शहर स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, गौरी किनारा में दिनांक 30 मार्च 2026 को भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर श्री 1008 महावीर भगवान विधान का आयोजन अत्यंत भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। प्रातः 7 बजे भगवान महावीर पर प्रथम कलश करने का सौभाग्य श्रीमती सुशीला जैन एवं मनोज जैन (मुंबई) को प्राप्त हुआ। पढ़िए सोनल जैन की रिपोर्ट…
भिंड। शहर स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, गौरी किनारा में दिनांक 30 मार्च 2026 को भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर श्री 1008 महावीर भगवान विधान का आयोजन अत्यंत भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। प्रातः 7 बजे भगवान महावीर पर प्रथम कलश करने का सौभाग्य श्रीमती सुशीला जैन एवं मनोज जैन (मुंबई) को प्राप्त हुआ। चतुर्थ कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य कैलाशी देवी, अनीश, ममता, अक्षत जैन, मनोज जैन, वंशिका जैन, स्वरूपचंद जैन, मनीष जैन, दीपक जैन एवं मनोज आकाश जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य कैलाशी देवी, अनीश, ममता जैन एवं अक्षत जैन को मिला, जबकि द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य सुनीता जैन, महेंद्र जैन, रूबी, शैलू (LIC), सृष्टि, वाणी, समर्थ जैन (विजपूरी परिवार) को प्राप्त हुआ। महाआरती का सौभाग्य श्री दिगंबर जैन सोशल ग्रुप अजितनाथ भिंड, चंद्रप्रभु महिला मंडल एवं विराग विशुद्ध बहु मंडल (किला गेट) को प्राप्त हुआ। सभी श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करते हुए विधान में सहभागिता की। साथ ही विश्व शांति महायज्ञ का भी आयोजन किया गया, जिसमें विश्व कल्याण की कामना की गई। कार्यक्रम के संयोजक शैलू जैन (LIC) ने बताया कि भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, जिन्होंने अहिंसा, सत्य और आत्म-अनुशासन का संदेश दिया। उनके उपदेश जीवन में शांति, क्षमा और करुणा का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने “जियो और जीने दो” का संदेश देकर मानवता को नई दिशा प्रदान की।
भगवान महावीर के प्रमुख अनमोल वचन इस प्रकार हैं—
अहिंसा परमो धर्मः — सभी जीवों के प्रति दया भाव रखें, घृणा विनाश का कारण है।
स्वयं पर विजय — जो स्वयं को जीत लेता है, वही सच्चा विजेता है।
आत्मज्ञान ही सत्य है — अपनी आत्मा को पहचानना ही सबसे बड़ा ज्ञान है।
दुख का कारण — मनुष्य अपने दोषों (क्रोध, लोभ आदि) के कारण दुखी होता है।
सच्चा सुख — आत्मा अकेली आती और जाती है, इसलिए मोह त्याग आवश्यक है।
समता भाव — जैसा व्यवहार स्वयं के लिए न चाहें, वैसा दूसरों के साथ न करें।
आत्म-नियंत्रण — जागरूक व्यक्ति निर्भय रहता है।
अंतर के शत्रु — क्रोध, घमंड, नफरत और लालच ही वास्तविक शत्रु हैं।
त्याग और क्षमा — भलाई और बुराई दोनों को त्यागकर क्षमा भाव रखें।
स्वयं भगवान बनें — सही प्रयासों से प्रत्येक जीव देवत्व प्राप्त कर सकता है।
कार्यक्रम में आशु, सौरभ, राहुल, मनोज, अरुण, कृष्णा, राजेश, गोपाल, दीपक, दीपू, शैलेन्द्र, अशोक, अंजली, गोपाल, संभव जैन, रूबी, पुष्पा, सरोज, सीमा, अनीता, सृष्टि, वाणी, लवी आदि श्रद्धालुओं ने निर्वाण लड्डू अर्पित किए।
इस आयोजन का सफल संचालन चंद्रप्रभु युवा समिति, गौरी किनारा भिंड एवं दिगंबर जैन सोशल ग्रुप अजितनाथ भिंड द्वारा किया गया।













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