देवाधिदेव भगवान आदिनाथ स्वामी वर्रो बाले बाबा का निर्वाण महोत्सव एवं 108 रिद्धि मंत्रों के साथ निर्वाण लाडू मुनिसंघ के सानिध्य में शीतलधाम में शनिवार को चढ़ाया गया। विदिशा से पढ़िए, यह खबर…
विदिशा। देवाधिदेव भगवान आदिनाथ स्वामी वर्रो बाले बाबा का निर्वाण महोत्सव एवं 108 रिद्धि मंत्रों के साथ निर्वाण लाडू मुनिसंघ के सानिध्य में शीतलधाम में शनिवार को चढ़ाया गया। सकल दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यक्रम में दूसरे दिन मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज द्वारा लिखित शीतलधाम विधान बाल ब्र.तरुण भैया जी इंदौर एवं नगर गौरव अनूप भैयाजी द्वारा लय संगीत के साथ संपन्न हुआ। प्रातःकाल भगवान शीतलनाथ स्वामी का अभिषेक एवं शांतिमंत्रों के साथ शांतिधारा हुई।धर्मसमा में आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर धर्मसमा की शुरुआत की गई। इस अवसर पर मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ने कहा कि जिस बेदी पर 18 वर्षों से आपके इष्टदेव बर्रो वाले बाबा विराजमान है। उस बेदी पर यह उनका अंतिम अभिषेक है। इसके बाद तो अगला निर्वाण कल्याणक जब आएगा तो वह अपने नए मंदिर में कुंडलपुर में बड़ेबाबा का गगन विहार हुआ था। वैसे ही बर्रो बाले बाबा का गगन विहार आचार्य श्री समयसागर महाराज के शुभ हाथों से हो मुनि श्री ने कहा कि जिनेन्द्र भक्ति में इतनी शक्ति है,जो हमारे पापों को तो धोती ही है साथ ही हमारे अंदर इतनी ऊर्जा प्रदान करती है। हमारी सभी इचछाएं पूरी हो जाएं।
इस प्रांगण में गुरुदेव की यादें बिखरी पड़ी हैं
मुनि श्री ने 2014 की यादों में अपने आपको संजोते हुए कहा कि इस प्रांगण में गुरुदेव की यादें बिखरी पड़ी है। उन यादों को संजोते हुए कहा कि उनका भौतिक शरीर भले ही इस धरा पर नहीं है लेकिन हम सभी के अवचेतन मन में उसी मुद्रा में विराजमान हैं। मुनि श्री ने कहा कि हम सभी के अंतरंग में गुरुदेव प्रत्येक भक्त के हृदय में विराजमान है। आने वाली 27 जनवरी को गुरुदेव का दूसरा समाधि दिवस आने वाला है। उसे हम सभी को धूमधाम से मनाना है।इसलिए सभी के लिये बड़े बाबा का बुलुआ और चल्लुआ है। श्री शीतलविहार न्यास एवं सकल दिगंबर जैन समाज के समस्त पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में समय पर पधारने का अनुरोध किया है।













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