नववर्ष के आगमन आदिनाथ धाम सुभाष गंज मैदान में 1008 दीपों से जगमगाए आदिनाथ धाम में भगवान की महाआरती के साथ श्री भक्तामर महा मंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ किया गया। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर…
अशोक नगर। नववर्ष के आगमन आदिनाथ धाम सुभाष गंज मैदान में 1008 दीपों से जगमगाए आदिनाथ धाम में भगवान की महाआरती के साथ श्री भक्तामर महा मंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ किया गया। श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में बड़ी संख्या में भक्तों ने भगवान की महाआराधना कर अपने आने वाले कल और जगत की सुख शांति समृद्धि के लिए नववर्ष पर भगवान की 1008 दीपों से महाआरती की।अशोक नगर जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि प्रातः काल की बेला में भगवान श्री आदिनाथ स्वामी का महा मस्तिष्काभिषेक और कल्याण की कामना के लिए महा शांतिधारा की गई। साथ ही अतिशय क्षेत्र दर्शनोंदय तीर्थ थूवोनजी में दर्शनोदय तीर्थ के खड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी का महा मस्तिष्काभिषेक एवं शांतिधारा की गई।
इन समाजजनों ने आशीर्वाद प्राप्त किया
जिले की सीमा पर स्थित अतिशय क्षेत्र तीर्थोदय तीर्थ गोला कोट में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करने अंचल से हजारों भक्तों का समूह पहुंचा। इस दौरान अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, शालू, भारत नीरज बड़कु, सौरव बांझल, सुनील मामा, विवेक अमरोद, नीरज इंटीरियर, रिक्कू मिर्ची, मनीष महू, राहुल सिंघई सहितअन्य सैकड़ों भक्तों ने मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया
जब मेरे दुःख के दिन आए तो तेरे चरण मेरे पास हो
मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों ने आज के दिन को नया वर्ष मान लिया तो आज एक आशीर्वाद देते हैं। आपको कभी मांगना ना पड़े। भेंट को कोई इंकार नहीं कर सकता। भेंट इतनी मिल जाए कि आपकी हर ख़ुशी पूरी हो जाए। हर व्यक्ति की ख्वाहिश रहती है कि वह जीवन में आगे बढ़े और अपने जीवन का विकास करता रहे। करना भी चाहिए इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है। इसके लिए सही दिशा में काम होना चाहिए जव जव भी मेरे दुःख के दिन आए तो प्रभु तेरे चरण मेरे पास होने चाहिए बस इतना ही करना मुझे तेरे चरण मिलते रहे।
सिद्ध किसे कहें जोआत्मा की शक्ति को जागृत करे
इस दौरान धर्मसभा में मुनि श्री ने कहा कि परम पवित्र सकल मंगल रूप चैतन्यमयी आत्मा का लक्ष्य अपने स्वरूप की प्राप्ति है। सारी सृष्टि हमारे लिए है। सिद्ध किसे कहें जो हमारे आत्मा की शक्ति को जागृत करे। हमारे अंदर स्वतः अतिशय को प्रकट करे। बिना निमित्त के स्वत: अतिशय को प्रकट करे। अनाधिकाल से हम निमित्त की ऐसी कठपुतली बन गए कि हमारे लिए विना निमित्त के कुछ हो ही नहीं रहा। वर्तमान में बहुत सारे लोग अच्छा करते हैं। अच्छा बौलते है। अच्छा सोचते हो तो अच्छा क्यों नहीं हो रहा। मन में अच्छी बात आ रही है फिर भी बुरा हो रहा है। तुम अपने मन से भटके हो।
तुम्हारा सगा वही है जो सदा भला सोचे
आपके मन में ऐसी ऐसी बातें आती है कि मन घबरा जाता है। दिन में तो जैसे-तैसे निकल लेते हैं। रात में सपने में बोल पड़ते हैं। आंख तो हमारे है वो ही नहीं देख रही जो हम मुंह से बोलना चाहता है। वह नहीं बोल पा रहे। तुम्हारा सगा वही है जो तुम्हारे लिए सदा भला सोचता है। तुम्हारे अहित में कभी नहीं सोचेगा तुम कितनी भी गलती कर दो। फिर भी तुम्हारे लिए हितकारी हो हम कैसे भी हो फिर भी वह व्यक्ति मेरा अहित नहीं कर सकता तो भी वह हमारे संबंध में अच्छा ही सोचेगा हित ही चाहेगा।













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