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उपनगरों से आए रथों ने की मुंबई में धर्म प्रभावना: मुनिद्वय की अनोखी अगवानी में नतमस्तक मुंबई


आचार्य श्री देवनंदी जी के शिष्य़ मुनिराज अमोघकीर्ति जी एवं अमरकीर्ति जी का चातुर्मास मुंबई में हो रहा है। उनकी मंगल अगवानी यहां ने अनोखे तरीके से की गई। मुंबई में अनेक उपनगर है। हर उपनगर से अलग-अलग रथों पर मंगल कलश सजाकर पूरे मुंबई में सफऱ कर गुलालवाड़ी पहुंचे। जहां इन रथों का स्वागत युगल मुनिराज के सानिध्य में दिल्ली के उद्योगपति नवीन जैन ने श्रीफल फोड़कर किया। मुंबई से पढ़िए, यह खबर…


मुंबई। आचार्य श्री देवनंदी जी के शिष्य़ मुनिराज अमोघकीर्ति जी एवं अमरकीर्ति जी का चातुर्मास मुंबई में हो रहा है। उनकी मंगल अगवानी यहां ने अनोखे तरीके से की गई। मुंबई में अनेक उपनगर है। हर उपनगर से अलग-अलग रथों पर मंगल कलश सजाकर पूरे मुंबई में सफऱ कर गुलालवाड़ी पहुंचे। जहां इन रथों का स्वागत युगल मुनिराज के सानिध्य में दिल्ली के उद्योगपति नवीन जैन ने श्रीफल फोड़कर किया। इस अवसर पर मानों ऐसा लग रहा था कि जैसे पूरा मुंबई गुरुदेव की अगवानी कर रहा है। गौरतलब है कि इस बार पूरे मुंबई में एक ही संघ का चातुर्मास है। इस समय णमोकार तीर्थ के अध्यक्ष नीलम अजमेरा, तीर्थक्षेत्र कमेटी के महामंत्री संतोष पेंढारी एवं गुलालवाड़ी के अध्यक्ष अशोक दोशी, ग्लोबल महासभा के अध्यक्ष जमनालाल हपावत सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे। गौरतलब है कि यह अनोखे रथ 50 किमी से भी ज्यादा मुंबई में घूमे। उन्होंने पूरी मुंबई में धर्म की प्रभावना की और वे गुलालवाड़ी पहुंचे।

इन सभी रथों पर युगल मुनिराजों की फोटो, श्रीजी का कट-आऊट, मंगल कलश, जैन धर्म की पताका लगाकर फूलों से सजाया गया था। जिसे बनाने के लिए संघस्थ ब्र. सुमन दीदी एवं सभी उपनगरों के युवाओं ने विशेष मेहनत की। जुलूस-रैली के बाद हुई सभा में चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना की और युगल मुनिराज का पिच्छी परिवर्तन हुआ। साथ ही णमोकार तीर्थ पर होनेवाले भव्य अंतराष्ट्रीय पंचकल्याणक महोत्सव एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव के कलश आवंटन समिति का उद्घाटन हुआ।

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