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आचार्य श्री विनम्र सागर जी का मनाया 16 वां आचार्य पदारोहण दिवस : 84 फिट उत्तुंग भगवान के चरणों में की शांति सहस्त्रधारा


बड़वानी के निकट स्थित दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र श्री बावनगजा पर गणाचार्य विराग सागर जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज का आज 16 वां आचार्य पदारोहण कार्यक्रम मनाया गया। आज प्रातः हजारों गुरु भक्तों के साथ आचार्य संघ भगवान आदिनाथ के चरणों में पहुंचा। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर…


धामनोद। बड़वानी के निकट स्थित दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र श्री बावनगजा पर गणाचार्य विराग सागर जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज का आज 16 वां आचार्य पदारोहण कार्यक्रम मनाया गया। आज प्रातः हजारों गुरु भक्तों के साथ आचार्य संघ भगवान आदिनाथ के चरणों में पहुंचा। जहां 84 फिट की प्रतिमा के चरणाभिषेक और सहस्त्र शांतिधारा आचार्य श्री के मुखारविंद और मंत्रोच्चार के बीच हुई। सारी मांगलिक क्रियाएं ब्रह्मचारी सुरेश मलैया और मौसम शास्त्री ने कराई। आज की शांतिधारा और प्रथम अभिषेक का सौभाग्य शलभ सरिता इंदौर को प्राप्त हुआ। तलहटी में आचार्य श्री संघ की आहार चर्या सामायिक संपन्न हुई। दोपहर के सत्र में आचार्य संघ को बावनगजा ट्रस्ट कमेटी ने श्रीफल भेंटकर मंचासीन किया गया। बाहर से आए अतिथियों, बावनगजा ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन कर भगवान आदिनाथ और आचार्य श्री विराग सागर जी के चित्र का अनावरण किया। साथ ही मंगलाचरण हरसुख छात्रावास के छोटे छोटे बच्चे गौरव और कार्तिक जेन ने किया। रिद्धि जैन द्वारा गुरु वंदना नृत्य प्रस्तुत किया गया। गुरु भक्तों ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन धर्मेंद्र जैन विजय नगर और अन्य भक्तों ने कर शास्त्र भेंट किए। क्षुल्लिका प्रभा श्री माताजी का भी आज दीक्षा दिवस है। उन्होंने भी आचार्य श्री को शास्त्र भेंट किया और अशोक कुमार सतना वालों ने भी शास्त्र भेंट किए। बावनगजा ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष विनोद दोशी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और बाहर से आए अतिथियों का ट्रस्ट कमेटी ने और चातुर्मास कमेटी ने सम्मान पगड़ी, अंगवस्त्र, मोतियों की माला और तिलक लगा कर किया। चातुर्मास कमेटी ने बावनगजा ट्रस्ट कमेटी का भी सम्मान किया। बाहर से आए गुरु भक्तों ने श्रीफल चढ़ाकर चतुर्विध संघ का आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य श्री का पूजन माताजी एवं संघस्थ दीदियों के मुखारविंद और इंदौर से संगीतकार अनुभव जैन के सुमधुर भजन और स्वर लहरियों के बीच हुई। चातुर्मास कमेटी विजय नगर इंदौर द्वारा ताम्रपत्र पर रचित शास्त्र उच्चारणाचार्य चरित्र का भी विमोचन किया गया।

साक्षात देखने पर आनंद और आश्चर्य की अनुभूति होगी

आचार्य श्री ने धर्मसभा में कहा कि व्यक्ति को आश्चर्य ही सम्यक दर्शन प्राप्त करा सकता है। जिस दिन हमे आश्चर्य होता है हम उत्साह और उमंग से भर जाते है वैसे ही हमने बावनगजा जी के दर्शन अभी तक फोटो, वीडियो मेंमोबाइल पर देखा करते थे किंतु, कल जब हमने साक्षात दर्शन किए आनंद आ गया और आश्चर्य से भर गए कि इतनी विशाल प्रतिमा का निर्माण इतनी सुंदरता से किया गया है। आप कोई भी चीज टीवी,वीडियो ,फोटो में देखो आपको आनंद नहीं आता। साक्षात देखने पर अत्यंत आनंद और आश्चर्य की अनुभूति होगी। जब पहली बार जब कोई चीज देखते है तो जो आनंद की अनुभूति होती है वो अलग ही होती है। हमने और हमारे संघ के साधुओं ने भी पहली बार इस सिद्ध भूमि के दर्शन किए ,दर्शन कर मन अति आनंदित हुआ और सारी थकान दूर हो गई और इस सिद्ध भूमि पर सभी श्रावकों को कोई ना कोई विधान अवश्य करना चाहिए। यहां की सकारात्मकता अलग ही अनुभव करने वाली है।

भविष्य में परंपरा का सही तरीके से निर्वहन करेगा

आचार्य श्री ने बताया कि इस सृष्टि में सबसे ज्यादा उपवास भगवान महावीर स्वामी ने किए है। भगवान महावीर ने 20 वर्ष में मात्र 364 आहार ग्रहण किए थे। भगवान आदिनाथ को भी 6, माह आहार नहीं मिला था। और भगवान बाहुबली को भी 1 वर्ष तक कठोर तप किया था। आचार्य श्री ने अपने गुरु आचार्य श्री विराग सागर जी का स्मरण करते हुए कहा कि गुरु अपने शिष्यों को परख लेते है कि ये भविष्य में परंपरा का सही तरीके से निर्वहन करेगा। ऐसे शिष्यों को गुरु आचार्य पद प्रदान करते हैं। उसके बाद भी गुरु जी ने हमें संघ से नहीं छोड़ा क्योंकि, जब तक आचार्य संहिता नहीं पढ़ाई जाती तब तक आचार्य पद अधूरा है। आचार्य श्री विराग सागर जी ने हमे और हमारे गुरु भाई आचार्य विमर्श सागर जी को सारी क्लास छोड़ कर 4 घंटे तक लगातार पढ़ाया और जिसने आचार्य संहिता नहीं पढ़ी वो आचार्य पद के योग्य नहीं होता। आचार्य संहिता पढ़ाने के बाद गुरु जी ने कहा कि जाओ अब आप धर्म की खूब प्रभावना करो। शिक्षा-दीक्षा दो।इस अवसर पर पूरे प्रदेश और देश भर से कई श्रावक श्राविका गुरु भक्त इकट्ठे हुए और इस सुंदर और मनोज्ञ तीर्थ के दर्शन कर पूजा अर्चना की ,शाम को आचार्य संघ का प्रतिक्रमण, गुरुभक्ति हुई,शाम को भगवान की और आचार्य श्री की आरती हुई। ट्रस्टी धर्मेंद्र जैन ने सभी अतिथियों का आभार माना। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।

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