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गणधरों ने अपनी स्मरण शक्ति से शास्त्रों की रचना की: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने जावद में दी मंगल देशना 

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने जावद में विराजित रहकर मंगल देशना दी है। इसमें धर्म, ग्रंथ और ज्ञान का महत्व बताया। देव शास्त्र और गुरु की महिमा का बखान किया है।...

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मुरैना में मुनिराजों का भव्य मंगल आगमन: कुछ दिन रुककर मुरैना में करेंगे धर्म प्रभावना

मुरैना के बड़े जैन मंदिर में विगत दिवस जैन संतों का भव्य मंगल आगमन हुआ। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री आर्जव सागरजी महाराज...

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किसी भी गलत कार्य के प्रति प्रायश्चित बड़ा तप-स्वस्तिभूषण माताजी: शिवम वाटिका में मुनिसुव्रतनाथ विधान किया

मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक महोत्सव आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में मनाया गया। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक एवं...

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अतिशय तीर्थ पार्ट 32 नागफणी बाबा की कृपा से कभी नहीं होता कोई अनिष्ट अरावली की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित है यह मंदिर

जैन अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। इन क्षेत्रों में जैन धर्म के भगवान महावीर और उनके पूर्वकल्याणकारक जिनेन्द्र देव के आध्यात्मिक...

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अतिशय तीर्थ पार्ट 32 By_the_grace_of_Nagphani_Baba_no_harm_ever_occurs नागफणी बाबा की कृपा से कभी नहीं होता कोई अनिष्ट

जैन अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। इन क्षेत्रों में जैन धर्म के भगवान महावीर और उनके पूर्वकल्याणकारक जिनेन्द्र देव के आध्यात्मिक...

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अतिशय तीर्थ पार्ट 25 जिसने यहां चोरी की कोशिश की, वो हो गए अंधे और पागल जैन और अजैन व्यक्ति अपनी मनोकामनाओं को लेकर आते हैं यहां

जैन अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। इन क्षेत्रों में जैन धर्म के भगवान महावीर और उनके पूर्वकल्याणकारक जिनेन्द्र देव के आध्यात्मिक...

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क्षमावाणी पर्व के कार्यक्रम में किया सम्मानित' माही जैन ने बनाई आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज की तस्वीर

ललितपुर(राजीव सिंघई मोनू)। आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज एवं सुधा सागर महाराज की तस्वीर को माही जैन में पेंसिल से स्क्रैच करके आकृति को बनाया। अभिनंदनोदय...

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श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन अर्पित किए गए 1024 अर्घ्य : धर्म को हमेशा उच्च स्थान देकर अपने कर्म करें-अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर

अंजनी नगर स्थित पार्श्व संत सदन भवन, श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री अभिनंदन सागर महाराज जी से दीक्षित, आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज से...

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आत्मा में निर्मल गुणों के समीचीन ज्ञान प्रकट करने की क्षमता और दृढ़ता है: आचार्य श्री वर्धमान सागर की मंगल देशना

सम्यक ज्ञान समीचीन ज्ञान है। समीचीन ज्ञान स्वाध्याय तप संयम के माध्यम से अपनी शक्ति सामर्थ्य को प्रकट करें। इससे सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र प्राप्त होता है।...

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