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जैन-धर्म की स्वर गूंज गांधी स्मृति में: डॉ. इन्दु जैन राष्ट्र गौरव ने प्राकृत-अपभ्रंश में श्रुतवंदना कर बापू को किया नमन


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर गांधी स्मृति, नई दिल्ली में हुई सर्वधर्म प्रार्थना में डॉ. इन्दु जैन राष्ट्र गौरव ने जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए प्राकृत-अपभ्रंश भाषा में श्रुतवंदना प्रस्तुत की। – 


नई दिल्ली स्थित गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, तीस जनवरी मार्ग पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 78वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा भावुक और गरिमामयी माहौल में संपन्न हुई। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, गांधी स्मृति के उपाध्यक्ष श्री विजय गोयल सहित देश-विदेश से आए विशिष्ट अतिथियों ने बापू की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

जैन धर्म की प्रभावशाली प्रस्तुति

सर्वधर्म प्रार्थना सभा में जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. इन्दु जैन राष्ट्र गौरव को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। अंगवस्त्र से सम्मानित डॉ. इन्दु जैन ने विश्व शांति की भावना के साथ जैन प्रार्थना प्रस्तुत की, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

श्रुतवंदना से गूंज उठा परिसर

डॉ. इन्दु जैन ने “णमो जिणाणं – जय जिनेन्द्र – जय ऋषभदेव – जय महावीर” से प्रारंभ कर जैन ध्वज का प्रथम पद “आदि ऋषभ के पुत्र भरत का भारत देश महान, ऋषभदेव से महावीर तक करें सुमंगल गान” का सस्वर उच्चारण किया। इसके बाद प्राकृत-अपभ्रंश भाषा में जैन सरस्वती वंदना यानी श्रुतवंदना का मधुर गायन हुआ, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान

उल्लेखनीय है कि डॉ. इन्दु जैन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में विशेषज्ञ सलाहकार सदस्य हैं और भारत की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से जुड़कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैन धर्म की प्रभावना कर रही हैं। उनका यह प्रस्तुतीकरण जैन संस्कृति की गरिमा और गहराई को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति का अभिवादन

पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया के भक्ति संगीत और बच्चों के समूह गान के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन जी ने सभी धर्म प्रतिनिधियों का अभिवादन किया। इस अवसर पर डॉ. इन्दु जैन ने प्रधानमंत्री जी का अभिवादन “णमो जिणाणं, जय जिनेन्द्र” कहकर किया।

सर्वधर्म समभाव की जीवंत तस्वीर

सभा में जैन, बौद्ध, ईसाई, पारसी, बहाई, यहूदी, मुस्लिम, सिख और हिन्दू धर्म के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में बापू को नमन करते हुए विश्व शांति की प्रार्थना की। यह कार्यक्रम दूरदर्शन, आकाशवाणी और विभिन्न समाचार चैनलों के माध्यम से देश-दुनिया के लाखों दर्शकों तक पहुँचा।

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