत्र के अध्यक्ष अनिल रोकड़िया जी द्वारा भव्य मंदिर निर्माण के लिए स्वयं की राशि से निर्माण कार्य कराने का संकल्प लेते हुए मुनि श्री को श्रीफल भेंट किया गया। गुरुदेव ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए शीघ्र मंदिर निर्माण का संकल्प दिलाया।

साथ ही मुनि श्री को आहार देने का सौभाग्य अध्यक्ष अनिल रोकड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के लिए भोजन व्यवस्था भी रोकड़िया परिवार द्वारा श्रद्धापूर्वक की गई।

इस भव्य धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और सभी ने धर्मलाभ प्राप्त किया।

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