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मुनिश्री आदित्य सागर महाराज संघ का नगर आगमन: मंगल अगवानी में उमड़ा रामगंजमंडी का जैन समाज 


मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज का नगर मंगल आगमन हुआ। महाराज श्री संघ का नगर की सीमा पर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन नसिया में मंगल आगमन हुआ। जहां समाज जन एवं नगर वासियों ने महाराज श्री संघ की मंगल अगवानी की। महाराज श्री संघ दिगंबर जैन नसिया मंदिर के दर्शन किए। उन्हीं के सानिध्य में नसिया जी मंदिर में श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की खबर…


रामगंजमंडी। मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज का नगर मंगल आगमन हुआ। महाराज श्री संघ का नगर की सीमा पर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन नसिया में मंगल आगमन हुआ। जहां समाज जन एवं नगर वासियों ने महाराज श्री संघ की मंगल अगवानी की। महाराज श्री संघ दिगंबर जैन नसिया मंदिर के दर्शन किए। उन्हीं के सानिध्य में नसिया जी मंदिर में श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। बैंडबाजों एवं जय जयकार के साथ गुरुदेव को नगर के प्रमुख मार्गाे से होते हुए श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया। जगह-जगह गुरुदेव का पाद प्रक्षालन मंगल आरती कर अगवानी की गई। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर समाज की ओर से गुरुदेव संघ की मंदिरजी के प्रवेश द्वार पर अगवानी की गई। पाद प्रक्षालन किया गया एवं आरती की गई। गुरुदेव ने मूलनायक शांतिनाथ भगवान के दर्शन किए एवं उनके सानिध्य में अभिषेक शांतिधारा हुई। धर्म सभा मंदिर जी के सभा स्थल पर प्रारंभ हुई। जिसमें बाहर पधारे हुए अतिथियों का अभिनंदन एवं स्वागत किया गया। समाज की ओर से गुरुदेव के चरणों में श्रीफल समर्पित कर मंगल आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर प्रकाश बज अध्यक्ष सकल दिगम्बर जैन समाज कोटा, विमल जैन नांता, संरक्षक जेके जैन, संयोजक पदम बरला, महामंत्री के साथ दिगंबर जैन मंदिर रिद्धि-सिद्धि नगर अध्यक्ष राजा गोधा आरके पुरम, त्रिकाल चौबीसी मंदिर कोटा दिगंबर जैन मंदिर अध्यक्ष अंकित जैन ने गुरुदेव के चरणों में कोटा आगमन हेतु निवेदन किया।

यदि भ्रम हो गया तो कुछ भी नहीं बचेगा – मुनि श्री आदित्य सागर महाराज

मुनि श्री आदित्य सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन में कभी भी भ्रम मत करना यदि भ्रम हो गया तो कुछ भी नहीं बचेगा गुरु और शिष्य के संबंध में भी भ्रम नहीं होना चाहिए। कान के कच्चे मत रहना। अच्छे दोस्त की परिभाषा देते हुए कहा कि अच्छा दोस्त वह है जो मुसीबत में काम आए। न राग में न द्वेष में विश्वास दिगंबर वेष में मन में विश्वास है गुरु है तो सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन, गुरु से भ्रम हो जाए तो सब कुछ बेकार हो जाएगा उन्होंने लोभ के विषय में भी बताया और कहा कि जीवन में कभी लोभ मत करना लोभ में दुखी होकर कभी चक्कर में मत पढ़ना आचरण को स्वच्छ रखना बहुत जरूरी है की देखा देखी भी मत पढ़ो जो काम दूसरे करते हैं वही आप करते हैं वही आपके लिए हानिकारक है। महाराज श्री ने तीव्र राग के विषय में कहा कि जीवन में चेतन अचेतन के प्रति तीव्र कभी भी तीव्र राग मत करना उनके प्रति तीव्र राग हानिकारक है राग करोगे तो वही जाकर जन्म लोगे जिसके प्रति तुम्हारा राग है। मंगल प्रवचन उपरांत गुरुदेव की मंगल आहारचर्या हुई। मंगल आहार चरण वंदना का पुण्य लाभ प्रदीप कुमार प्रतीक कुमार सोनी को प्राप्त हुआ। संध्या बेला में गुरुदेव का मंगल विहार कोटा की ओर हुआ।

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