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पारिवारिक एकता कुरु कुरु मंत्रों से डडूका में मांगलिक शांतिधारा : अंजन से निरंजन कथा से माताजी ने किया श्रद्धा का महत्व प्रतिपादित


धर्मनगरी में आचार्य श्री विराग सागरजी महाराज जी की सुशिष्या आर्यिका श्री विश्वासश्री माताजी द्वारा शांतिधारा, प्रवचन श्रृंखला और आनंद यात्रा द्वारा अभूतपूर्व धर्म प्रभावना की जा रही है। डडूका से पढ़िए, यह खबर…


डडूका। धर्मनगरी में आचार्य श्री विराग सागरजी महाराज जी की सुशिष्या आर्यिका श्री विश्वासश्री माताजी द्वारा शांतिधारा, प्रवचन श्रृंखला और आनंद यात्रा द्वारा अभूतपूर्व धर्म प्रभावना की जा रही है। प्रातःकालीन शांतिधारा में माताजी जब आतंकवाद छिंद छिंद भिंद भिंद और पारिवारिक एकता कुरु कुरु जैसे मंत्रों के मांगलिक और मुखरित स्वरों से उच्चारण करती हैं तो भक्त भावविभोर होकर इसका लाभ उठाते हैं। शुक्रवार को प्रातः मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के जलाभिषेक के बाद विश्वास श्री माताजी के सान्निध्य में 11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ के जन्म तप कल्याणक पर्व पर और प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के कैवल्य ज्ञान दिवस पर अर्घ्य समर्पित किए गए। प्रातःकालीन प्रवचन श्रृंखला में आज माताजी ने भक्तों को अंजन से निरंजन कथा द्वारा श्रद्धा के महत्व को प्रतिपादित किया। उन्होंने कहा कि णमोकार महामंत्र पर अटूट विश्वास और श्रद्धा से अंजन चोर जिनदत्त भक्त बन मोक्ष पथ प्रशस्त कर सकता है तो हमारे लिए क्या मुश्किल है।

यह समाजजन मौजूद रहे

इस अवसर पर समाजजनों ने दीप प्रज्वलन कर सभा का शुभारंभ किया। राजेंद्र कोठिया ने ईश वंदना कर जिनवाणी स्तुति की। सभा में राजेश शाह, धनपाल सेठ, धनपाल शाह, अजीत कोठिया, अजीत शाह, सूरजमल शाह, वस्तुपाल शाह, केसरीमल भरड़ा, भरत जैन, योगेश शाह, अशोक शाह, मुकेश शाह सहित कई भक्त जन एवं महिला मंडल की बहने उपस्थित थी। आशीर्वाद क्षुल्लिका श्री विकंठश्री माताजी ने दिया सभी का आभार समाज अध्यक्ष राजेश के शाह ने व्यक्त किया।

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