कई नगरों में आचार्य शांति सागर जी की पाषाण और धातु की प्रतिमाएं विराजित हुई हैं। उनके शांति स्तूप भी विराजित किए गए हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का दिगंबर मंदिरों, जिनवाणी, जिनधर्म और संस्कृति पर अनेक उपकार हैं। वर्तमान श्रमण परंपरा आचार्य श्री की देन है। समाज उनके उपकारों के ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकता है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने प्रकट की। बोली से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
बोली। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिस्थापना का शताब्दी महोत्सव पूरे देश में मनाया जा रहा है। अनेक नगरों में आचार्य शांति सागर जी की पाषाण और धातु की प्रतिमाएं विराजित हुई हैं। उनके शांति स्तूप भी विराजित किए गए हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का दिगंबर मंदिरों, जिनवाणी, जिनधर्म और संस्कृति पर अनेक उपकार हैं। वर्तमान श्रमण परंपरा आचार्य श्री की देन है। समाज उनके उपकारों के ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकता है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने बोली में नूतन वेदी निर्माण के पूजन और आचार्य शांति सागर स्तूप के लोकार्पण के अवसर पर प्रकट की। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महामुनिराज ससंघ का मंगलवार को दोपहर को 6.9 किमी मंगल विहार भोमिया मंदिर परिसर के लिए हुआ। श्री संघ का रात्रि विश्राम सिसोलाओं में हुआ। आचार्य संघ का बुधवार को 3.9 किमी विहार होकर संघ की आहार चर्या जामडोली में होगी। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं मुनि श्री भुवन सागर जी की जन्म नगरी बोली में अभूतपूर्व धर्म प्रभावना अंतर्गत श्रीजी की नूतन वेदी स्थापना, आचार्य श्री शांति सागर जी के स्तूप निर्माण के धर्म प्रभावना के मंगल कार्यक्रम हुए।
यह समाजजन रहे पुण्यार्जक
मनोज सोगानी ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में आचार्य श्री शांति सागर जी का स्तूप बड़े मंदिर में पदमकुमार जितेंद्र कुमार वेद बोली पुण्यार्जक परिवार द्वारा विराजित किए गए। बड़े मंदिर में श्री अजीतनाथ भगवान की नूतन वेदी का निर्माण पूजन सुनीता शाह, गजेंद्र, मनोज मीनू शाह परिवार बोली जयपुर ने किया। श्री शांतिनाथ, श्री कुंथुनाथ, श्री अर्ह नाथ की नूतन वेदी के निर्माण का पूजन हेमलता वेद ने किया। इसी प्रकार श्री मुनि मुनिसुव्रतनाथ मंदिर रवासा में आचार्य श्री शांति सागर जी का स्तूप मनोज, संजीव राजीव सोगानी परिवार ने स्थापित किया। वर्ष 2022 में आचार्यश्री के शिष्य मुनि श्री श्रेयस सागर जी की अनायास समाधि बोली में 19 दिसंबर 2022 को हुई थी। वर्षों पूर्व निर्मित समाधि स्थल पर उनके चरणों की स्थापना की गई।













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