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मंगल कलश स्थापना अवसर पर आचार्य विहर्षसागरजी के प्रवचन : चातुर्मास धर्म साधना करने और आत्मा को रिचार्ज करने का अवसर देता है


चातुर्मास के 4 माह ऋषि, कृषि और श्रावक के लिए महत्वपूर्ण फलदायी होते हैं। यह उद्गार राष्ट्रसंत आचार्य विहर्षसागर जी महाराज ने रविवार को बड़ा गणपति स्थित मोदी जी की नसियां में अपने 28वें चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह में व्यक्त किए। उनके साथ मुनि श्री विजयेशसागर जी एवं मुनि श्री विश्व हर्ष सागर जी महाराज चातुर्मास कर रहे हैं। समारोह में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज भी मंचासीन थे। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट 


इंदौर। वर्षा काल में सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति अधिक होने से साधु अहिंसा धर्म का पालन और जीवों की रक्षा के लिए चातुर्मास की स्थापना करते हैं और 4 माह तक एक ही स्थान पर ठहरकर साधना करते हैं क्योंकि आवागमन से बहुत हिंसा होती है। इसी प्रकार श्रावकों को भी चातुर्मास में धर्म साधना एवं संतों की वाणी श्रवण करने के साथ अपनी आत्मा को रिचार्ज करने का अवसर प्रदान करता है। चातुर्मास के 4 माह ऋषि, कृषि और श्रावक के लिए महत्वपूर्ण फलदायी होते हैं। यह उद्गार राष्ट्रसंत आचार्य विहर्षसागर जी महाराज ने रविवार को बड़ा गणपति स्थित मोदी जी की नसियां में अपने 28वें चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह में व्यक्त किए। आपके साथ मुनि श्री विजयेशसागर जी एवं मुनि श्री विश्व हर्ष सागर जी महाराज चातुर्मास कर रहे हैं। समारोह में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज भी मंचासीन थे।

असुरक्षा पर की चिंता व्यक्त

अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज  ने अपने आशीर्वचन में समाज की अनेकता, संतों की असुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जैन धर्म, जैन तीर्थ और जैन संत असुरक्षित एवं संकटग्रस्त हैं क्योंकि समाज संगठित नहीं है और श्रावक अपने कर्तव्य से विमुख होते जा रहे हैं, फलस्वरूप समाज ना तो संतों की और ना ही तीर्थों की सुरक्षा कर पा रहा है। हाल ही में कर्नाटक में घटित जैन मुनि की नृशंस हत्या इसी का परिणाम है, इस घटना की जितनी निंदा की जाए, कम है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि देव, शास्त्र, गुरु एवं तीर्थों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सभी पंथों को मानने वाले दिगंबर एवं श्वेतांबर साधु और श्रावक संगठित होकर एक हो जाएं। पंडित रतनलालजी शास्त्री एवं रितु दीदी ने भी धर्म सभा को संबोधित किया।

इन्हें मिला सौभाग्य

चातुर्मास के मुख्य मंगल कलश प्राप्त करने का सौभाग्य महेशचंद जी ग्वालियर, आजाद कुमार, विकास एवं अमित जैन बीड़ी वाला परिवार, विनोद कुमार पांडया, मुकेश पाटोदी, मनोज मुकेश बाकलीवाल इंदौर एवं आशा रानी पांड्या अमेरिका ने प्राप्त किया। प्रारंभ में ध्वजारोहण आर के जैन रानेका एवं मंडप उद्घाटन धन्यकुमार वरुण बड़जात्या ने किया। आचार्य श्री विरागसागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन नीरज मोदी पारस पांड्या एवं एम के जैन ने किया। आचार्य श्री को शास्त्र भेंट राधेश्याम अंकुर जैन ग्वालियर एवं महेंद्र विद्युत लता जैन विदिशा ने किये।

श्रीफल भेंट किया

आचार्य श्री को महापौर पुष्पमित्र भार्गव, दिगंबर जैन सामाजिक संसद एवं सोशल ग्रुप फेडरेशन के अध्यक्ष क्रमशः राजकुमार पाटोदी, राकेश विनायका सहित रितेश अजमेरा, अमित कासलीवाल, हंसमुख गांधी, विपुल बांझल, सुशील पांड्या, राजेश जैन दद्दू, दिलीप पाटनी ने श्रीफल चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। समारोह में प्रदेश के विभिन्न शहरों से काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। संचालन ब्रह्मचारी सुनील भैया एवं अनुराग जैन ने किया।

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