समाचार

लक्ष्य हीन मनुष्य उस मच्छर के समान है जो उड़ता तो बहुत है परंतु पहुंचता कहीं नहीं – आचार्यश्री अनुभवसागर जी महाराज

लोहारिया,19 जुलाई2020 । श्री विमल – भरत सभागार मैं प्रातः कालीन स्वाध्याय के दौरान पूज्य युवाचार्य श्री अनुभवसागर जी महाराज ने कहा की यह संसार का इतिहास है कि जो आएगा वह जाएगा ।तो भी महत्वपूर्ण मानव जीवन क्या मात्र आने जाने के लिए प्राप्त हुआ है यह विचार अगर हम नहीं कर पा रहे हैं तो हम बहुमूल्य जीवन को यूं ही व्यर्थ गंवा रहे हैं। यूं समझ लें की हाथ तापने के लिए हम चंदन की लकड़ियों को ही जलाकर राख कर रहे हैं । मानव जन्म पाकर शिक्षा आदि से संपन्न होकर भी यदि हम जीवन के उद्देश्य को नहीं समझ पा रहे तो यह दुर्भाग्य ही है हमारा मच्छर दिनभर उड़ता है परंतु पहुंचता कहीं नहीं मक्खी भी उड़ती भक्ति रहती है परंतु पहुंचती कहीं नहीं चींटी सारा दिन भार ढोती है अपने शरीर से भी 8 गुना ज्यादा कोल्हू का बैल सारा दिन चलता है मगर वो भी कहीं नहीं पहुंचता क्योंकि उन सबके चलने – उड़ने का कोई उद्देश्य नहीं होता ।
जीवन के निर्वाह के साधनों को जुटाने में मानव इतना व्यस्त हो जाता है कि वह इन सब बातों का कभी विचार नहीं कर पाता । वह लौकिक दिनचर्या मैं और भौतिक जरूरतों का इतना अभ्यस्त हो चुका है की आध्यात्मिकता उसे कल्पना मात्र प्रतीत होती है । पैसा कमा लेना परिवार बढ़ा लेना पेट भर लेना ही अगर जीवन है तो यह मात्र एक मजबूरी है! अरे पैसा तो देहव्यापार करने वाले भी कमा लेते हैं, पेट भिखारी भी भर लेता है, और परिवार की वृद्धि भरण पोषण पशु भी कर लेते हैं फिर बहुमूल्य मनुष्य देह को पाकर हमने कौन सा महत्वपूर्ण कार्य कर लिया । यह विचार ज्ञान और फिर उस दिशा में उठाया गया कदम जीवन निर्वाह नहीं बल्कि निर्माण और निर्वाण का कारण बन जाता है ।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
संपादक

About the author

संपादक

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page