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एक शाम आचार्य पुलक सागर के नाम ः काव्यानुष्ठान का आयोजन किया गया


आखिल भारतीय पुलक जनचेतना मंच शाखा ऋषभदेव द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संत आचार्य पुलक सागर जी गुरुदेव के पावन सानिध्य में एक शाम आचार्य पुलक सागर के नाम का काव्यानुष्ठान का आयोजन किया गया। पढ़िए एक रिपोर्ट…


ऋषभदेव। आखिल भारतीय पुलक जनचेतना मंच शाखा ऋषभदेव द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संत आचार्य पुलक सागर जी गुरुदेव के पावन सानिध्य में एक शाम आचार्य पुलक सागर के नाम का काव्यानुष्ठान का आयोजन किया गया। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कवि एवं पुलक मंच के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री ने अपने काव्यानुष्ठान के अंतर्गत,”ये श्रद्धा दम रखती हैं, भव्य आत्माएं दम रखती हैं और फकीरी जो भी निकला उसकी बातें दम रखती हैं” उक्त काव्यत्मता के साथ काव्यानुष्ठान किया गया।

इस अवसर पर जयपुर के राष्ट्रीय ओजस्वी कवि उमेश उत्साही भी उपस्थित रहे। जिन्होंने अपने काव्यपाठ में आचार्य गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज को कुछ पंक्तियां समर्पित कीं जिसमें कहा कि –

जेनागम वेदोपनिशेद, व्यापक दृष्टालोक। साहित्य संस्कृति सृजक, फैले लोकालोक।।

नव प्रकृति आकृति रचे ,दे नव सिख प्रदान। नेता शासक शिक्षक,करे सभी गुणगान।।

इस अवसर पर चेतक का आत्मदान तो युगों युगों पर भारी है, राजा ही नहीं पूरा भारत चेतक का आभारी है।

कैसे चंद भेड़िये निर्बल, हिरणी से व्यभिचार करे। गुड़ धानी खाने वाले जब, भेड़ों सा व्यवहार करें।।

नहीं सुरक्षा कर पाए हम, नारी के सम्मान की। हे ईश्वर, अब लाज बचा लो, मेरे हिन्दुस्तान की।। आदि कविताओं का पाठ किया गया।

 श्रोताओं ने कार्यक्रम की सराहना की

कार्यक्रम के पश्चात आचार्य पुलक सागर जी गुरुदेव ने काव्यात्मक रूप से सकल दिगंबर जैन समाज एवं सर्व समाज को मंगलकारी आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर गुरुदेव ने कहा कि मैं सुर को साज और साज को सुर दे रहा हूं एवं सर्व समाज को आशीर्वाद दे रहा हूं। मीडिया के सचिन गंगावत ने बताया कि एक अद्भुत काव्यनुष्ठान जिसमें सर्वसमाज सम्मिलित हुआ सभी श्रोताओं ने कार्यक्रम को बहुत सराहा। इस अवसर पर सकल जैन समाज एवं पुलक मंच के सदस्य, महिला मंडल, युवा परिषद के सदस्यों सहित कई धर्मावलंबी उपस्थित थे।

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