नगर में जिला कलेक्ट्रेट के सामने सुबह आवश्यक क्रिया के लिए जाते समय एक अनियंत्रित कार ने दो आर्यिका माताजी को टक्कर मार दी थी। इसमें एक आर्यिका श्रुतमति माताजी की सुबह समाधि हो गई थी। दूसरी आर्यिका उपसममति माताजी की समाधि शाम 4.22 पर हो गई है। रीवा से पढ़िए, यह रिपोर्ट…
रीवा। नगर में जिला कलेक्ट्रेट के सामने सुबह आवश्यक क्रिया के लिए जाते समय एक अनियंत्रित कार ने दो आर्यिका माताजी को टक्कर मार दी थी। इसमें एक आर्यिका श्रुतमति माताजी की सुबह समाधि हो गई थी। दूसरी आर्यिका उपसममति माताजी की समाधि शाम 4.22 पर हो गई है। समाज प्रवक्ता राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित शिष्या आर्यिकाश्री उपसममति माताजी की समाधि अभी-अभी रीवा में जैन संत भवन में हो गई है। शाम 5.30 बजे उनका डोला उठा। इस दुखद घटना से जैन समाज, जैन श्रमण संस्कृति के साधक भी चिंतित हुए।
आर्यिका माताजी का परिचय
गृहस्थ अवस्था का नाम वाणी जैन था। उनका जन्म 26 मई, 1979 को चौय्यर, तमिलनाडु में माता-पिता लक्ष्मीजी जैन और देवकुमारजी जैन के घर हुआ था। उन्होंने बैचलर ऑफ कॉमर्स (बी.कॉम) प्रथम वर्ष तक पढ़ाई की। उसके पश्चात आध्यात्मिक मार्ग पकडा। उन्होंने 1999 में तमिलनाडु के पुन्नूर मलाई में ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली और 13 फरवरी 2006 को आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से आर्यिका श्री उपसमती माताजी के रूप में दीक्षा सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर दमोह में हुई।













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