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जैन पदयात्रा को लेकर राष्ट्रपति को पत्र : गिरनार की पांचवीं टोंक पर सुरक्षा की मांग


गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग की गई है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


नई दिल्ली/जूनागढ़। गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग की गई है।

पत्र में बताया गया है कि गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश (स्पेशल सिविल एप्लीकेशन संख्या 6426/2004) दिनांक 17 फरवरी 2005 के अनुसार, गिरनार पहाड़ की पांचवीं टोंक तक जैन यात्रियों को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करने की अनुमति है। इस आदेश के पालन हेतु जूनागढ़ के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी सूचित किया गया था।

विश्व जैन संगठन ने निवेदन किया है कि 2 जुलाई को महिलाएं, बच्चे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूसरी, तीसरी, चौथी और विशेष रूप से पांचवीं टोंक तक पहुंचेंगे। संगठन ने आशंका जताई है कि पूर्व में इस क्षेत्र में यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं, जिनकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

courtorder 2005

पत्र में एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 24 मई 2025 को महाराष्ट्र के वासिम निवासी जैन श्रद्धालु आशीष प्रभाकर डहाले पर पांचवीं टोंक पर लाठी से हमला किया गया। यह घटना न्यायालय के स्पष्ट आदेशों और अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा रही है।

संगठन ने मांग की है कि पूरे यात्रा मार्ग, विशेषकर पांचवीं टोंक के भीतर और बाहर समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा या हिंसा से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में ठोस कार्रवाई की जानकारी भी प्रदान करने का आग्रह किया गया है।

गौरतलब है कि गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक दिगंबर जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां भगवान नेमिनाथ के प्राचीन चरणचिह्न और मूर्ति स्थित हैं।

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