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जैन रामायण की वाचना : जैसे ही वैराग्य उत्पन्न हो, मुनि बन जाओ


निर्मल सेवा सदन छीपीटोला, आगरा में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 साक्ष्य सागर महाराज, मुनि श्री 108 योग्य सागर महाराज, मुनि श्री 108 निवृत सागर महाराज के सानिध्य में आगरा के इतिहास में पहली बार सिद्ध पुरुष श्री राम कथा पदम पुराण जैन रामायण वाचना हुई। पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट…


आगरा। निर्मल सेवा सदन छीपीटोला, आगरा में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम् प्रिय शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 साक्ष्य सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 योग्य सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 निवृत सागर जी महाराज के सानिध्य में आगरा के इतिहास में पहली बार सिद्ध पुरुष श्री राम कथा पदम पुराण जैन रामायण वाचना हुई l इसके बाद दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, मंगलाचरण सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम हुए।

इसके बाद मुनि श्री 108 साक्ष्य सागर जी महाराज जी एवं मुनि श्री 108 निवृत सागर जी महाराज ने पद्‌म पुराण को कथा के अन्तर्गत अपनी मंगलमय वाणी में बताया कि दशानन ने राजा इन्द्र पर विजय प्राप्त कर अपनी विजय की घोषणा कर दी और लंका नगरी की ओर चल पड़ा। सम्पूर्ण नगर रोशनी के नहा उठा एवं घर द्वार चंदन – गुलाब के सुगंधित हो उठे। नगर प्रवेश के समय रावण शान से चल रहा था और राजा इन्द्र बन्दी बना सैनिकों से घिरा सड़‌क पर चला जा रहा था। तभी किसी ने उच्च सिंहासन पर बैठने कहा तथा कहा कि आप ही इस लंका पर राज करोगे एवं अपनी उदारता एवं विशाल हृदयता का परिचय देते हुये उन्हें उनका राज्य सौंपने का प्रस्ताव दिया।

एक चारण रिद्धि धारी मुनिराज निर्माण वहां से निकले और जिनालय के दर्शन किये। राजा इंद्र के पिता ने सहत्तसार रावण से कहा कि हे दशानन अब तुम इस को जीत चुके हो, अत: इसे क्षमा करो l दशानन ने कहा कि इसे मैं क्षमा कर दूंगा लेकिन इसको सम्पूर्ण नगर की झाडू प्रतिदिन लगानी होगी l तब राजा इंद्र के पिता सहत्तसार ने कहा, इस इन्द्र को इतना कठोर दण्ड न दो। यह उचित नहीं है। तब रावण ने सहत्तसार के अनुरोध को स्वीकार कर उनको ससम्मान विदा किया।

संसार बड़ी विचित्रता से भरा हुआ है। यह जीव अशुभ कर्म करता है एवं सुख दुख का वेदन करता है। वैराग्य संभालना बहुत कठिन है। यह उत्पन्न तो होता है लेकिन जल्दी ही इसका विलोप हो जाता है। अतः जैसे का ही वैराग्य उत्पन्न हो, उसे तुरन्त उपयोग कर मुनि बन जाना चाहिए। एक अव्रहम सेवन से 1 करोड़ जीवों की मृत्यु हो जाती है।

ये रहे मौजूद

प्रवचन के दौरान मंदिर कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष एकांत, अनिल जैन कांटा, मंत्री प्रवेश जैन, रविंद्र जैन (कोषाध्यक्ष), प्रदीप जैन सी.ए, राजेश जैन, विवेक जैन, आशु जैन (बाबा), रोहित जैन, दिनेश जैन, राजीव जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन आदि थे l अगले दिन सुबह 8:30 बजे आगरा के इतिहास में पहली बार सिद्ध पुरुष श्री राम कथा पदम पुराण जैन रामायण वाचना का कार्यक्रम निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला आगरा में होगा l

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