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आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश : मुनि श्री प्रणुत सागर जी ससंघ से हुआ मंगल मिलन 


बड़वानी नगर में शुक्रवार को सुबह जैन धर्म की बड़ी आर्यिकाओं में से एक आचार्यश्री सन्मति सागर जी की शिष्य आर्यिका श्री सृष्टिभूषणमति जी माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। माताजी का राजधानी भोपाल में मंगल चातुर्मास के बाद नेमावर, सिद्धवरकूट, पावागिरी जी ऊन, सिद्ध क्षेत्र की वंदना कर पहली बार इस क्षेत्र में आगमन हुआ है। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर…


धामनोद। बड़वानी नगर में शुक्रवार को सुबह जैन धर्म की बड़ी आर्यिकाओं में से एक आचार्यश्री सन्मति सागर जी की शिष्य आर्यिका श्री सृष्टिभूषणमति जी माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। माताजी का राजधानी भोपाल में मंगल चातुर्मास के बाद नेमावर, सिद्धवरकूट, पावागिरी जी ऊन, सिद्ध क्षेत्र की वंदना कर पहली बार इस क्षेत्र में आगमन हुआ है। माताजी के संघ में कुल तीन आर्यिका माताजी हैं। माताजी सिद्ध क्षेत्र बावनगजा की वंदना करते हुए तीर्थंकर लेणि, सिद्ध क्षेत्र मांगीतुंगी, गजपंथा होते हुए णमोकर तीर्थ पर आगामी माह में होने वाले भव्य पंच कल्याणक में शामिल होंगी। माताजी के मंगल प्रवेश पर समाज के श्रावकों ने आर्यिका संघ के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। माताजी की अगवानी के लिए यहां पूर्व से विराजित मुनि श्री प्रणुत सागर जी के संघस्थ क्षुल्लक विनियोग सागर जी ने भी अगवानी की। जिन मंदिर में आर्यिका संघ ने भगवान के वेदियों के दर्शन कर मुनि श्री प्रणुत सागर जी का भी आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मसभा के पूर्व आर्यिका श्री, मुनि श्री और क्षुल्लक जी महाराज को समाज जन ने शास्त्र भेंट किया। कल्पना काला द्वारा मंगलाचरण किया गया। धर्म सभा में विश्वयश मति जी माता जी ने बहुत ही संक्षिप्त और मधुर आवाज में कविता की पंक्तियां प्रस्तुत की। साथ ही कहा कि आप जो कुछ अच्छा होता है उसका श्रेय खुद लेना चाहते हो और यदि कुछ बुरा होता है तो भगवान को दोष देते हो।

आज परिणाम की विकृति का नाम पाप है

आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी द्वारा छोटे-छोटे मुक्तक और काव्य शैली में धर्मसभा को रोचक बना दिया। माताजी ने बताया कि जिसका प्रभु से वास्ता वही सच्चा नाश्ता है। माताजी ने कहा कि पहले बाप बेटे को सिखाता था पर आज इस पश्चिमी सभ्यता में बेटा बाप को सिखा रहा है। पश्चिम की दौड़ ने सभ्यता तो सिखा दी है लेकिन, संस्कृति और संस्कार बिगाड़ दिए है। आज परिणाम की विकृति का नाम पाप है। आप आज धर्म के नाम पर लड़ रहे हो यदि धर्म के लिए लड़ते तो भगवान बन गए होते। परमेष्ठि बन गए होते, आप के कही भी किए गए पाप मंदिर ने प्रक्षालित होते है ,लेकिन मंदिर में किए गए पाप कही भी प्रक्षालित नहीं होते हैं।

गौशाला के लिए भी चारे आदि की व्यवस्था में सहयोगी 

माताजी ने काव्यात्मक अंदाज में बहुत अच्छी ज्ञान वर्धक और जीवन को सुधारने वाली बातें बताईं। माताजी ने कहा कि आज हर मां राम जैसा बेटा चाहती है और टीवी पर चरित्रहीन के चरित्र देख रही है तो राम जैसे पुत्र कैसे होंगे। पाश्चात्य की हवा ने हमंे हिला दिया है। माताजी के द्वारा महावीर जी तीर्थ पर और शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर पर साधु संतों और त्यागी वृत्तियों के आहार की व्यवस्था करवा रखी है। साथ ही गौशाला के लिए भी चारे आदि की व्यवस्था में सहयोगी है।

क्षुल्ल्क श्री विनियोग सागर जी के मंगल अवतरण दिवस पर शास्त्र भेंट 

मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि आज से मंदिर का कार्य प्रारंभ हो रहा है और माताजी का उसके ठीक पहले आगमन हुआ। ये शुभ मंगल का प्रतीक है। भरा हुआ कलश, गाय का बछड़े को दूध पिलाने का ये मंगल शुभ संकेत होते हैं और ऐसे में मां का आगमन बहुत ही शुभ संकेत हैं। महाराज ने बताया कि आप जिस भी व्यक्ति को जिस प्रकार से देखोगे, उसी प्रकार से दिखेगा। क्षुल्ल्क श्री विनियोग सागर जी के मंगल अवतरण दिवस पर आर्यिका संघ और प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगल आशीर्वाद प्रदान कर शास्त्र भेंट किया। मुनिश्री प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि जब पुण्य का जलवा चलता है तब पाप का दिल जलता है।

माताजी का मंगल विहार 

इस अवसर पर जैन समाज के महिला, पुरुष, युवा बच्चे उपस्थित थे। प्रवचन पश्चात मुनि संघ आर्यिका संघ की आहारचर्या हुई और दोपहर को माताजी का मंगल विहार सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी के लिए हुआ। शाम को क्षुल्लक श्री विनियोग सागर जी के पाद प्रक्षालन और प्रवचन हुए।

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