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प्राणी को सुख धर्म मार्ग पर चलने से प्राप्त होता है: श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जिनालय में धार्मिक अनुष्ठान हुए 


आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर मंदिर में अनेक धार्मिक अनुष्ठान हुए। जिसमें जिनालय के नवीनीकरण पश्चात विधि पूर्वक शुद्धिकरण,आचार्य श्री शांति सागर जी के चरण स्थापना, श्रीजी को रजत सिंहासन पर विराजित करना, प्रथमाचार्य श्री शांति सागर निलय का शिलान्यास आदि कार्यक्रम हुए। नीमच से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


नीमच। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का विहार मध्यप्रदेश से राजस्थान की ओर चल रहा है। आचार्य संघ का आगमन नीमच में हुआ। धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अपनी मंगल देशना में बताया कि संसार का हर प्राणी दुखी है। सुख चाहता है प्राणी को सुख धर्म मार्ग पर चलने से प्राप्त होता है। धर्म से पुण्य का संचय होता है ,जैसे आप कार्य करोगे वैसे पुण्य या पापकी प्राप्ति होती है। पुण्य के संचय के लिए रत्नत्रय धर्म देव शास्त्र गुरु की शरण में आना होगा। आचार्य श्री शांतिसागर जी के आचार्य पद शताब्दी महोत्सव अंतर्गत नीमच शहर में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर मंदिर में अनेक धार्मिक अनुष्ठान हुए। जिसमें जिनालय के नवीनीकरण पश्चात विधि पूर्वक शुद्धिकरण,आचार्य श्री शांति सागर जी के चरण स्थापना, श्रीजी को रजत सिंहासन पर विराजित करना, प्रथमाचार्य श्री शांति सागर निलय का शिलान्यास आदि कार्यक्रम हुए।

कार्यक्रम के यह रहे लाभार्थी 

दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष ने बताया कि विजय विनायका समाज के असीम पुण्योदय से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 36 साधुओं के विशाल संघ का सहज सानिध्य प्राप्त हुआ। विगत दिनों श्री जी को चांदी के सिंहासन के लाभार्थी नीरज, राहुल जैन , निर्मला कुनिया, अनिल बज गोटे वाले, अनिल बज, लक्ष्मीनारायण सिंहल ने विराजित किया। श्री पार्श्वनाथ मंदिर का शुद्धिकरण 81 कलशों से समाज जन ने किया। मंदिर में लाल पत्थर के मुख्य पुण्यार्जक जैनब्रदर्स परिवार नीमच रहे। आचार्य शांतिसागर जी महाराज के चरणांे की स्थापना के पुण्यार्जक जैन ब्रदर्स परिवार एवं आचार्य श्री शांतिसागर संत निलय के शिलान्यास का सौभाग्य विजय शशि विनायका परिवार(पारस मल्हम वाले)जैन ब्रोकर्स परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागरजी का मंगल उपदेश हुआ।

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