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मुंगाना में आचार्यश्री वर्धमान सागर जी का मंगल प्रवेश : धर्म सभा में अपनी देशना में प्रकट की


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पारसोला से विहार करते हुए संघ सहित मुंगाना 8 फरवरी को भव्य मंगल प्रवेश किया। यहां संघ ने नगर प्रवेश के साथ मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान और अजीतनाथ भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन किए। भक्तों ने अगवानी की। पढ़िए मुंगाना से यह खबर…


मुंगाना। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का पारसोला से विहार कर संघ सहित मुंगाना 8 फरवरी को भव्य मंगल प्रवेश हुआ । सब्र का फल मीठा होता है। बहुत प्रतीक्षा के बाद वर्षों के पुण्य से आपको यह लाभ मिला है। काफी वर्षों के बाद संघ का आगमन यहां हुआ है। इसके पूर्व हमारे दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ आए थे। आचार्यश्री शिवसागर जी भी यहां आ चुके हैं। साधु समागम कठिनता से प्राप्त होता है।

शुभ कार्य से पुण्य का उदय होता है

जैन धर्म कर्म प्रधान धर्म है। हमारे कर्म शुभ-अशुभ जैसे होगे। वैसे ही हमें पुण्य या पाप मिलता है। शुभ कार्य से पुण्य का उदय होता है। योग-संयोग अब बने नगर के प्राचीन मंदिर के मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान है और नवनिर्मित मंदिर में श्री अजित नाथ भगवान की प्रतिष्ठा हुई है। सम्मेद शिखर से श्रीअजीत नाथ भगवान पहले मोक्ष गए हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने मुंगाना नगर में आयोजित धर्म सभा में अपनी देशना में प्रकट की।

पत्थर की नाव हमें डुबो देती है

राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने अपने देशना में आगे बताया कि मनुष्य गति, त्रियंच देव गति को धर्म देशना सुनने का सौभाग्य मिलता है। मनुष्य जन्म और उसमें भी उच्च कुल असीम पुण्य से प्राप्त होता है । हमारे भगवान सर्वज्ञ वितरागी और हितोपदेशी हैं । उनकी वाणी मंगलमय होती है। इनकी शरण मंगलकारी होती है। आचार्यश्री ने पत्थर और लकड़ी की नाव के उदाहरण के माध्यम से बताया कि रत्नत्रय दिव्य देशना लकड़ी की नौका है। जिससे इस किनारे से उस किनारे हम रत्नत्रय धारण कर सिद्धालय को प्राप्त सकते हैं जबकि, पत्थर की नाव हमें डुबो देती है। इसलिए धर्म को समझने का प्रयास कर अपने मानव जीवन को सार्थक करने का प्रयास सभी ने करना चाहिए।

भक्तों ने की अगवानी

दशा हुमड दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष करण सेठ सहित हजारों भक्तों ने आचार्य श्री संघ की भव्य अगवानी की। संघ ने नगर प्रवेश के साथ मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान और अजीतनाथ भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन किए।

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Shreephal Jain News

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