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मनाया जाएगा भगवान महावीर का निर्वाणोत्सव : धनतेरस से 15 नवम्बर तक चलेगा दीपोत्सव

भगवान महावीर
भगवान महावीर

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण इस बार पांच दिनों वाला दिवाली महापर्व 6 दिनों का होगा। इसकी शुरुआत 10 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस से होगी। छोटी दीपावली या रूप चौदस और दीपावली महालक्ष्मी पूजन 12 नवंबर रविवार को एक ही दिन दोनों होंगी। अन्नकूट व गोवर्धन पूजा 14 नवंबर मंगलवार को और भैयादूज 15 नवंबर बुधवार के साथ ही इस महापर्व का समापन हो जाएगा। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। धनतेरस पर प्रीति योग के साथ शुरू होगा दीपोत्सव, जो 10, 11, 12, 13, 14, 15 भाई दोज तक इस बार 6 दिनों का होगा। धनतेरस दिवाली का पहला दिन माना जाता है। इसके बाद नरक चतुर्दशी फिर दीपावली, गोवर्धन पूजा और आखिरी में भैया दूज मनाई जाती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण इस बार पांच दिनों वाला दिवाली महापर्व 6 दिनों का होगा। इसकी शुरुआत 10 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस से होगी। छोटी दीपावली या रूप चौदस और दीपावली महालक्ष्मी पूजन 12 नवंबर रविवार को एक ही दिन दोनों होंगी। अन्नकूट व गोवर्धन पूजा 14 नवंबर मंगलवार को और भैयादूज 15 नवंबर बुधवार के साथ ही इस महापर्व का समापन हो जाएगा।

इस साल धनतेरस की तिथि पर प्रीति योग शाम 5:06 बजे के बाद बन रहा है। यह योग पूरी रात रहेगा। इस योग में पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होगी। यह योग इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कपड़े, वर्तन आदि खरीदने के लिए विशेष शुभ है। इस योग में अन्य शुभ कार्य भी किए जा सकते हैं। 10 नवंबर को धनतेरस पर दीपदान के साथ शुरुआत होगी। इसे त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं, दिवाली का पहला दिन होता है । मान्यता है इस तिथि पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हो हुए थे। इसी कारण से हर वर्ष धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा निभाई जाती है। इसी दिन से देवता यमराज के लिए दीपदान से दीप जलाने की शुरुआत होगी और भाई दूज तक दीप जलाए जाते हैं।

धन तेरस पर पूजा का मुहूर्त

10 नवम्बर शुक्रवार शाम को 05:47 बजे से 07:44 बजे तक प्रदोष काल स्थिर वृषभ लग्न में दीपदान और धनवंतरी पूजन के लिए विशेष श्रेष्ठ मुहूर्त है।

11 नवम्बर शाम को भी दीप रखें

रूप चतुर्दशी 12 नवम्बर रविवार को प्रातः अरुणोदय काल में और ब्रह्म मुहूर्त में महिलाएं हल्दी, चंदन, सरसों का तेल मिलाकर उबटन तैयार कर शरीर पर लेप कर उससे स्नान कर अपना रूप निखारेंगी। अभ्यंग स्नान का मुहूर्त प्रातः 05:21 बजे से 06:33 बजे तक।

12 नवंबर को दिवाली पर होगा महालक्ष्मी पूजन
दिवाली की शाम को शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती जी और धन के देवता कुबेर की पूजा-आराधना होगी। मान्यता है दिवाली की रात लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं। दिवाली पर लोग सुख-समृ्द्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं।अथर्ववेद में लिखा है कि जल, अन्न और सारे सुख देने वाली पृथ्वी माता को ही दिवाली के दिन भगवती लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है।

14 नवंबर को गोवर्धन, अन्नकूट पूजा
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी किया जाता है। इस त्योहार में भगवान कृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान भी है। ऋग्वेद में उल्लेख है कि भगवान विष्णु ने वामन रूप धरकर तीन पदों में सारी सृष्टि को नाप लिया था।

गोवर्धन पूजा मुहूर्त

यह मुहूर्त प्रातः काल 06:35 बजे से 08:45 बजे तक रहेगा।
भाई दूज 15 को

15 नवंबर बुधवार को भाईदूज पर बहिनें अपने भाई के तिलक करेंगी। भाई- बहनों के घर भोजन करेंगे।जैन ने कहा कि भाई दूज दिवाली पर्व का आखिरी दिन का त्योहार होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की मनोकामनाएं मांगती हैं। इस त्योहार को भाई दूज या भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया कई नामों से जाना जाता है। कल्याण और समृद्धि के लिए भाई को इस दिन अपनी बहन के घर में ही स्नेहवश भजन भी ग्रहण करते हैं। भाई दूज का मुहूर्त दोपहर 01:18 बजे 03:18 बजे तक रहेगा।

दीपावली महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त

अमावस्या तिथि प्रारम्भ 12 नवम्बर रविवार दोपहर 14:44 बजे से प्रारम्भ होगी, जो 13 नवम्बर सोमवार दोपहर 14:56 बजे तक रहेगी।

दीपावली, महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त

कलम,दवात,सामग्री, यंत्र रचना करने के लिए 12 नवम्बर रविवार लाभ एवं अमृत की चौघड़िया प्रातः लाभ 09:24 बजे से 10:44 बजे तक , अमृत 10:44 बजे से 12:05 बजे तक अभिजीत मुहूर्त 01:26 बजे से 02:46 बजे तक।

महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त

प्रदोष काल, और शुभ की चौघड़िया शाम को 05:29 बजे से 07:07 बजे तक, प्रदोष काल और अमृत की चौघड़िया शाम 07:07 बजे से 08:45 बजे तक रहेगा।

सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

शाम 05:29 बजे से 08:45 बजे तक प्रदोष काल स्थिर वृष लग्न एवम शुभ और अमृत की चौघड़िया में सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। महालक्ष्मी मंत्र जाप, साधना पूजन लिए निशित काल रात्रि 11:35 से 12:28 बजे तक रहेगा। निशित काल एवं सिंह स्थिर लग्न में रात्रि 12:09 से 02:40 बजे तक श्रेष्ठ मुहूर्त है।

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