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वर्तमान की इतनी कदर करो कि भगवान महावीर बन सको : आचार्यश्री विनिश्चय सागरजी ने नैनवा के समाजजनों की मुक्तकंठ से की सराहना 


आचार्यश्री विनिश्यसागर जी इन दिनों विहाररत हैं। उनका रात्रि विश्राम अल्फाबेट पब्लिक स्कूल में हुआ। गुरुवार को सुबह 8 बजे देईपोल चौराहे पर जैन समाज की ओर से उनकी भव्य अगवानी की गई। गाजे-बाजे बैंड बाजे के साथ जय जय कार करते उन्हें ले जाया गया। नैनवा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


नैनवा। आचार्यश्री विनिश्यसागर जी इन दिनों विहाररत हैं। उनका रात्रि विश्राम अल्फाबेट पब्लिक स्कूल में हुआ। गुरुवार को सुबह 8 बजे देईपोल चौराहे पर जैन समाज की ओर से उनकी भव्य अगवानी की गई। गाजे-बाजे बैंड बाजे के साथ जय जय कार करते उन्हें ले जाया गया। जगह-जगह पर तोरण द्वार लगाए गए और पुष्पवर्षा की गई। आचार्यश्री का जैन समाज के विभिन्न परिवारों ने पाद प्रक्षालन किया। उनियारा चौराहा से शांति वीर धर्म स्थल तक एक दर्जन से अधिक परिवारों ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का पुण्य प्राप्त किया। शांति वीर धर्म स्थल पहुंचने पर आचार्य श्री संघ जिनालय के दर्शन कर गढ़पोल दरवाजा, मालदेव चौक होते हुए अग्रवाल दिगंबर जैन बड़े मंदिर पहुंचे। अगवानी के क्रम में महिलामंडल ने आचार्य श्री संघ को फूलों के थाल सजाकर पदार्पण कराया। संघ में आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी, मुनिश्री प्रांजल सागरजी महाराज, मुनिश्री प्रवीर सागरजी महाराज, मुनिश्री प्रत्यक्ष सागरजी महाराज क्षुल्लक श्री प्रमेश सागरजी महाराज संघ में हैं।

दीप प्रज्वलन इन समाजजनों ने किया 

आचार्य श्री विराग सागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित अतिथि जयपुर, निवाई, रामगंजमंडी शिवाड़, महासभा तथा नैनवां समाज अध्यक्ष कमल मारवाड़ा ने किया। मंगलाचरण की प्रस्तुति बालिकाओं ने दी। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य मोहनलाल, कमलकुमार, मनीषकुमार, पम्मी जैन मारवाड़़ा परिवार, शास्त्र भेंट का सौभाग्य सूरजमल जैन, एडवोकेट मुजीब, जयंत, मयंक सोगानी परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री के जीवन पर प्रकाश मोहनलाल मारवाड़़ा, महावीर सरावगी, विनोद बनी, चेतन जैन, निमोडिया महासभा ने डाला।

आचार्य श्री ने नैनवा की तारीफ

आचार्य श्रीविनिश्चय सागर महाराज ने बताया कि जैसा सुना था, वैसा ही नैनवां नगरी पहुंचने पर देखने को मालूम हुआ कि यह धर्म नगरी है, जहां पर मुनिश्री प्रज्ञानसागर, मुनिश्री प्रसिद्ध सागर महाराज मेरी आंखों के दो नैन का वर्षा योग हुआ है। उन्होंने कहा आज का मनुष्य अपनी मंजिल पाने के लिए भटक रहा है। उस मंजिल पहुंचने पर पहले निश्चय करना होगा कि मुझे कौन सी मंजिल तक पहुंचना है।

  दिगंबर संत ज्ञान देने के लिए आपके यहां आते हैं

आचार्यश्री ने कहा कि भगवान महावीर ने अपनी मंजिल पहुंचने के लिए संसार को त्याग दिया था तुम भी वर्तमान की इतनी कदर करो कि तुम भी भगवान महावीर जैसा बन सको। दिगंबर संत सदैव ही ज्ञान देने के लिए आपकी नगरी में आते हैं। आप उसे ज्ञान को जीवन में उतारते ही नहीं, यही कारण है संसार में भटकने का। आचार्य श्री ने बताया कि शुरुआत अच्छी होगी तो अंतिम छोर भी बहुत अच्छा होगा। मनुष्य अपना कद बढ़ाना चाहता है तो वह महावीर की वाणी से बढ़ेगा। आपकी चंचल लक्ष्मी से बढ़ने वाला नहीं है। यह धन तो नाशवान है। एक दिन आया वैसे ही चला जाएगा। धर्म जीवन भर आपका साथी बनाकर आपका साथ निभाएगा।

आचार्यश्री को श्रीफल किया भेंट 

इस समारोह में प्रदीप जैन, निर्मल जैन डॉ. विमल जैन, अशोक जैन, चेतन जैन, निमोडिया महासभा सदस्य विमल झोला जैन निवाई मुनि भक्त पधारे। दिगंबर जैन समाज नैनवा, निवाई रामगंजमंडी, शिवाड़ जयपुर आदि स्थानों के भक्तों ने श्रीफल भेंट कर निवेदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म सभा का संचालन विनोद जैन बनी ने किया

श्रद्धा से दर्शन करने पर भवन निर्मल होते हैं 

आर्यिका विशुद्धमति माताजी की शिष्या विशेषमति माताजी ने बताया कि श्रद्धा से प्रभु के दर्शन करने से बहुत कुछ प्राप्त होता है। बिना श्रद्धा के कुछ भी प्राप्त नहीं होता। साधु संत के दर्शन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, इसीलिए भक्त साधु-संतों के दर्शन करने के लिए लालायित रहते हैं। सभी बाहर से पधारे भक्तों को आचार्य ने अपना आशीष दिया

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