बड़वानी स्थित खंडेलावाल दिगंबर जैन मंदिर में विराजित मूल नायक भगवान नेमीनाथ जी का आज कमलासन पर विराजमान करने के लिए निष्ठापन क्रिया हुई। मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज के सानिध्य में पूर्ण विधि विधान हुए। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर…
धामनोद। बड़वानी स्थित खंडेलावाल दिगंबर जैन मंदिर में विराजित मूल नायक भगवान नेमीनाथ जी का आज कमलासन पर विराजमान करने के लिए निष्ठापन क्रिया पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज जी के आशीर्वाद से बड़वानी में विराजित मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज के सानिध्य में पूर्ण विधि विधान और भक्ति भाव से पंडित नितिन झांझरी इंदौर नगर पुरोहित के निर्देशन में संपन्न हुआ। प्रातः भगवान नेमीनाथ की अभिषेक के साथ शांतिधारा संपन्न हुई। उसके उपरांत उपरोक्त कार्यक्रम के लिए मंगल के सूचक ध्वजारोहण समाज के श्रेष्ठी परिवार द्वारा संपन्न हुआ।
भगवान को समवशरण पर विराजमान किया
सौधर्म, महेंद्र, ईशान आदि इंद्र इंद्राणी ने भक्ति भाव, श्रद्धा,और विवेक से शांति नाथ मंडल विधान, याग मण्डल विधान किया। इस अवसर पर मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज द्वारा भगवान को मंडल जी के समवशरण पर विराजमान किया। मंडल जी पर समाज के श्रावक श्राविका द्वारा श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए साथ ही मांगलिक क्रियाओं के साथ साथ विराजित सारे भगवान को मूल वेदी से अन्य वेदियों में विराजित किया गया। श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा प्राचीन वेदी से भगवान का उत्थापन कर अस्थाई वेदी पर शांतिधारा अभिषेक के साथ विराजित किए गए। जिनको भगवान के गर्भ गृह के जीर्णोद्धार, और नए कमलासन पर शीघ्र ही विराजित किया जाएगा,इस अवसर पर समाज के महिला पुरूषों ने संकल्प स्वरूप वस्तुओं के त्याग का नियम भी लिया।विधान के पश्चात हवन संपन्न हुआ जिसमें समाज के महिला पुरुष और इंद्र इंद्राणी ने आहुतियां दी।
14 फरवरी को 100 वर्ष लग जाएंगे
यहां ये उल्लेखनीय है कि इस मंदिर को स्थापित हुए 99 वर्ष हो चुके हैं और 14 फरवरी को 100 वर्ष लग जाएंगे। इस 99 साल में भगवान पहली बार अपने मूल स्थान से हट कर उच्च कमलासन पर विराजित होंगे। इस अवसर पर मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने बताया कि हमारा परम सौभाग्य है कि भगवान ने हमें इस कार्य के लिए चुन लिया। ये हम कुछ नहीं कर रहे ये सब जो करवा रहे है भगवान ही करवा रहे है, मुनि श्री ने कहा कि हम यह भावना रखते है कि सभी सुखी रहे सबके जीवन में सुख,शांति,समृद्धि और धर्म की वृद्धि हो ,निरोगी रहे प्रेम सौहार्द्र बना रहे। इसलिए उच्च आसान पर बैठा रहे है। ठीक मुहूर्त में भगवान को नए अस्थाई वेदी पर विराजित होते ही पूरा मंदिर भगवान के और मुनिश्री के जय जय कार से गूंज उठा।













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