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रामसर का मोराझडी, चांपानेरी, सरवाड़ व देशठू का जैन मंदिर पहले से : आचार्य सुनील सागर ने किया पंचायत छोटा धड़ा नसियां को अतिशय क्षेत्र घोषित 


 आचार्य सुनील सागर महाराज ने पंचायत छोटा घड़ा नसियां को अतिशय क्षेत्र (जहां आए दिन चमत्कार होते हैं) घोषित किया है। आचार्य ने यह घोषणा रविवार को छोटा नसियां में स्थित 1008 आदिनाथ भगवान की प्राचीन प्रतिमा के सामने तप करते हुए की। ये प्रतिमा बलुआ पत्थर से निर्मित है। यह शहर का पहला और एकीकृत जिले का पांचवां अतिशय क्षेत्र है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


अजमेर। आचार्य सुनील सागर महाराज ने पंचायत छोटा घड़ा नसियां को अतिशय क्षेत्र (जहां आए दिन चमत्कार होते हैं) घोषित किया है। आचार्य ने यह घोषणा रविवार को छोटा नसियां में स्थित 1008 आदिनाथ भगवान की प्राचीन प्रतिमा के सामने तप करते हुए की। ये प्रतिमा बलुआ पत्थर से निर्मित है। यह शहर का पहला और एकीकृत जिले का पांचवां अतिशय क्षेत्र है। रामसर का मोराझडी जैन मंदिर, चांपानेरी का जैन मंदिर, देरातू का जैन मंदिर और सरवाड़ का जैन मंदिर भी अतिशय क्षेत्र हैं। पंचायत छोटा घड़ा के अध्यक्ष दिनेश पाटनी ने बताया कि यहां जैन धर्मावलंबियों का तांता लगा हुआ है। उपाध्यक्ष कोसिनोक जैन ने बताया कि पूर्व में अनेक जैन संत यहां प्रवासकाल के दौरान इस प्रतिमा और क्षेत्र को चमत्कारिक बता चुके हैं। आचार्य वर्धमान सागर और आचार्य प्रसन्न सागर ने यहाँ तक कह दिया था कि ऐसी प्रतिमा श्रीमहावीरजी के बाद पूरे देश में कहीं नहीं है। इस मंदिर में प्रतिमा के दर्शन के लिए जैन समाज ही नहीं बल्कि सभी समाजों के लोग नियमित आते हैं।

ये होते हैं अतिशय क्षेत्र 

जिन क्षेत्रों में तीर्थंकरों की प्राचीनतम मूर्तियों में कोई विशेष बात, चमत्कार दृष्टिगत होता है और मनवांछित कार्य की सिद्धि होती है वह क्षेत्र अतिशय क्षेत्र कहलाता है। अतिशय का एक अर्थ चमत्कार भी है।

पानी हो गया मीठा

श्रद्धालु बताते हैं- यहां कुएं का पानी मीठा हो गया, माला जपते हैं। कबूतर पंचायत के मैनेजर मनोज गोधा ने बताया कि पूर्व में इस क्षेत्र में खारे पानी का कुआं था। आचार्य महावीर कीर्ति ने आदिनाथ भगवान की शांतिधारा करके जल को कुएं में डाला तो 24 घंटे में कुएं का जल निर्मल और मीठा हो गया। वर्तमान में मंदिर में इसी जल का उपयोग पेयजल के रूप में किया जाता है। इस कुएं का जलस्तर पहले 40 फीट था, जो अब 8 फीट पर आ गया है। धड़े के कोसिनोक जैन का दावा है कि मंदिर में प्रतिमा के पास कबूतरों का प्रवास वर्षभर रहता है, कबूतर प्रतिमा से माला लेकर 108 बार जपकर वापस रख देते हैं, ऐसा एक दो बार नहीं बल्कि कई बार हो चुका है।

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