आचार्य श्री विमर्शसागर जी (ससंघ 33 पिच्छी) के प्रथम बार मुजफ्फर नगर आगमन हुआ। 19 जून को आचार्य संघ ने मुजफ्फर नगर में मंगल पदार्पण किया। प्रेमपुरी, अबु पुरा, सुरेंद्रनगर कॉलोनी, मुनीम कॉलोनी, पटेलनगर के समाज को सौभाग्य प्रदान करते 23 जून को आचार्यश्री ससंघ जैन मिलन विहार एवं संध्या बेला में नयी मंडी जैन मंदिर में पधारे। जैन मिलन विहार में उपस्थित धर्मसभा को संबोधित किया। मुजफ्फर नगर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…
मुजफ्फर नगर। जैन समाज के मुख पर बस एक ही बात है। इतना विशाल संघ हमने अपने नगर में प्रथम बार देखा है। आचार्य प्रवर का वात्सल्य अनुपम है। सरलता की तो आचार्य साक्षात् मूर्ति हैं, आचार्य श्री के दर्शन करके तो लगता है। हमने साक्षात् महावीर भगवान के ही दर्शन कर लिए। आचार्य श्री विमर्शसागर जी (ससंघ 33 पिच्छी) के प्रथम बार मुजफ्फर नगर आगमन से भक्त समूह के मुखों से ऐसे ही उद्गार सामने आ रहे हैं। 19 जून को आचार्य संघ ने मुजफ्फर नगर में मंगल पदार्पण किया। प्रेमपुरी, अबु पुरा, सुरेंद्रनगर कॉलोनी, मुनीम कॉलोनी, पटेलनगर के समाज को सौभाग्य प्रदान करते 23 जून को आचार्यश्री ससंघ जैन मिलन विहार एवं संध्या बेला में नयी मंडी जैन मंदिर में पधारे। जैन मिलन विहार में उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मोह घटता जाए, राग-द्वेष घटता जाए। आत्म शुद्धि के हेतु मन, प्रभु नाम रटता जाए। शुद्धि बिन बुद्धि, हो-ही-2 कोई काम न आये रे ….जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाये रे..।
सुखी रहना है उदासीन हो जाओ
किसी ने पूछा- भगवन् ! गृहस्थ जीवन में सुखपूर्वक कैसे जिया जा सकता है? मैंने कहा-गृहस्थ जीवन में यदि सुखपूर्वक रहना है तो आप उदासीन होकर जीवन जिएं। गृहस्थी में रहते हुए भी गृहस्थिक कार्य करते हुए भी उनसे विरक्त-उदासीन रहो। जिस प्रकार जल पर आपकी परछाई पड़ रही हो किन्तु परछाई जल में भींगती नहीं है। उसी प्रकार जो गृहस्थ घर, परिवार, व्यापार आदि कार्यों में उदासीन रहे तो वह घर, व्यापार आदि के पाप से लिप्त नहीं होता।
आपको अपनी रुचि पहचानना चाहिए
बंधुओं! आप किसी इष्ट व्यक्ति या पदार्थ के वियोग में दुःखी होते हैं तो आपको ज्ञात हो, आप उसके वियोग में दुःखी नहीं होते, आप वास्तव में अपने ही मोह-राग के कारण दुःखी होते हैं। आप जितने उदासीन भाव से पर पदार्थों में राग-मोह को घटाएंगे, आप उतने ही निराकुल और सुखी होते जाएंगे। इसीलिए वास्तव में दुःख का कारण पर पदार्थ नहीं है, अपितु पर पदार्थ के प्रति होने वाला आपका ही राग-द्वेष-मोह ही आपके दुःख का कारण है। आपको अपनी रुचि पहचानना चाहिए।
आचार्यश्री ने दिया आशीर्वाद
किसी की रुचि मीठे में होती है, किसी की रुचि नमकीन में होती है तो किसी खट्टे-चरपरे आदि में होती है पर सच कहूं – मुज़फ़्फ़र नगर वालों की रुचि दिगंबर रूप को ही देखने में है और उनकी सेवा-वैयावृत्ति करने में है। आपकी इस रुचि को मेरा आशीर्वाद है। यह ऐसे ही निरंतर बढ़ती जाए। मुजफ्फर नगर की जैन मिलन विहार जैन समाज को मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त हुआ। आचार्य संघ से एक आर्यिका उपसंघ का मुजफ्फरनगर नगर में चातुर्मास होगा।













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