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भारतीय ज्ञान परम्परा की मूल संवाहक है प्राकृत भाषा : नैनागिरी में प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का हुआ समापन


श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि तहसील बकस्वाहा के सहयोग से 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का समापन हुआ। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर…


बकस्वाहा। जैन तीर्थ नैनागिरि में प्राकृत भाषा के अध्ययन, अध्यापन, शोध तथा जन-जागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य को लेकर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान तथा श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि तहसील बकस्वाहा के सहयोग से 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का समापन हुआ। समारोह के संरक्षक सुरेश जैन आईएएस (अध्यक्ष जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी) एवं न्यायमूर्ति विमला जैन की मुख्य उपस्थिति तथा वरिष्ठ समाजसेवी व अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी शसंतोष जैन घड़ी, संतोष जैन बैटरी सागर के मुख्य आतिथ्य तथा प्रो. रमाकांत पांडे निदेशक, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर की अध्यक्षता में किया गया।

सुरेश जैन आईएएस ने जैन तीर्थ नैनागिरि का परिचय और ऐतिहासिक महत्व बताया तथा इस तीर्थ पर वरदत्तादि ऋषियों के निर्वाण और तीर्थंकर भगवान पारसनाथ स्वामी के समवशरण की पावन पवित्र स्थली, जहां पर अनेक साधु साध्वियों की साधना तप की जानकारी तथा संरक्षण संवर्धन में योगदान प्रदान करने वालों का उल्लेख किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. रमाकांत पांडे ने प्राकृत भाषा को भारतीय ज्ञान-परम्परा की मूल संवाहक बताते हुए कहा कि जैन आगम, दर्शन और साहित्य को समझने में प्राकृत भाषा का विशेष स्थान है। मुख्य अतिथियों ने कार्यशाला के सफल आयोजन की सराहना करते हुए प्रतिभागियों से अर्जित ज्ञान को समाज तक पहुँचाने का आह्वान किया।

इन समाजज्जनों की उपस्थिति रही

कार्यशाला के मीडिया प्रभारी राजेश रागी ने बताया कि इस अवसर पर सुनील देव सागर (क्षेत्र समरसता संयोजक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ), मनोज पांडे (प्रांत मंत्री, संस्कृत भारती, जबलपुर), देश के ख्यातनाम विद्वान प्रतिष्ठाचार्य पं. विनोद जैन रजवास सहित अनेक विद्वान, शिक्षाविद् एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यशाला का समन्वयक डॉ. धर्मेंद्र कुमार जैन ने कार्यशाला के आयोजन में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाई। प्रो. जगतराम भट्टाचार्य कोलकाता, डॉ. प्रभात कुमार दास, डॉ. सतेंद्र कुमार जैन, डॉ. सुमत कुमार जैन उदयपुर, डॉ. कमलेश जैन जयपुर द्वारा कुशल अध्यापन कराया गया। इस कार्यशाला में देश के दस प्रदेशों के प्रतिभागी सम्मिलित रहें। इस मौके पर प्रो. फूलचंद जैन प्रेमी के रिकॉर्डेड प्राकृत वक्तव्य को भी सुनाया गया।

विजेताओं को सम्मानित किया

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी के मंत्री राजेश जैन रागी बकस्वाहा, उपमंत्री अशोक बम्हौरी, प्रबंध समिति मंत्री देवेंद्र लुहारी , संयुक्त मंत्री मोतीलाल सांधेलिया के अलावा विनोद मोदी भोपाल, प्राचार्य सुमतिप्रकाश , सुरेश सिंघई, पत्रकार अनिल जैन बड़कुल, मनीष पडेले आदि महानुभाव की गरिमामय उपस्थिति रही। संचालन डॉ. सोनल जैन (दिल्ली) ने किया। कार्यशाला के अंतर्गत आयोजित प्राकृत प्रज्ञा प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसका आयोजन सुदूर अंचलों तक किया गया।

समापन समारोह में प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा कर विजेताओं को सम्मानित किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संयोजन डॉ आशीष जैन आचार्य (शाहगढ़) द्वारा किया गया। आयोजकों ने इसे प्राकृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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