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आचार्य श्री वर्धमानसागरजी के साथ 33 साधु निवाई में विराजित: निवाई नगर का जागा सौभाग्य शीतलकालीन हो रहा प्रवास 


आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का 3 वर्षों के बाद निवाई में प्रवास 33 साधुओं के साथ चल रहा है। 33 संयमी महात्माओं में सभी उम्र के साधु विद्यमान हैं। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह संकलित रिपोर्ट…


निवाई। आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का 3 वर्षों के बाद निवाई में प्रवास 33 साधुओं के साथ चल रहा है। 33 संयमी महात्माओं में सभी उम्र के साधु विद्यमान हैं। जहां न्यूनतम आयु 29 वर्षीय आर्यिका श्री पद्मयश मति एवं आर्यिका श्री दिव्ययश मति माताजी की है। वहीं मुनि श्री चिंतन सागर जी 39 वर्षीय युवा मुनि हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 76 वर्षीय होकर संयमी जीवन के 57 वर्ष और आचार्य पद पर 36 वर्ष हो गए हैं। मुनियों में मुनि श्री प्रभव सागर जी 81 वर्षीय हैं। वहीं आर्यिका श्री शीतलमति जी 81 वर्षीय होकर दीक्षा काल 53 वर्ष का हो गया है। वह भी क्रमश संलेखना की ओर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के निर्देशन में अग्रसर हैं। एकांतर कभी दो उपवास के बाद मात्र तरल सीमित पेय सामग्री ले रही हैं। संलेखना रत साधु की सेवा दर्शन तीर्थयात्रा समकक्ष हैं।

1.आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, जन्म सनावद 18 सितंबर 1950, दीक्षा तिथि 24 फरवरी 1969 आचार्य पद 24 जून 1990। लौकिक शिक्षा बीए। क्रमांक 11,12,13 तथा क्रमांक 25 छोड़कर शेष सभी साधु आप से दीक्षित हैं।

2.मुनि श्री हितेंद्रसागर जी जन्म बोली जयपुर, जन्म 7 फरवरी 1977 मुनि दीक्षा 9 अक्टूबर 2008 एम कॉम। आपके पिता भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री भुवनसागर जी हैं।

3.मुनि श्री प्रभवसागर जी जयपुर जन्म 19 फरवरी 1944 हायर सेकेंडरी 81 वर्ष में संयमी जीवन 10 वर्ष। भाई भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री सहिष्णु सागर जी थे।

4.मुनि श्री चिंतनसागर जी मुंबई जन्म 4 जून 1986 मुनि दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा एम काम सीए फाउंडेशन 39 वर्ष में संयमी जीवन 9 वर्ष।

5.मुनिश्री दर्शितसागर जी बड़वाह उच जन्म 4 जुलाई 1955 शिक्षा हाय स्कूल, 70 वर्ष में संयमी जीवन 9 वर्ष। पत्नी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री दर्शनामति हैं

6.मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी उदयपुर जन्म 20 नवंबर 1954 शिक्षा बीकॉम, 71 वर्षीय में 3 वर्ष संयमी जीवन पत्नी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री प्रणतमति हैं

7.मुनि श्री मुमुक्षुसागर जी धरियावद प्रतापगढ़ जन्म 5 मई 1955 मुनि दीक्षा 13 फरवरी 2023 शिक्षा हायर सेकेंडरी ,70 वर्षीय में 2 वर्ष संयमी जीवन

8.मुनि श्री प्रणीत सागर मुंबई जन्म 8 अक्टूबर 1953 मुनि दीक्षा 6 सितंबर 2024 शिक्षा इंजीनियर, 72 वर्षीय में 1 वर्ष का संयमी जीवन। माता भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री मूर्ति मति थी।

9. मुनिश्री ध्येय सागर जी मेड़ता सिटी जन्म 13 सितंबर 1863 मुनि दीक्षा 20 अप्रैल 2025, एक वर्ष का संयमी जीवन।माता ने भी दीक्षा ली थी शिक्षा स्नातक।

10. मुनि श्री भुवन सागर जी जयपुर जन्म 15 अगस्त 1950 मुनि दीक्षा 20 अप्रैल 2025 शिक्षा बीकॉम एक वर्ष का संयमी जीवन। पुत्र भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री हितेंद्र सागर जी हैं ।

11.आर्यिका श्री शुभमति जी खुरई का जन्म सन 1948 में हुआआचार्य श्री धर्म सागर जी से आर्यिका दीक्षा 5 नवंबर 1971 को हुई। शिक्षा 9 वी है।

12.आर्यिका श्री शीतलमती जी जन्म गामड़ी राजस्थान जन्म वर्ष 1943 दीक्षा आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी से सन 1972 िशक्षा 4थी।

13. आर्यिका श्री चैत्यमती जी जन्म केजड़ राजस्थान सन 1953 दीक्षा गुरु आचार्य श्री अजीतसागर जी से सन 1988 शिक्षा 5 वीं

14. आर्यिका श्री विलोकमति जी सलूंबर जन्म 31 जनवरी 1961 आर्यिका दीक्षा 15 फरवरी 1997 शिक्षा 5 वीं

15आर्यिका श्री दिव्यांशुमति जी बांसवाड़ा जन्म 5 मई 1947 आर्यिका दीक्षा 18 नवंबर 2010 शिक्षा बी ए पॉलिटेक्निक साइंस

माता-पिता भी साधु

16. निवाई गौरव आर्यिका श्री पूर्णिमामति जी, निवाई जन्म 17 अक्टूबर 1978 आर्यिका दीक्षा 1 फरवरी 2013 शिक्षा हायर सेकेंडरी।

17. आर्यिका श्री मुदितमति जी पारसोला उदयपुर जन्म सन 1938 आर्यिका दीक्षा 20 फरवरी 2015 शिक्षा 5 वीं

18. आ श्री विचक्षणमति जी जोबनेर जन्म 29 नवंबर 1963 आर्यिका दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा मेट्रिक विशेष पति माता ओर सास ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा ली।

19आर्यिका श्री समर्पितमति जी उदयपुर जन्म 23 मार्च 1963 आर्यिका दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा बीए। विशेष माता ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा ली थी।

20. आर्यिका श्री निर्मुक्तमति जी किशनगढ़ जन्म 15 अगस्त 1958 दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा 11 वीं।

21. आर्यिका श्री विनम्रमति जी महाराष्ट्र जन्म 1966 दीक्षा 27 नवंबर 2015 निवाई में शिक्षा चौथी। पति भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर जी बने

22. आर्यिका श्री दर्शनामति जी बड़़वाह 22 नवंबर 1962 दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा बीए पति भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री दर्शित सागर जी हैं

23. आर्यिका श्री देशनामति जी सनावद 14 मार्च 1959 दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा बीए विशेष भारतीय स्टेट बैक के मैनेजर से त्यागपत्र देकर दीक्षा ली। स्वयं के अर्जित 60 लाख से अधिक धन राशि से शांतिसागर वर्धमान देशना निलय 3 मंजिला का संत उपयोग हेतु निर्माण कराया।

24. आर्यिका श्री महायशमति जी सनावद 3 जनवरी 1989 दीक्षा 25 अप्रैल 2018 शिक्षा एमएससी कंप्यूटर साइंस विशेष दादाजी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी थे।

25.आर्यिका श्री देवर्धिमति जी अकलुज महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर 1983 को जन्म दीक्षा गुरु आर्यिका श्री प्रशांत मति से दीक्षा 8 मार्च 2019 को ली शिक्षा बीकॉम

26. आर्यिका श्री प्रणत मति जी उदयपुर सन 1961 आर्यिका दीक्षा 29 अगस्त 2022 शिक्षा स्नातक विशेष पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी हैं

27.आर्यिका श्री निर्माेहमति जी सनावद महेश्वर 4 जुलाई 1962 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022 शिक्षा हायर सेकेंडरी विशेष पिता ने आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी थे।

28. आर्यिका श्री पद्मयश मति जी सनावद 12 सितंबर 1996 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022

शिक्षा बीबीए किया।

29. आर्यिका श्री दिव्ययश मतिजी कोटा 3 मई 1996 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022 शिक्षा पॉलिटेक्निक।

30. आर्यिका श्री जिनेश मति गोहाटी असम जन्म 9 अक्टूबर 1945 दीक्षा 5 सितंबर 2024 शिक्षा 8वीं।

31. आर्यिका श्री प्रेक्षा मति जी धरियावद 20 दिसंबर 1955 दीक्षा 6 सितंबर 2024 शिक्षा 8वीं

विशेष पति भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री पद्म कीर्ति सागर थे।

32. ऐलक श्री हर्षसागर ,धरियावद जन्म 7 जुलाई 1949 दीक्षा 4 मार्च 2025 शिक्षा 10वीं। पिता भी साधु थे।

33. क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर का जन्म महाराष्ट्र 1 जून 1956 में हुआ। दीक्षा आचार्य श्री से 6 सितंबर 2024 को हुई। शिक्षा 10वीं तक। पत्नी और भाई भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री परमानंद सागर जी एवं आर्यिका श्री विन्रम मति माताजी है।

साधु जीवन में अनूठा परिवारवाद वंदनीय 

जिस प्रकार राजनीति में भाई भतीजावाद परिवारवाद होता है। संघ में भी परिवारवाद हुआ किंतु वह परिवारवाद अनुठा अध्यात्म की दृष्टि से हुआ। यहां किसी साधु की माता ने दीक्षा ली। किसी के भाई ने दीक्षा ली। किसी के दादाजी ने। बुआजी, किसी की पत्नी ने दीक्षा। किसी की बहन ने दीक्षा ली। ऐसा परिवारवाद के अनेक साधु संघस्थ है, जो अन्य को भी प्रेरणा देते है। समाधिस्थ मुनि श्री चारित्रसागर जी की दीक्षा के बाद उनकी पोती आर्यिका श्री महायश मति और बेटी आर्यिका श्री निर्माेह मति बनी। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने पहले दीक्षा ली। बाद में पिता भी मुनि श्री भुवन सागर जी बने। मुनि श्री प्रभव सागर जी के पूर्व उनके भाई भी मुनि श्री सहिष्णु सागर जी ने भी एक साथ दीक्षा ली । मुनि श्री दर्शित सागर जी ओर आर्यिका श्री दर्शना मति पूर्व पति पत्नी ने एक साथ दीक्षा ली।मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी ओर आर्यिका श्री प्रणत मति पूर्व पति पत्नी ने भी एक साथ दीक्षा ली। मुनि श्री प्रणित सागर जी की पूर्व माता ने भी आचार्य श्री से दीक्षा ली।उनकी बहन भी आर्यिका थी। आर्यिका श्री दिव्यांशु मति के पूर्व माता पिता भी साधु थे। आर्यिका श्री समर्पित मति की माता ने भी दीक्षा ली थी। आर्यिका श्री विचक्षण मति की माता, सास और पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा ली थी। आर्यिका श्री विन्रम मति के पति ने भी क्षुल्लक दीक्षा लेकर श्री प्राप्ति सागर जी बने। आर्यिका श्री महायश मति जी के दादाजी भी मुनि थे।आर्यिका श्री निर्माेह मति जी के पिता भी साधु थे आर्यिका श्री प्रेक्षा मति जी के पति ने भी दीक्षा ली थी। क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर जी के भाई भी मुनि श्री परमानंद सागर जी थे। पत्नी भी आर्यिका हैं।

यह जानकारी वर्तमान 33 साधुओं के साधु परिजनों की हैं। समाधिस्थ शिष्य साधुओं की जानकारी नहीं दी। उन शिष्यों में भी भाई-भाई पति-पत्नी और साधु के पिता माता ओर पुत्र ने भी दीक्षा ली। पंचोलिया के परिवार में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित श्री चारित्र सागर जी, आर्यिका श्री महायश मति ओर ,आर्यिका श्री निर्माेह मति जी सहित पंचोलिया परिवार के 7 साधु रहे।

आचार्य श्री और निवाई 

सन 1969 में मुनि पद पर 19 वर्ष की आयु में दीक्षित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी दीक्षा गुरु श्री धर्म सागर जी के साथ सन 1969 में निवाई आए एक माह का प्रवास रहा। सन 1979 में शिक्षा गुरु आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी के साथ चातुर्मास किया। सन 2000 में निवाई आए। वर्ष 2015 में चातुर्मास निवाई में किया। वर्ष 2015 में निवाई में आर्यिका श्री विन्रम मति जी को आर्यिका दीक्षा दी। वर्ष 2018 में भी निवाई आए। वर्ष 2022 में दिसंबर माह में आए शिष्य मुनि श्री मर्यादा सागर जी की समाधि निवाई में आपके सानिध्य में हुई। वर्ष 2025 का चातुर्मास निवाई होना था पर पुण्य टोंक का प्रबल रहा। अब वर्ष 2025 के दिसंबर माह में प्रवेश होकर शीत कालीन प्रवास का लाभ मिल रहा है।

निवाई नगर से प्राप्त जानकारी अनुसार पुण्यशाली नगर गौरव साधुगण

1. समाधिस्थ मुनि श्री विनम्र नंदी, 2. आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी, 3. आर्यिका श्री गंभीर मति जी, 4. आर्यिका श्री जय श्री माताजी 5. आर्यिका श्री ज्ञापनश्री माताजी,

6 आर्यिका श्री ज्ञापक श्री माताजी, 7 आर्यिका श्री भक्ति भारती माताजी, 8.क्षुल्लक श्री शुभसागर जी, 9 क्षुल्लिका श्री शुद्ध कुंदन मति।

 निवाई में हुई समाधि की सूची

1. मुनि श्री विनम्र नंदी जी, 2. मुनि श्री मर्यादा सागर जी, 3. आर्यिका श्री आदिमति जी

4. आर्यिका श्री सुवर्ण भद्र मति जी, 5. आर्यिका श्री विमल मति जी, 6. क्षुल्लक श्री अमर नंदी जी

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