फरवरी 2026 में महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित श्री णमोकार तीर्थ एक ऐसे आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है, जो न केवल जैन समाज के लिए बल्कि समग्र वैश्विक मानवता के नैतिक और आत्मिक जीवन के लिए भी विशेष महत्व रखता है। नासिक से पढ़िए, पवन घुवारा की यह रिपोर्ट…
नासिक। फरवरी 2026 में महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित श्री णमोकार तीर्थ एक ऐसे आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है, जो न केवल जैन समाज के लिए बल्कि समग्र वैश्विक मानवता के नैतिक और आत्मिक जीवन के लिए भी विशेष महत्व रखता है। पावन पवित्र भूमि जो ऐतिहासिक दो सिद्ध क्षेत्रों की पर्वतीय श्रृंखला के मध्य पौराणिक मान्यता अनुसार इस क्षेत्र को रामटेकड़ी भी कहते हैं। जहां से प्रभु श्रीराम जी ने भी विचरण किया था। जहां अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक महा महोत्सव एवं महा मस्तकाभिषेक महोत्सव का भव्य आयोजन आचार्य श्री कुन्थुसागर जी महाराज के सानिध्य में होगा। विशेष आशीर्वाद आचार्य श्री देवनंदी जी महाराज का मिलेगा।
विश्व में एकमात्र णमोकार मंत्र पर आधारित समवशरण
बुंदेलखंड वसुन्धरा की शाहगढ़ नगरी में जन्मे गुरुवर की सामाजिक और धार्मिक उत्थान के लिए तीर्थ के विकास की परिकल्पना, विश्व में एकमात्र बोलता हुआ णमोकार मंत्र पर आधारित समवशरण 5.5 एकड़ में फैला, 108 फ़ीट सबसे ऊँचा सफेद संगमरमर से निर्मित 32 फ़ीट ऊँची चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा, त्रिकाल चौबीसी, 24 जिनालय, नवदेवता, नंदीश्वर द्वीप, पंचमेरु, 24 स्वरूपों वाली पद्मावती माता की प्रतिमाएं,51 फ़ीट अरिहंत और 31 फ़ीट की शेष पंचपरमेष्ठी प्रतिमाएं- विश्व में प्रथम बार,नौका विहार व मिनी ट्रेन से दर्शन सुविधा,णमोकार आराधना केंद्र, डिजिटल प्रभावना केंद्र, गुरुमंदिर, प्राचीन तीर्थंकर प्रतिमाएं व ग्रंथालय,111 फीट ऊंचे स्तंभ का ध्वजदंड, संत भवन, धर्मशालाएं सामाजिक उपक्रम अचंभित अल्पसमय में साकार जो हो गई हैं।
इन साधु संतों की मौजूदगी में होगा कार्यक्रम
यस्य वाणी में शांति, दृष्टि में करुणाऔर चाल में मोक्षमार्ग हो वो हैं आचार्य श्री देवनंदी जी। ज्ञानं यः प्रकाशयति स एव गुरु: जिन्होंने केवल उपदेश नहीं, जीवन जीने की राह दिखाई,अतिशय युक्त स्थली भी है, जहां नाग-नागिन युगल जोडी ने ऋषि पंचमी जैसे पावन दिवस पर पूज्य गुरुदेव के मंगल दर्शन और समीप आकर के मांगलिक क्रीडा करीब 35 मिनट तक करते हुए गुरुदेव से णमोकार महामंत्र सुनते हुए आशीर्वाद भी लिया। यह सब प्रत्यक्ष संघस्त सैकडों लोगों ने दर्शन किए।
विहार से विचार तक, हर क्षण दिव्य है मुनि अमोघकिर्ती जी,एवं मुनि अमरकीर्ति जी युगल मुनिराज का कुशल निर्देशन और वहीं चारों दिशाओं से चार सौ से अधिक आचार्य श्री पद्मनंदीजी महाराज ससंघ,आचार्य श्री सिद्धांतसागरजी महाराज ससंघ,आचार्यश्री सुविधिसागरजी महाराज ससंघ, आचार्य श्री गुणधरनंदी जी महाराज ससंघ, आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी महाराज ससंघ, आचार्य श्री पुष्पदंतसागरजी महाराज ससंघ,आचार्य श्री कुमुदनंदी जी महाराज, आचार्य श्री विनम्रसागरजी महाराज ससंघ,आचार्य श्री तीर्थनंदी जी महाराज ससंघ,आचार्य श्री गुलाबभूषण जी महाराज ससंघ,आचार्य श्री श्रुतधरनंदीजी महाराज ससंघ,आचार्य श्री गुणभद्रनंदी जी मुनिराज ससंघ,आचार्य श्री सूर्यसागर जी महाराज ससंघ,आचार्य श्री प्रसन्नऋषि जी महाराज ससंघ,आचार्य श्री डॉ. प्रणाम सागर जी, आचार्य श्री सुयशगुप्तीजी महाराज ससंघ, आचार्य श्री दयाऋषी जी महाराज,आचार्य श्री विद्यानंदी जी महाराज ससंघ, उपाध्यायश्री विरंजनसागर जी,उपाध्याय श्री विभंजनसागर जी महाराज, मुनि श्री पावन कीर्ति जी ,मुनि श्री जयकीर्तिजी ,मुनि श्री सकलकीर्ति जी ,मुनि श्री शुभमकीर्तिजी, मुनि श्रीआर्शकीर्ति जी ,मुनि श्रीसिद्ध कीर्ति जी, मुनि श्री शांतिकीर्तिजी, मुनिश्रीअध्यात्मकीर्तिजी, मुनि श्री महिमासागर जी ,मुनि श्री अर्चितसागर जी ससंघ,क्षुल्लक श्रीसमर्पण सागर जी , क्षुल्लक श्री ध्यानसागर जी,आर्यिका श्री कांतीश्री माताजी ससंघ, आर्यिका श्री प्रज्ञाश्री माताजी, आर्यिका श्री सौभाग्यमती माताजी ससंघ, आर्यिका श्री श्रष्टीभूषण माताजी ससंघ,आर्यिका सुयोगमति माताजी ससंघ, आर्यिका विमल प्रभा जी माताजी, आर्यिका जिनदेवी माताजी, आर्यिका क्षमश्री माता जी, आर्यिका चिन्मयश्री माताजी,आर्यिका विशाखा श्री माताजी,आर्यिका प्रज्ञाश्री माताजी, आर्यिका स्वस्तिश्री माता जी, सुज्ञान श्री माता जी ,ससंघ श्रमण, पूज्य आचार्यों और मुनिराजों के पावन सान्निध्य में ,बा.ब्र. वैशाली दीदी द्बारा वृहद प्रस्तावना के साथ तीर्थंकर भगवान के जन्म, दीक्षा,तप केवलज्ञान और निर्वाण जैसे जीवन-कल्याणकारी प्रसंग विधिपूर्वक होंगे। श्रमण संघीय साधु-संतों का सान्निध्य समाज के लिए नैतिक प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
इनके सहयोग से होगा आयोजन
ट्रस्ट के अध्यक्षप्रतिष्ठा महोत्सव संयोजक नीलम अजमेरा ने वृहद प्रोजेक्ट तैयार किया। जहां संतोष पैंढारी नागपुर की अध्यक्षता, कमल ठोलियां महामंत्री, दिनेश सेठी कोषाध्यक्ष,सभी गुरुभक्त के साथ इस पूरे कालखंड में सैकड़ों श्रमण संघीय साधु-संतों का सान्निध्य समाज के लिए नैतिक प्रेरणा का स्रोत बनेगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पंचकल्याणक महामहोत्सव 6 से 13 फरवरी एवं महामस्तकाभिषेक 25 फरवरी तक होगा।
इस तरह पहुंचा जा सकता है
णमोकार तीर्थ,मुंबई-आगरा हाईवे नंबर 3, तालुका- चाँदवड़, नासिक. मोहाड़ी (मालसाने), तहसील चांदवड़, जिला नाशिक, महाराष्ट्र रेल मार्ग नाशिक रोड स्टेशन 45 किमी, मनमाड 35 किमी वायु मार्ग ओझर एयरपोर्ट 60 किमी मनमाड़, शिरडी और त्र्यंबकेश्वर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के समीप स्थित यह तीर्थ आत्मशुद्धि और अंतर्मुखी साधना का एक प्रभावशाली केंद्र बन चुका है। जहां यह महामहोत्सव भी होने जा रहा है। आइए आत्मीय इस अद्वितीय आध्यात्मिक अवसरों पर स्वागत है, ज़िंदगी सँवारने को तो ज़िंदगी पड़ी है ,चलो वो लम्हा सँवार लेते है,जहाँ ज़िंदगी खड़ी है, जुड़ना बड़ी बात नही,जुड़े रहना बड़ी बात है।













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