भव्य शोभायात्रा यात्रा के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर गुरुदेव नगर निगम प्रागंण पहुंचे। इस अवसर पर पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा, विवेक कटारा द्वारा आचार्य श्री की अगुवानी की गई। असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने आचार्य श्री से उदयपुर में चातुर्मास करने का अनुरोध किया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की विस्तृत रिपोर्ट…
उदयपुर। भव्य शोभायात्रा यात्रा के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर गुरुदेव नगर निगम प्रागंण पहुंचे। वहां गुरुदेव का स्वागत किया गया। पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा, विवेक कटारा द्वारा आचार्य श्री की अगुवानी की गई। उसके पश्चात पूर्व आचार्यों को आगे अर्घ्य चढ़ाए गए। मातृशक्ति द्वारा मंगलाचरण किया गया। उसके पश्चात असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने आचार्य श्री से उदयपुर में चातुर्मास करने का अनुरोध किया।

देव, शास्त्र, गुरु हैं मोक्ष का मार्ग
सांसारिक प्राणी अनेक गतियों, पर्याय में भ्रमण करता हुआ मनुष्य पर्याय में आया है। कुछ के पास वाणी नहीं है, कुछ के पास मन नहीं है। यह कर्मों का प्रतिफल है। वह पुण्यशाली है जिनके पास मन और वाणी है। आप भावना से भक्ति प्रदर्शित कर रहे हैं। गुरु का सानिध्य जीवन निर्माण का पहला सूत्र है। यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा 6 दिवसीय 34वें आचार्य पदारोहण गुणानुवाद कार्यक्रम में नगर निगम प्रांगण, उदयपुर के विशाल सभागार में व्यक्त की। प्रचार मंत्री राजेश पंचोलिया इंदौर और पारस चित्तौड़ा ने बताया कि आचार्य श्री ने बताया कि जो जहां निवास करता है, उसे उस स्थान से प्रेम हो जाता है। प्रीति बाहर जाने पर भी दूर नहीं होती। इसी प्रकार आप सभी चिरकाल से संसार में परिभ्रमण कर अनेक गतियों में निवास कर रहे हैं। जब तक अनुराग, राग, आसक्ति को छोड़कर पुरुषार्थ कर संयम का मार्ग धारण नहीं करेंगे, तब तक रत्नत्रय धर्म के माध्यम से मोक्ष प्राप्त नहीं होगा। देव, शास्त्र, गुरु रत्नत्रय धर्म संसार परिभ्रमण से मुक्ति पाने का मार्ग है।

यों की चातुर्मास की घोषणा
आचार्य श्री ने आगे बताया कि संत समागम से जीवन में परिवर्तन होता है। संसार असार है। सुख क्षणिक है, दुख अधिक है। सत्संग में गुरुजनों की संगति से बुद्धि निर्मलता को प्राप्त होती है। इसलिए आपको विषय कषायों का निग्रह करना चाहिए। बहु प्रतीक्षित चातुर्मास कलश स्थापना स्थल की घोषणा में बताया कि जिस प्रकार सभी नदियां सागर में मिलती हैं, उसी प्रकार नगर का मुख्य ऐतिहासिक हृदय स्थल नगर की सभी सेक्टर, कॉलोनियों, क्षेत्रों का बीसा हूमड़ भवन सागर है, यहां पर हमारे पूर्वाचार्यों ने भी चातुर्मास किए हैं। इसलिए वर्ष 2023 के चातुर्मास की कलश स्थापना बीसा हूमड़ भवन में होगी।

आचार्य श्री के पांच सूत्र
भावांजली में शिष्या आर्यिका श्री महायशमति माताजी ने कहा कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने शिष्यों और समाज को पांच सूत्र बताए हैं। आपको किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए, पाप से डरना चाहिए, अपने संकल्प- इच्छाशक्ति का प्रयोग करना चाहिए, एकता के सूत्र में रहना चाहिए, हमेशा मूल को पकड़ कर रखना चाहिए। इन सूत्रों को आचार्य श्री ने अपने जीवन में चरितार्थ किया और शिष्यों से भी पालन करा रहे हैं। मुनि श्री चिंतन सागर जी, मुनि प्रभव सागर जी, मुनि चिन्मय सागर जी ने आचार्य श्री के प्रति अपनी भावांजलि प्रस्तुत की।

बेटियों को आगे बढ़ाए समाज
असम के राज्यपाल माननीय गुलाबचंद कटारिया ने अपने स्वागत अभिनंदन वक्तव्य में आचार्य श्री के लिए कहा कि आपके स्वागत अभिनंदन के लिए कोई शब्द नहीं है। मुझे सौभाग्य मिला है कि मैंने इस वर्ष में दो बार आप के दर्शन किए हैं। संतों के द्वारा धर्म, संस्कार और चरित्र के उपदेश दिए जाते हैं हम तो किंचित मात्र प्रयास करते हैं कि धर्म और परिवार के संस्कार अनुरूप चल सकें। मेरी अभिलाषा है कि हम गुरुदेव को अधिक से अधिक समय सुनें ताकि हम सब की दशा और दिशा में परिवर्तन हो।मुख्य अतिथि ने समाज की प्रतिभाशाली बेटियों की उच्च शिक्षा पर जोर देते हुए प्रेरणा दी कि उनकी योग्यता को निखारने के लिए समाज के स्तर पर कोई ठोस प्रयास किया जाना चाहिए।
पुष्प वर्षा से स्वागत
आचार्य शिरोमणि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का प्रातः 7:00 नगर निगम टाउन हॉल के लिए मंगल विहार हुआ। स्थान-स्थान पर समाज जनों ने आचार्य श्री की आरती उतारकर चरण प्रक्षालन किए। सभागार परिसर में 34 फीट की विशाल रंगोली बनाई गई तथा 73 महिलाओं ने संघ पर पुष्प वृष्टि की। कार्यक्रम में आचार्य श्री के मंचासीन होने के बाद महिला जागृति मंच ने नृत्य का मंगलाचरण प्रस्तुत किया। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के चित्र का अनावरण किशनगढ़ के भामाशाह अशोक पाटनी आर के मार्बल ने किया। संजय पापड़ी वाल किशनगढ़, भरत जैन इंदौर, राजेश काला कोलकता, राकेश सेठी कोलकाता, सुरेश सबलावत जयपुर, पारस पंचोलिया सनावद, राजेश शाह, राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद, गज्जू भैया, शांति लाल वेलावत द्वारा चित्र अनावरण कर दीप प्रवज्वलन किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य गुलाबचंद कटारिया तथा रघुवीर मीणा, फूल सिंह मीणा, ग्रामीण विधायक उपमहापौर पारस सिघवी, जिलाध्यक्ष रवींद्र श्रीमाली, ताराचंद जैन व्हाट्सएप देवेंद्र साहू, राजकुमार चितौडा, अशोक पाटनी किशनगढ़, संजय पापड़ीवाल, भरत जैन इंदौर को प्राप्त हुआ। शांतिलाल वेलावत ने स्वागत भाषण विनयांजलि दी। राकेश सेठी कलकत्ता, संजय पापड़ीवाल किशनगढ़, पारस पंचोलिया सनावद, भामाशाह अशोक पाटनी आर के मार्बल ने विनयांजलि प्रस्तुत की।

जीवन चरित्र होगा प्रसारित
आर्यिका श्री महायशमति जी ने बताया कि प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी के आचार्य पद के शताब्दी वर्ष 2024 के उपलक्ष्य में जिनवाणी चैनल पर 52 सप्ताह में शनिवार रविवार को टूडी फिल्म के माध्यम से आचार्य श्री शांति सागर जी का जीवन चरित्र प्रसारित होगा। आज 2 एपिसोड लांच किए गए। 34वें आचार्य पदारोहण पर देश के विभिन्न नगरों से आए विशिष्ट अतिथियों के अलावा सलूंबर, केशरिया जी, पारसोला, धरियावद, गिंगला आदि अनेक नगर के भक्तों ने पूजन किया। शिखरचंद घाटलिया परिवार को आचार्य श्री की पुरानी पिच्छिका मिली। वर्ष 1990 में आचार्य पद के बाद मूलचंद घाटलिया पारसोला को प्रथम शिष्य मुनि दीक्षा दी। 34वें आचार्य पदारोहण पर पूर्व गृहस्थ अवस्था के परिजन शिखर चंद, विनोद,सक्षम, मौलिक घाटलिया परिवार को प्राप्त हुई। कल सर्व ऋतु विलास दिगंबर जैन मंदिर के लिए आचार्य संघ का विहार होगा।













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