कहते हैं सुजान व्यक्ति समर्थ गुरु की तलाश में भटकता है। जब गुरु से उसका मिलन होता है तो यहीं उसका पुनर्जन्म होता है। सच में धर्मग्रंथों में वर्णित है कि केवल संसार में केवल गुरु ही है, जो जिंदगी की धारा को बदलने का सामर्थ्य रखता है। इंदौर से गुरु की महिमा को बताती यह प्रस्तुति पढ़िए….
इंदौर। जैन धर्म में देव शास्त्र गुरु का महात्म्य कई गुना अधिक बताया गया है। देवों से हमें अभय मिलता है। शास्त्र हमें ज्ञान और सद्मार्ग की ओर ले जाते हैं तो गुरु के पास हमें मिलता है मोक्ष जाने का सुगम मार्ग। धर्म शास्त्रों में खूब कहा गया है कि चाहे जितना शास्त्रों का अध्ययन कर लो, जब तक गुरु नहीं मिलता शास्त्रों का सार भी समझ में नहीं आता। सुजान व्यक्ति के लिए गुरु की तलाश बड़ी कठिन होती है, लेकिन जब गुरु से उसका मिलन होता है तो उसी क्षण उसका दूसरा जन्म हो जाता है। यानि वह जो था, वह न होकर एक अलग ही रूप में निखरित होकर अपने कर्मपथ की ओर अग्रसर हो जाता है।
सभी धर्मों में गुरु को देवों से भी कहीं उच्चता का दर्जा इसलिए दिया है कि गुरु पूर्ण होते हैं और वे अपने शिष्य को भी अपूर्ण नहीं रहने देते। जब तीर्थंकर भगवान देशना देते हैं तो पशु-पक्षी और जगत के अन्य जीव-जन्तु वहां एकत्र होकर एकाग्र भाव से उनके उपदेशों को सुनते हैं और अपने इस भव को त्यागकर वे अगले जन्म चक्र में चले जाते हैं।

जैन धर्म ग्रंथ में इसका बखूबी प्रमाण मिलता है। यह भी सत्य है कि गुरु के पास ही मोक्ष मार्ग पर जाने का मार्गदर्शन है। उनके सान्निध्य में जीवन कुंदन-कुंदन हो जाता है। इसलिए इन दिनों चल रहे चातुर्मास में जितना अधिक हो सके गुरु का सान्निध्य प्राप्त किया जाए और अपने जीवन को सफल बनाया जाए।













Add Comment