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श्रमण संस्कृति बोर्ड का गठन की मांग: मुख्यमंत्री को लिखा पत्र


राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेन्द्र कुमार जी जैन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर प्रदेश में “श्रमण संस्कृति बोर्ड ” का गठन करने की मांग की है। पढ़िए जिनेन्द्र जैन की रिपोर्ट…


जयपुर। राजस्थान में अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय की संस्कृति, धार्मिक सम्पत्तियों (अतिशय क्षेत्र,सिद्ध क्षेत्र,स्थानक,प्राचीन मन्दिर, नसिया) की सुरक्षा /संरक्षण,जैन आचार्य /संतो की सुरक्षा एवं चर्या के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेन्द्र कुमार जी जैन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर प्रदेश में “श्रमण संस्कृति बोर्ड ” का गठन करने की मांग की है।

इस अवसर पर जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन ने बताया की संविधान में निहित प्रावधानों के अंतर्गत सम्पूर्ण देश में जैन समुदाय को भी दिनांक 27 जनवरी 2014 को अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किया गया है,फलत: राजस्थान प्रान्त में अल्पसंख्यक समाज के सामाजिक एवं धार्मिक स्थलो की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु समुचित व्यवस्था होना आवश्यक है।


जस्टिस जैन ने बताया कि प्रदेश में प्राचीन धार्मिक धरोहरों एवं तीर्थ स्थलों को विनिष्ट करने का सामाजिक तत्वों द्वारा निरन्तर कुप्रयास हो रहा है। जैन धर्म की धरोहरों पर अवैध अतिक्रमण की दुर्भावनाएं हो रही है। साधु संतों पर भी अवांछित टिप्पिणयां की जाती हैं। संतों के विहार में भी कठिनाई पैदा हो रही है। जैन धर्म श्रमण परम्परा का अति प्राचीन धर्म एवं दर्शन है,जिनका संरक्षण करना अति आवश्यक है।

इस अवसर पर राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया की आंध्र प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय की पीड़ा को समझते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में जैन कल्याण निगम का गठन कर अध्यक्ष की नियुक्ति करने वाला सम्पूर्ण देश का पहला राज्य बना है। संरक्षक अशोक बांठिया ने बताया कि जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का राजस्थान मे शांति एवं अहिंसा का पृथक नया विभाग खोलने के लिए धन्यवाद दिया। उक्त विभाग से प्रदेश में शांति एवं सौहार्द कायम करने में सहायता प्राप्त होती रहेगी।

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